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महाविस्फोट: सहकारिता विभाग में ‘वसूली गैंग’ का आतंक, पत्रकार हुए खामोश कराने की साजिश का शिकार! हेमवती पुरैना और गोधूलि वर्मा पर गंभीरतम आरोप – क्या शासन-प्रशासन के हाथों से फिसल रहा है पूरा सिस्टम?!

महाविस्फोट: सहकारिता विभाग में 'वसूली गैंग' का आतंक, पत्रकार हुए खामोश कराने की साजिश का शिकार! हेमवती पुरैना और गोधूलि वर्मा पर गंभीरतम आरोप – क्या शासन-प्रशासन के हाथों से फिसल रहा है पूरा सिस्टम?!

महाविस्फोट: सहकारिता विभाग में ‘वसूली गैंग’ का आतंक, पत्रकार हुए खामोश कराने की साजिश का शिकार! हेमवती पुरैना और गोधूलि वर्मा पर गंभीरतम आरोप – क्या शासन-प्रशासन के हाथों से फिसल रहा है पूरा सिस्टम?

 (नीरज कुमार तिवारी संपादक) बिलासपुर अरे बाप रे यही है सिस्टम हकारिता विभाग में तो सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, अब तो ‘जान की बाजी’ लग गई है! जिस ‘वसूली गैंग’ का पर्दाफाश हुआ है, उसका सरगना हेमवती पुरैना, जिस पर कर्मचारियों को नौकरी और वेतन दिलाने के नाम पर 70 से 80 हजार की मोटी रिश्वत मांगने का आरोप है, अब पत्रकारों को खुलेआम धमका रहा है।

 आप कहां रहते हैं बताइए!”पुरैना का ये सवाल महज एक धमकी नहीं, बल्कि ‘खामोश कर देने’ की एक खुली चेतावनी है। क्या विभाग में फैला ये भ्रष्टाचार इतना गहरा है कि सच्चाई उजागर करने वालों की जान को खतरा हो गया है? क्या ये ‘वसूली गैंग’ अब सबूत मिटाने और आवाज दबाने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है?

 याद रहे, हेमवती पुरैना पहले भी मस्तूरी में सीईओ रहते हुए ‘दलाली’ के लिए कुख्यात थे। अब बिलासपुर में डीआर कार्यालय से बैठकर वो, कथित तौर पर वर्तमान सीईओ गोधूलि वर्मा की ‘मिलीभगत’ से, बिना किसी नियम-कानून के लोगों को नौकरी बांट रहे हैं और शिकायतें दबा रहे हैं।

 कर्मचारी तो इस ‘वेतन घोटाले’ और ‘मिलीभगत’ से आक्रोशित हैं ही, लेकिन अब पत्रकारों पर सीधे हमले की इस धमकी ने पूरे मामले को एक नया और खौफनाक मोड़ दे दिया है।

प्रशासन को अब सिर्फ जांच नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और इस ‘खतरनाक गैंग’ को तुरंत काबू में करने के लिए युद्धस्तर पर कार्रवाई करनी होगी! सवाल ये है – क्या हमारा शासन-प्रशासन इतना बेबस हो गया है कि खुलेआम चल रहे इस ‘आतंक’ को रोकने में नाकाम है? या फिर इस पूरे खेल में कुछ ‘ऊंचे रसूखदार’ भी शामिल हैं, जिनके इशारे पर ये सब चल रहा है?

 

इस पूरे मामले में अब सिर्फ दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद नहीं, बल्कि पत्रकारों के लिए सुरक्षा और सच्चाई के लिए लड़ने की हिम्मत बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई है। ये देखना होगा कि कब तक ये ‘वसूली गैंग’ अपनी धाक जमा पाता है!

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