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सनातन ज्ञान धरोहर को बचाने का महायज्ञ शुरू : बिलासपुर में ज्ञानभारत मिशन के तहत पांडुलिपि संरक्षण अभियान का शंखनाद

कलेक्टर बोले, “यह केवल कागज नहीं, हमारी धर्म-निष्ठा और ऋषि परंपरा का जीवंत प्रमाण है” : जिले के हर मंदिर, मठ और घर तक पहुंचेगी सर्वे टीम

कलेक्टर बोले, “यह केवल कागज नहीं, हमारी धर्म-निष्ठा और ऋषि परंपरा का जीवंत प्रमाण है” : जिले के हर मंदिर, मठ और घर तक पहुंचेगी सर्वे टीम

 बिलासपुर, 13 अप्रैल 2026 :- भारत की सनातन ज्ञान परंपरा और धर्म-निष्ठा से जुड़ी अमूल्य धरोहर को काल के गाल में समाने से बचाने के लिए बिलासपुर जिले में “ज्ञानभारत मिशन” के तहत ऐतिहासिक अभियान का शुभारंभ हो गया है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इसे केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि “धर्म और संस्कृति की रक्षा का महायज्ञ” बताया। सोमवार को जिला स्तरीय समिति की पहली बैठक के बाद कलेक्टर स्वयं संतों और विद्वानों के साथ पांडुलिपियों की खोज में निकल पड़े।

 बैठक में गूंजा धर्म-रक्षा का संकल्प :- कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हुई बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय के कुलसचिव तारनिश गौतम, वरिष्ठ साहित्यकार विनय पाठक, सहायक संचालक शिक्षा पी. दासरथी और समग्र शिक्षा मिशन के समन्वयक ओम पांडे समेत धर्म-अनुरागी विद्वान शामिल हुए। 

 बैठक के मुख्य निर्णय:

धर्मस्थलों पर विशेष फोकस: जिले के सभी प्राचीन मंदिरों, मठों, आश्रमों और पुजारी परिवारों के पास संरक्षित ताड़पत्रों, भोजपत्रों और हस्तलिखित ग्रंथों का प्राथमिकता से सर्वे होगा।

गुप्त धरोहर को सामने लाने की अपील: कलेक्टर ने कहा कि कई परिवारों में पीढ़ियों से वेद, पुराण, आयुर्वेद और ज्योतिष के ग्रंथ पूजाघर में रखे हैं। लोक-लाज या जानकारी के अभाव में वे नष्ट हो रहे हैं। यह धर्म की हानि है।

डिजिटल युग में धर्म का संरक्षण: सभी पांडुलिपियों को स्कैन कर “ज्ञानभारत डिजिटल कोष” में सुरक्षित किया जाएगा। ताकि आने वाली पीढ़ियां भी ऋषियों के ज्ञान से जुड़ सकें।

 कलेक्टर का आह्वान : यह धर्म का कार्य है :- कलेक्टर संजय अग्रवाल ने भावुक अपील करते हुए कहा, “ये पांडुलिपियां केवल स्याही और कागज नहीं हैं। ये हमारे पूर्वजों की तपस्या, हमारे वेदों की ऋचाएं और सनातन धर्म की आत्मा हैं। इन्हें बचाना हर सनातनी का कर्तव्य है।” उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि इस अभियान को मिशन मोड में चलाया जाए।

 नागरिकों के लिए निर्देश:

जानकारी साझा करें: यदि आपके घर, मंदिर या संस्था में कोई भी प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथ, ताड़पत्र, गुटका या पोथी है तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।

ज्ञानभारत ऐप का उपयोग: मोबाइल में “ज्ञानभारत” ऐप डाउनलोड कर फोटो और बुनियादी जानकारी अपलोड करें। धर्म के इस कार्य में तकनीक आपका माध्यम बनेगी।

पुण्य का भागी बनें: जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम डिजिटल कोष में संरक्षक के रूप में दर्ज होगा। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए आपका पुण्य-दान होगा।

 धरोहर की खोज में खुद निकले कलेक्टर :- बैठक के बाद कलेक्टर के नेतृत्व में समिति का दल सीधे शुभम विहार पहुंचा। वहां पूर्व कुलसचिव और धर्म-संस्कृति के मर्मज्ञ नंद किशोर तिवारी से मुलाकात की। श्री तिवारी ने बताया, “बिलासपुर क्षेत्र महाभारतकाल से ऋषि-मुनियों की तपोभूमि रहा है। रतनपुर, मल्हार और कोटा के कई मंदिरों में आज भी दुर्लभ ग्रंथ हैं।” उन्होंने आश्वस्त किया कि संत समाज इस धर्म-कार्य में प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।

 शोधार्थियों और गुरुकुलों से विशेष अनुरोध :- कलेक्टर ने संस्कृत विद्यालयों, गुरुकुलों और इतिहास के शोधार्थियों से कहा कि वे अपने आसपास की ऐसी धरोहर को चिन्हित कर अभियान का हिस्सा बनें। यह ज्ञान की गुरु-दक्षिणा होगी। यह अभियान केवल दस्तावेज बचाने का काम नहीं है। यह हमारी आस्था, निष्ठा और सनातन पहचान को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया है 

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