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बिलासपुर का ‘धान-कांड’: 319 क्विंटल धान ‘हवा’ में उगा! करोड़ों का ‘महा-घोटाला’ बेनकाब, सफेदपोशों पर तलवार!

बिलासपुर का 'धान-कांड': 319 क्विंटल धान 'हवा' में उगा! करोड़ों का 'महा-घोटाला' बेनकाब, सफेदपोशों पर तलवार!

बिलासपुर, छत्तीसगढ़: थर्रा उठा है पूरा बिलासपुर जिला! धान खरीदी केंद्र में नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सरकारी तिजोरी में सेंध लगाने का एक ऐसा ‘महा-घोटाला’ सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक अमले की नींद उड़ा दी है। पचपेड़ी क्षेत्र के ग्राम पंचायत बहतरा स्थित धान खरीदी केंद्र अब ‘घोटालों का गढ़’ बन चुका है, जहां से करोड़ों के वारे-न्यारे की गूंज सुनाई दे रही है!

सत्यापन के बाद ‘भूतों’ ने उगाया 319 क्विंटल धान? 10 लाख नहीं, अब 10 करोड़ के घोटाले की आशंका!

जो जानकारी सामने आई है, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं! 5 फरवरी को खरीदी बंद, सारे रजिस्टर सील, और विधिवत सरकारी सत्यापन भी हो गया। उस वक्त शान से ऐलान किया गया – “40,135 क्विंटल धान दर्ज!” वाह-वाही बटोरी गई। लेकिन, साहब! सिर्फ एक महीने बाद, 7 मार्च को, वही रजिस्टर खोले गए तो आंखें फटी रह गईं – धान का आंकड़ा पहुंच गया था 40,454 क्विंटल पर! यानी, 319 क्विंटल धान ‘भूतों’ ने आकर बो दिया, काट लिया और रिकॉर्ड में चढ़ा भी दिया! यह 319 क्विंटल धान नहीं, यह तो 319 क्विंटल ‘सवालों का पहाड़’ है, जो सीधे-सीधे सरकारी भ्रष्ट्राचार की पोल खोल रहा है!

शुरुआत में जिस ‘मामूली’ 10 लाख के हेरफेर की बात हो रही थी, वह अब बढ़कर ‘महा-घोटाले’ में तब्दील हो चुकी है! 319 क्विंटल धान की कीमत बाजार में करोड़ों में है, और यह ‘आंकड़ों की बाजीगरी’ किसी छोटे-मोटे खिलाड़ी का काम नहीं! इसके पीछे ज़रूर कोई ‘बड़ा खिलाड़ी’ है, जिसने पूरे सिस्टम को अपनी उंगलियों पर नचाया है!

केंद्र प्रबंधक और ऑपरेटर नहीं, ‘घोटाले की जड़’ तक पहुंची है जांच की आंच!

केंद्र प्रबंधक उमाशंकर पटेल और ऑपरेटर नरेंद्र कुमार पटेल तो सिर्फ ‘मोहरे’ हैं! स्थानीय ग्रामीण चीख-चीख कर कह रहे हैं कि यह कोई छोटी-मोटी मिलीभगत नहीं, बल्कि ‘सुनियोजित अपराध’ है, जिसके तार काफी ऊपर तक जुड़े हो सकते हैं। और जब बात बड़े नाम की आती है, तो जिला नोडल अधिकारी और सहकारिता विभाग के सीईओ गोदली वर्मा भी शक के घेरे में हैं। उनकी ‘रहस्यमय’ चुप्पी और इस पूरे प्रकरण पर ‘लापरवाही’ उन्हें सीधे कटघरे में खड़ा कर रही है!

जनता का खून खौल उठा: ‘सफेदपोशों’ की गर्दन पर शिकंजा कसने की मांग!

अब जनता का धैर्य टूट चुका है! करोड़ों का धान-कांड और अधिकारी मौन! ग्रामीण सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। उनकी एक ही मांग है – ‘निष्पक्ष जांच नहीं, सीधा पर्दाफाश!’ दोषियों को सख्त से सख्त सज़ा मिले, और इस ‘धान-काले कारोबार’ के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ गिरेबान पकड़े जाएं!

यह सिर्फ धान का मामला नहीं, यह ‘विश्वास का कत्ल’ है! अब देखना यह है कि प्रशासन कब तक इस ‘महा-घोटाले’ पर पर्दा डाले रखता है, या फिर कब तक ‘न्याय की तलवार’ चलती है और इन ‘धानचोरों’ को उनकी सही जगह दिखाती है! जनता की निगाहें लगी हैं, और इस बार कोई लीपापोती बर्दाश्त नहीं होगी!


 

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