
जगदलपुर :- छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। नारायणपुर जिले के ओरछा से सटे कुमनार गांव में, जिसे कभी नक्सलियों का ‘अघोषित साम्राज्य’ और उनके शीर्ष कमांडर बसवाराजू का गढ़ माना जाता था, अब पुलिस ने एक नया सुरक्षा शिविर स्थापित कर दिया है। इस पहल को क्षेत्र में लोकतंत्र की वापसी और ग्रामीणों के लिए भयमुक्त वातावरण की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।

कुमनार में पुलिस कैंप खुलने से स्थानीय लोगों में जबरदस्त उत्साह है। यह वही क्षेत्र है जहाँ नक्सलियों का खौफ इस कदर था कि भारत का राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ भी नहीं फहराया जाता था। ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि वे बिना किसी डर के अपने राष्ट्रीय पर्व मना सकेंगे और तिरंगा फहरा सकेंगे।
यह बदलाव तब आया जब सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली बसवाराजू को मार गिराया, जिससे इस क्षेत्र में नक्सलियों का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगा। पुलिस प्रशासन नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनके बचे-खुचे ठिकानों को भी ध्वस्त करने में जुटा है। कुमनार में नए कैंप की स्थापना इसी कड़ी में एक और ‘कड़ा प्रहार’ है।
वर्ष 2025 तक ओरछा के इस भीतरी इलाके पर नक्सलियों का कब्जा था, लेकिन अब यह क्षेत्र उनकी गिरफ्त से पूरी तरह मुक्त हो गया है और पुलिस के नियंत्रण में आ चुका है। इस ‘नवीन सुरक्षा एवं जन सुविधा कैंप’ के खुलने से न केवल क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि विकास कार्यों को भी गति मिलेगी और ग्रामीण निर्भीक होकर जीवन यापन कर सकेंगे। यह घटनाक्रम बस्तर में ‘लोकतंत्र के दुश्मनों’ के खौफ के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
( Neeraj Kumar Tiwari (Editor-in-Chief )




