
(नीरज कुमार तिवारी संपादक) बिलासपुर आदिवासी क्षेत्र में संचालित आदिवासी बालक आश्रम कुरदर एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण सुर्खियों में है। ग्रामीणों और शिकायतकर्ता ने हॉस्टल अधीक्षक पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कर सरकारी राशि और राशन के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। मामले में यह भी कहा जा रहा है कि बच्चों के नाम पर मिलने वाले राशन और पैसों का इस्तेमाल अन्य कार्यों में किया जा रहा है।

मिली जानकारी के अनुसार आश्रम में 50 छात्रों के रहने की व्यवस्था है, लेकिन वास्तविकता में यहां महज 15 से 20 छात्र ही रह रहे हैं। इसके बावजूद रिकॉर्ड में 50 छात्रों की उपस्थिति दर्ज कर शासन को रिपोर्ट भेजी जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस तरह फर्जी हाजिरी दिखाकर शासन से मिलने वाली राशि और राशन में बड़ा खेल किया जा रहा है।

ग्रामीणों की शिकायत के बाद जब मीडिया द्वारा आश्रम का निरीक्षण किया गया तो उस समय हॉस्टल अधीक्षक मौके पर मौजूद नहीं थे। वहीं रसोईघर में कढ़ाई में मछली बनती हुई मिली। इस संबंध में रसोइया से पूछताछ करने पर उसने बताया कि बच्चों को मछली और मुर्गा भी खिलाया जाता है। रसोइया के अनुसार जब जिला स्तर के अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं तो वे भी यही भोजन करते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के लिए मिलने वाले सरकारी राशन और संसाधनों का इस तरह उपयोग किया जाना शासन की योजनाओं का खुला दुरुपयोग है। उनका आरोप है कि बच्चों के नाम पर मिलने वाली राशि का सही उपयोग नहीं हो रहा, जिससे पूरे मामले में गंभीर गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

वहीं शिकायतकर्ता शिवकुमार मरकाम (सरपंच प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत कुरदर) का आरोप है कि शिकायत के बाद हॉस्टल अधीक्षक ने उल्टा उन्हीं पर 50 हजार रुपये मांगने का आरोप लगा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह स्थिति “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” जैसी हो गई है, जहां शिकायत करने वाले को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों ने आदिम जाति कल्याण विभाग के जिला सहायक आयुक्त से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और आदिवासी छात्रों के लिए संचालित आश्रम की व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कार्रवाई होती है।




