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तत्काल संज्ञान लें! अवैध निर्माण उजागर करने पर पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी: क्या प्रशासन की चुप्पी अपराधियों को संरक्षण दे रही है?

पत्रकारों की सुरक्षा पर गहरा संकट: अवैध निर्माण की खबर छापने पर पत्रकार को जान से मारने की धमकी, चांपा में दहशत का माहौल है

तत्काल संज्ञान लें! अवैध निर्माण उजागर करने पर पत्रकार को मिली जान से मारने की धमकी: क्या प्रशासन की चुप्पी अपराधियों को संरक्षण दे रही है?

चांपा (जांजगीर-चांपा): पत्रकार सुरक्षित नहीं, तो लोकतंत्र कैसे बचेगा?

जांजगीर-चांपा जिले के चांपा शहर में एक ऐसी घटना सामने आई है, जो न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आज भी हमारे समाज में सच बोलना इतना खतरनाक है कि उसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़े। वार्ड क्रमांक 26, छुईहा तालाब नया कॉलेज रोड क्षेत्र में वर्षों से बेधड़क चल रहे एक अवैध निर्माण के गोरखधंधे को उजागर करने वाले स्थानीय पत्रकार मनीराम आजाद को जान से मारने की धमकी मिली है। यह सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, यह हमारे चौथे स्तंभ पर हमला है, और प्रशासन की चौंकाने वाली निष्क्रियता इस संकट को और गहरा रही है।

 मामले की जड़: सत्ता-संरक्षण में पनप रहा अवैध कारोबार!

यह मामला सिर्फ सीमेंट के गमले, खंभे और जाली बनाने के एक अवैध कारोबार तक सीमित नहीं है। यह एक ऐसी व्यवस्था का आईना है, जहाँ नियम-कानून ताक पर रखकर, बिना किसी अनुमति के, सार्वजनिक जमीन या अवैध रूप से प्राप्त सामग्री से धड़ल्ले से निर्माण चल रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस निर्माण में इस्तेमाल होने वाली रेत भी अवैध खनन से लाई जाती है, जो खनिज विभाग की संलिप्तता या उसकी घोर लापरवाही की ओर इशारा करती है। यह केवल राजस्व हानि का मामला नहीं, यह भ्रष्टाचार और मिलीभगत का एक जीता-जागता उदाहरण है, जिसकी बू दूर तक फैल रही है।

खबर छापी, तो मौत की धमकी!

 

जब एक स्वतंत्र पत्रकार मनीराम आजाद ने इस अवैध कारोबार और प्रशासनिक ढिलाई को अपनी कलम से उजागर किया, तो उन्हें वाहवाही नहीं, बल्कि मौत की धमकी मिली। आरोपियों विष्णु रात्रे और राजकुमारी रात्रे ने न केवल पत्रकार और उनके परिवार को सरेआम गाली-गलौज की, बल्कि जान से मारने और दूसरों से मरवाने की भी धमकी दी। यह एक पत्रकार को डराने, धमकाने और सच को दबाने का सीधा प्रयास है।

पत्रकार की गुहार, प्रशासन बेखबर?

मनीराम आजाद ने तत्काल अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा और थाना प्रभारी चांपा को लिखित शिकायत दी। उन्होंने अपनी और अपने परिवार की जान का खतरा बताते हुए, भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना की पूरी जिम्मेदारी आरोपियों पर डाली है। इतना ही नहीं, उन्होंने धमकी से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थाना प्रभारी के व्हाट्सएप नंबर पर उपलब्ध कराई है, जो चीख-चीख कर सच बोल रही है।

लेकिन, दुखद और चिंताजनक बात यह है कि इन स्पष्ट सबूतों और गंभीर आरोपों के बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यह उदासीनता क्यों? यह चुप्पी किस बात का संकेत है? क्या प्रशासन किसी दबाव में है, या उसे पत्रकारों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की कोई परवाह नहीं है?

 शासन-प्रशासन, जवाब दें!

 यह मामला अब सिर्फ एक छोटे से कस्बे के अवैध निर्माण का नहीं रहा। यह पत्रकार सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के राज और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन गया है।

क्या प्रशासन की यह चुप्पी अपराधियों को और अधिक बेलगाम नहीं करेगी?

क्या यह संदेश दिया जा रहा है कि आप अवैध काम करें, प्रशासन कुछ नहीं कहेगा, लेकिन यदि कोई उसे उजागर करे तो उसे डराया-धमकाया जा सकता है?द

 जांजगीर-चांपा जिला प्रशासन और राज्य सरकार को इस मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। आरोपियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि यह संदेश जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, और सच बोलने वालों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। पत्रकार मनीराम आजाद और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह घटना पूरे देश में एक गलत और खतरनाक मिसाल कायम करेगी!

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