“रतखंडी में ‘रास्ता खुदा’ का झूठ बेनकाब! ग्रामीणों ने लोकल पत्रकार को दिया झांसा, ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ की पड़ताल में फूटा भांडा — 19000 की रेत, 22 वाहन सीज, माफिया फिर भी बेलगाम”
रतखंडी में 'रास्ता खोद दिया' का फर्जी ढोल, ग्रामीणों ने लोकल पत्रकार को खिलाया झांसा! 'छत्तीसगढ़ जनता की आवाज' की रेड में फूटा भांडा — नदी में ट्रैक्टरों की बारात, 19000 की रेत से बिलासपुर बेहाल, 22 गाड़ियां जब्त फिर भी माफिया बेलगाम"

बिलासपुर में अब मकान बनवाना मतलब जेब का पोस्टमार्टम। वजह सिर्फ एक — रेत। जो हाईवा 15 हजार में दरवाजे पर खड़ा होता था, अब 19 हजार मांग रहा है। सीधा 4 हजार का करंट। और इस करंट का मेन स्विच दब रहा है जांजगीर-चांपा की हसदेव नदी में।

अरपा ने दगा दिया, हसदेव बनी चारागाह
अरपा नदी और पचपेड़ी घाट ने अब बढ़िया रेत उगलना बंद कर दिया। बस इसी का फायदा उठाकर रेत माफिया ने हसदेव नदी को अपना ATM बना लिया। पीथमपुर पुल के पास का नजारा देखो तो आंखें फटी रह जाएं। नदी के सीने पर पोकलेन दहाड़ रही है, हाईवा की लंबी कतार लगी है, और रेत ऐसे लूटी जा रही है जैसे सरकारी राशन हो। सबसे बड़ा कारनामा ये कि वहां एक इंच भी लीगल रेत खदान आवंटित नहीं है। मतलब पूरा धंधा अवैध, खुल्लम खुल्ला, बेखौफ।

रात का ‘रेत-एक्सप्रेस’ और बिलासपुर की नींद हराम
अब इस चोरी की रेत को बिलासपुर पहुंचाने का भी अपना मुहूर्त है। सूरज ढलते ही रेत से लदे हाईवा अकलतरा नेशनल हाईवे के किनारे मुंह छुपाकर खड़े हो जाते हैं। फिर जैसे ही शहर में नो-एंट्री का पट खुला, वैसे ही पूरा काफिला ‘सन्नाटा चीरते हुए’ बिलासपुर में घुस जाता है। रात 9 बजे के बाद सड़कें इन्हीं की, कानून ताक पर, जनता की जेब साफ।

रतखंडी का ‘महाझूठ’: ग्रामीणों ने पत्रकार को ही पट्टी पढ़ा दी
इस फिल्म में सबसे बड़ा ट्विस्ट मारा रतखंडी रेत घाट ने। कुछ दिन पहले लोकल पत्रकार भाइयों को गांव वालों ने बड़ा भोला बनकर बताया — “भैया, यहां अब कुछ नहीं निकल रहा। हमने खुद जेसीबी से रास्ता खोद दिया है। घाट बंद।” पत्रकार ने भी इंसानियत के नाते यकीन कर लिया।
मगर ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ के संपादक के दिमाग की बत्ती जल गई। सोचा, अगर रास्ता ही खुदा पड़ा है तो खनिज विभाग ने रतखंडी से 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली रंगे हाथ कैसे पकड़े? कुछ तो गड़बड़ है।
संपादक खुद अपनी टीम लेकर रतखंडी पहुंचे। और वहां का सीन देखकर होश उड़ गए। अरपा नदी के अंदर ट्रैक्टर-ट्रॉली की पूरी बारात खड़ी थी। जेसीबी से रेत निकाली जा रही थी, ट्रैक्टर भर रहे थे। मतलब साफ था — ग्रामीणों ने ‘रास्ता खोद दिया’ का फर्जी ढोल पीटकर लोकल पत्रकार को गुमराह किया था, ताकि काला कारोबार आराम से चलता रहे।

न्यूज़ का बम फूटा, प्रशासन की नींद टूटी
जैसे ही ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ ने ग्राउंड जीरो की तस्वीरें छापीं, शासन-प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिला खनिज अधिकारी की टीम ने तुरंत रतखंडी पर धावा बोल दिया। मौके से अवैध उत्खनन करते 10 ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त।
इसके बाद 3 दिन तक जिले भर में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ चली। धुमा-मानिकपुर से 1 पोकलेन और 4 हाईवा, लावर से 1 हाईवा, राजपुर-केकती से 1 जेसीबी और 4 ट्रैक्टर, बुतेना से मुरुम चोरी करती 1 जेसीबी — कुल 22 गाड़ियां धर दबोची गईं। सबको बेलगहना और लावर चौकी में बंद कर दिया गया। रतखंडी की पोल खुलते ही अब दूसरे जिलों में भी खनिज विभाग की गाड़ियां दौड़ने लगी हैं।
लेकिन जांजगीर में अब भी ‘जंगल राज’
22 गाड़ियां सीज हुईं, मगर पीथमपुर पुल का ताजा वीडियो चीखकर कह रहा है कि हसदेव में अवैध उत्खनन बंद नहीं हुआ। जब तक वहां पोकलेन गरजेगी और रात में हाईवा दौड़ेंगे, तब तक बिलासपुर वाला 19000 गिनता रहेगा। ट्रांसपोर्टर का बहाना रेडी है — “जांजगीर से लाना पड़ रहा है साब, खर्चा ज्यादा है।”
जनता के लिए 4 कड़वे सच
‘रास्ता खुदा है’ सबसे बड़ा झूठ था। ग्रामीणों ने लोकल पत्रकार को गुमराह किया। घाट पर धंधा फुल स्पीड में था।
न्यूज़ नहीं छपती तो कार्रवाई नहीं होती। ‘छत्तीसगढ़ जनता की आवाज’ की पड़ताल के बाद ही 22 गाड़ियां पकड़ी गईं।
अगर रास्ता बंद था तो ट्रैक्टर नदी में उड़कर तो नहीं पहुंचे। मतलब अंदरखाने रास्ता चालू है।
4000 का झटका फिक्स है। जब तक हसदेव से चोरी की रेत आएगी, बिलासपुर में मकान महंगा ही पड़ेगा।
आखिरी बात: नदी खोखली हो रही है, ग्रामीण झूठ बोल रहे हैं, पत्रकार को झांसा दिया जा रहा है, और आम आदमी हर हाईवा पर 4000 extra लुटा रहा है। न्यूज़ ने पर्दा फाड़ा तो सिस्टम हिला, वरना सब मैनेज था!




