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बिलासपुर: नशे में ड्राइविंग से मौन पर लगेगा गैर-इरादतन हत्या का केस, सड़क हादसों में दोगुनी मौतें प्रशासन चिंतित

बिलासपुर: नशे में ड्राइविंग से मौन पर लगेगा गैर-इरादतन हत्या का केस, सड़क हादसों में दोगुनी मौतें प्रशासन चिंतित

बिलासपुर जिले में सड़क दुर्घटनाओं का भयावह आंकड़ा सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अब नशे की हालत में वाहन चलाने से होने वाली किसी भी मौत को गैर-इरादतन हत्या (गैर जमानती धारा 304 पार्ट-2) के दायरे में लाया जाएगा। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह ने यह घोषणा एक उच्च स्तरीय बैठक में की, जिसमें सड़क सुरक्षा और नियमों के पालन पर गहन चिंता व्यक्त की गई।

 बढ़ते हादसों का डरावना सच

 एसएसपी रजनेश सिंह द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों ने सभी को चौंका दिया है। इस साल की शुरुआत से अब तक जिले में सड़क दुर्घटनाओं में 71 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समान अवधि में यह आंकड़ा 33 था। यह संख्या स्पष्ट रूप से सड़क हादसों में दोगुनी वृद्धि को दर्शाती है, जो बिलासपुर की सड़कों पर बढ़ती लापरवाही और सुरक्षा की कमी की ओर इशारा करती है। एसएसपी सिंह ने बताया कि अधिकांश दुर्घटनाएं नशे की हालत में वाहन चलाने के कारण हो रही हैं।

 गैर-इरादतन हत्या का प्रावधान और इसके निहितार्थ

 नशे में ड्राइविंग को लेकर प्रशासन की यह सख्ती एक महत्वपूर्ण कदम है। एसएसपी ने जोर देकर कहा कि ऐसी दुर्घटनाओं में न केवल निर्दोष लोगों की जान जाती है, बल्कि पीड़ितों के परिवारों को बीमा क्लेम प्राप्त करने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज होने से चालकों पर कानूनी शिकंजा और कसेगा, जिससे उन्हें अपने कृत्य की गंभीरता का एहसास होगा और वे भविष्य में ऐसी लापरवाही करने से बचेंगे।

 हालिया दुर्घटनाओं ने बढ़ाई चिंता

 जिले में हाल ही में घटी दो प्रमुख सड़क दुर्घटनाएं, स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाती हैं:

 पचपेड़ी थाना क्षेत्र में कार हादसा: महादेवा तालाब के पास एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पलट गई। इस भयावह हादसे में कार सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के अनुसार, कार में तीन भाई सवार थे और यह दुर्घटना सामने से आ रहे एक बाइक सवार को बचाने के प्रयास में हुई।

 बिलासपुर-मुंगेली मुख्य मार्ग पर हाइवा पलटा: पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास बिलासपुर-मुंगेली मुख्य मार्ग पर एक हाइवा वाहन का टायर फट जाने से वह अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। राहत की बात यह रही कि दुर्घटना के समय सड़क पर यातायात कम था, जिससे कोई जनहानि या गंभीर चोटें नहीं आईं।

 स्थानीय लोगों की नाराजगी और बुनियादी समस्याओं पर सवाल

 लगातार हो रहे इन हादसों से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। उनका आरोप है कि सड़कों की खराब हालत, खतरनाक अंधे मोड़, अपर्याप्त संकेतक बोर्ड और सड़क पर घूमते मवेशी भी इन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। नागरिकों का कहना है कि सिर्फ चालकों पर सख्ती करने से ही समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि सड़कों के बुनियादी ढांचे में सुधार और सुरक्षा उपायों को भी मजबूत करना होगा।

 प्रशासन की बैठक और कार्रवाई

 सड़क सुरक्षा को लेकर जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित कोटपा एक्ट, एन कार्ड और सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में एसएसपी रजनेश सिंह ने इन चिंताजनक आंकड़ों और परिस्थितियों को सामने रखा। उन्होंने बताया कि नशे की हालत में वाहन चलाने के खिलाफ पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है और अब तक 1000 से अधिक वाहन जब्त किए जा चुके हैं। इसके बावजूद लोग लापरवाही बरत रहे हैं।

 जनता से अपील और आगे की राह

 एसएसपी ने जनसामान्य से अपील करते हुए कहा है कि नशे की हालत में वाहन चलाने से न केवल अपनी जान को खतरा होता है, बल्कि दूसरों की जिंदगी भी खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने यातायात नियमों का कड़ाई से पालन करने और शराब पीकर गाड़ी न चलाने का आग्रह किया।

 बिलासपुर में सड़क सुरक्षा एक बहुआयामी चुनौती बन गई है। इसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस की सख्ती, प्रशासनिक सुधारों (सड़क गुणवत्ता, संकेतक) और जन जागरूकता अभियानों का एक साथ चलना अनिवार्य है। केवल तभी इन दर्दनाक सड़क हादसों पर अंकुश लगाया जा सकेगा और नागरिकों को सुरक्षित यात्रा का अधिकार मिल पाएगा।

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