Welcome to CHHATTISGARH JANTA KI AWAAZ NEWS   Click to listen highlighted text! Welcome to CHHATTISGARH JANTA KI AWAAZ NEWS
कोटा बेलगहनाटॉप न्यूज़बिलासपुर छत्तीसगढ़राजनीतिलोकल न्यूज़

रतखंडी रेड घाट: “जनता का बुलडोजर” का ढोल फूटा! यहाँ तो माफिया का ट्रैक्टर फर्राटा भर रहा है, प्रशासन कान में तेल डालकर सोया

रतखंडी रेड घाट: "जनता का बुलडोजर" का ढोल फूटा! यहाँ तो माफिया का ट्रैक्टर फर्राटा भर रहा है, प्रशासन कान में तेल डालकर सोया

बिलासपुर/कोटा बेलगहना। वाह रे पत्रकारिता! कुछ ‘बहादुर’ कलमकारों ने छाती ठोक कर खबर छाप दी — “जनता का बुलडोजर अवैध माफियाओं पर चला, माफिया में हड़कंप!” हेडलाइन पढ़कर लगा जैसे कोटा में क्रांति आ गई। पर ज़मीन पर उतरो तो कहानी उल्टी है — यहाँ बुलडोजर नहीं, माफिया का ट्रैक्टर सीना तानकर धूल उड़ा रहा है!

 रतखंडी रेड घाट की हकीकत किसी स्टिंग ऑपरेशन से कम नहीं। न बुलडोजर की गर्जना, न माफिया के चेहरे पर खौफ। दिन के उजाले में, खुलेआम, धड़ल्ले से अवैध रेत उत्खनन का खेल चल रहा है। ट्रैक्टरों की कतारें ऐसी लगती हैं मानो सरकारी मेले में मुफ्त का राशन बंट रहा हो, जेसीबी नदी का सीना चीर रही है और ट्रक पर ट्रक रेत लादकर फरार हो रहे हैं — न परमिट, न रोक, न टोक। कानून यहाँ छुट्टी पर है!

 कोटा विधानसभा के इस ‘लाल घाट’ ने अब रेत माफिया के लिए एटीएम का रूप ले लिया है। सुबह सूरज उगने से पहले ही इंजन गरजने लगते हैं और शाम ढले तक नदी लुटी-पिटी पड़ी रहती है। और प्रशासन? वो फाइलों में ‘सख्त कार्रवाई’ लिखकर गहरी नींद सो रहा है।

गाँव वाले अब खुलकर बोल रहे हैं — “साहब, कैमरे में सब कैद है, फिर अफसर अंधे कैसे हो गए? या अंधे होने का ‘रेट’ फिक्स है?” ग्रामीणों का गुस्सा जायज़ है। उनका कहना है — “माइनिंग विभाग का ड्रामा तो देखो! कागज़ों में छापे, फोटो में जब्ती, अखबार में कार्रवाई… पर घाट पर जाओ तो वही पुराना सीन — माफिया का दरबार और अधिकारियों की सलामी। किसान की एक ट्रॉली पकड़ लो तो हंगामा, माफिया के सौ ट्रैक्टर छोड़ दो तो चुप्पी!”

 और वो पत्रकार बंधु… जो AC कमरे में बैठकर ‘बुलडोजर’ चला देते हैं, जरा एक बार घाट की धूल फाँक कर तो देखें। ऐसी ‘सूत्रों के हवाले से’ पत्रकारिता सिर्फ जनता को बेवकूफ बनाती है, माफिया को शील्ड देती है।

 रतखंडी रेड घाट की ये तस्वीरें सिर्फ रेत चोरी की नहीं, ये सिस्टम के नंगेपन की तस्वीरें हैं। ये प्रशासन की बेबसी नहीं, मिलीभगत की चुगली करती हैं।

 अब सवाल सीधा है — क्या इस खुलासे के बाद बुलडोजर सच में चलेगा, या फिर फाइलों वाला बुलडोजर ही चलता रहेगा? क्या माफिया के ट्रैक्टर जब्त होंगे या अफसरों की जेबें और भारी होंगी?

 जनता देख रही है। और इस बार सिर्फ खबर नहीं, हिसाब मांग रही है।

(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!