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रानीसागर कोटा में खुला डीएवी पब्लिक स्कूल, ग्रामीण बच्चों को मिलेगी सीबीएसई की गुणवत्ता शिक्षा

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने किया उद्घाटन, बोले – 'वैदिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम है डीएवी'

 बिलासपुर जिले के कोटा स्थित रानीसागर में शनिवार को डीएवी पब्लिक स्कूल का भव्य उद्घाटन हुआ। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने फीता काटकर स्कूल का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे ग्रामीण अंचल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विस्तार की दिशा में ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया।

 उद्घाटन समारोह की मुख्य बातें

 मुख्य अतिथि: स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव 

विशिष्ट अतिथि:  कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, नगर पंचायत अध्यक्ष सरोज साहू

मार्गदर्शन:  डीएवी के क्षेत्रीय अधिकारी प्रशांत कुमार

उपस्थित अधिकारी: जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे, बीईओ नरेंद्र पी मिश्रा

शुभारंभ:  वैदिक हवन-यज्ञ के साथ, छत्तीसगढ़ राजगीत और डीएवी गान की प्रस्तुति

 कार्यक्रम में संभाग भर के डीएवी और डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल के प्राचार्य, सैकड़ों अभिभावक और ग्रामीणजन मौजूद रहे। विद्यालय की प्रभारी प्राचार्या जसमीत कौर ने स्कूल की भावी योजनाओं की जानकारी दी। संचालन डीएवी गोढ़ी के प्राचार्य डॉ. एस.एन. पाण्डेय ने किया।

 शिक्षा मंत्री ने क्या कहा?

 शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने अपने संबोधन में 3 बड़ी बातें कहीं:

 रमन सिंह की पहल का जिक्र: छत्तीसगढ़ में डीएवी संस्थाओं की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से हुई, जिसने शिक्षा के स्तर में बड़ा बदलाव लाया।

सीबीएसई से राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा: डीएवी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम के जरिए बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति में भूमिका: नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने में डीएवी की भूमिका अहम है। महापुरुषों की जीवनी, छत्तीसगढ़ी बोली-भाषा और स्थानीय परंपराओं को पढ़ाई से जोड़ना सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

 मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलना बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए ‘वरदान’ साबित होगा।

 क्यों खास है डीएवी स्कूल?

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है?

 रानीसागर-कोटा क्षेत्र और आसपास के गांवों के बच्चों को अब बड़े शहरों जैसी सीबीएसई की पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और ग्रामीण प्रतिभाओं को भी बराबरी का मौका मिलेगा। स्कूल प्रबंधन का दावा है कि यहां पढ़ाई के साथ-साथ संस्कार और भारतीय परंपराओं पर भी जोर दिया जाएगा।

 कार्यक्रम का समापन शांति पाठ के साथ किया गया।

(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)

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