मस्तूरी एरमसाही ‘हवा में धान’ महाघोटाला दो-दो शिकायतों के बाद भी ‘कथित गड़बड़ी’ जारी! खाली बारदाने पर DO का आरोप,FIR की मांग, वरना होगा बड़ा आंदोलन!
मस्तूरी एरमसाही ‘हवा में धान’ महाघोटाला दो-दो शिकायतों के बाद भी ‘कथित गड़बड़ी’ जारी! खाली बारदाने पर DO का आरोप,FIR की मांग, वरना होगा बड़ा आंदोलन!

बिलासपुर/मस्तूरी। न्यायधानी में धान खरीदी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मस्तूरी के ऐरमसाही उपार्जन केंद्र से जो मामला सामने आया है, उसने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली को कटघरे में ला दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्र में धान उपलब्ध नहीं था, फिर भी कागज पर 166 क्विंटल [72 + 94 क्विंटल] धान का परिवहन दिखाकर DO जारी कर दिया गया। जब सरपंच ने ट्रक की जांच कराई तो कथित तौर पर अंदर धान नहीं, सिर्फ खाली बारदाने मिले।

‘शिकायत’ पर कार्रवाई न होने का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार ये मामला छुपकर नहीं हुआ। 26 फरवरी 2026 को पहली लिखित शिकायत दी गई थी – जिसमें कहा गया था कि ‘मंडी में धान नहीं है, DO जारी करना गलत है’। ग्रामीणों का आरोप है कि इस शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

शिकायतकर्ताओं का आगे आरोप है कि 2 अप्रैल 2026 को फिर कलेक्टर संजय अग्रवाल, खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, सहकारिता विभाग और विपणन अधिकारी को लिखित में अवगत कराया गया ‘मंडी खाली है, DO जारी करना नियम विरुद्ध है’।
आरोप है कि इन दो-दो शिकायतों के बावजूद खाली बारदाने पर फिर DO जारी हुआ। इसी आधार पर ग्रामीण द्वारा आपराधिक षड्यंत्र के तहत जांच की मांग कर रहे हैं।
शिकायत में उठाया गया सवाल: “दो बार अवगत कराने के बाद भी DO कैसे जारी हुआ? इसकी उच्चस्तरीय जांच हो।”
‘कागजी धान’ का आरोप: जांच का विषय
ग्रामीणों का आरोप है कि बिना भौतिक सत्यापन के, सिर्फ कागज पर धान का परिवहन दिखा दिया जाता है। ऐरमसाही का ट्रक कथित तौर पर 2 दिन से एक ही जगह खड़ा है और कागज पर उसका परिवहन दर्ज है।
‘चार अधिकारियों’ पर गंभीर आरोप – जांच की मांग
ग्रामीणों और राइस मिल संचालक की शिकायत में जिन 4 लोगों के नाम हैं, वो ये हैं। नोट: ये सभी आरोप हैं, न्यायालय में सिद्ध होना बाकी है।
ग्रामीणों का कथन है: “उच्च स्तर की जानकारी के बिना खाली बारदाने पर DO जारी होना संभव नहीं दिखता” – यह जांच से स्पष्ट होना बाकी है।
‘मिलर का पक्ष’ – बयान दर्ज
हरिओम राइस मिल के संचालक आकाश अग्रवाल का आरोप है: “बबलू घृतलहरे ने मुझे फोन कर गाड़ी बुलाई। कहा धान लोड करने के लिए तैयार है। मौके पर कथित तौर पर खाली बारदाना मिला। मेरे मुंशी ने पावती पर साइन करने से इनकार कर दिया। मेरे नाम से DO जारी होने से मुझे आर्थिक नुकसान की आशंका है। मैं विपणन अधिकारी से शिकायत करूंगा।”
सरपंच द्वारा ट्रक खुलवाने पर कथित तौर पर सिर्फ खाली बोरे मिले। ग्रामीणों का दावा है कि इसका वीडियो उनके पास उपलब्ध है। यह वीडियो जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है।
ट्रक अभी भी ऐरमसाही में खड़ा बताया जा रहा है। सरपंच का कथन है – “जब तक कलेक्टर और खाद्य नियंत्रक मौके पर आकर जांच नहीं करते, ट्रक नहीं हटेगा।”
‘अधिकारियों का पक्ष’ – संपर्क का प्रयास
घटना पर पक्ष जानने के लिए जब संबंधित अधिकारियों से संपर्क का प्रयास किया गया तो:
कलेक्टर संजय अग्रवाल: शिकायतकर्ताओं के अनुसार जवाब संतोषजनक मिला।
नोडल अधिकारी आशीष दुबे: आशीष दुबे द्वारा बताया गया की मीटिंग में व्यस्त हूं, अधिकारी को अवगत कराता हूं
खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर: अमृत कुजूर जी के द्वारा बोला गया कि अभी डीआर जसवाल जी को अवगत कराता हूं बोलकर फोन काट दिया गया
डीआर जायसवाल: कहा गया कि “टीम भेज रहे हैं” 4 घंटे बाद भी अभी तक नहीं पहुंचा है टीम यह है डीआर जायसवाल का कथन।
प्राधिकृत अधिकारी सुनील पनौरे: सुनील पनौरे जी फोन रिसीव करते ही नहीं हैं। आरोप है कि जब इनको जरूरत रहती है तभी फोन रिसीव करते हैं।
CEO गोधूलि वर्मा: CEO गोधूलि वर्मा द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। मैडम को टाइम नहीं मिलता फोन रिसीव करने के लिए।
इन सभी अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर प्रकाशित किया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि इसी केंद्र में पहले भी गड़बड़ी के आरोप में निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई थी। अब मांग है कि इस बार निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच हो।
जनता का ‘अल्टीमेटम’ – जांच की मांग
महापंचायत में निर्णय लिया गया है: “48 घंटे में यदि बबलू घृतलहरे, रंजीत घृतलहरे, सुनील पनौरे और CEO गोधूलि वर्मा पर जांच शुरू नहीं हुई, तो बिलासपुर-मस्तूरी हाईवे पर चक्काजाम किया जाएगा।
‘सबूत’ का दावा – जांच एजेंसी तय करेगी
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि उनके पास:
सबूत 1: 26/02/2026 की लिखित शिकायत की प्रति।
सबूत 2: 02/04/2026 की दूसरी शिकायत की प्रति।
सबूत 3: ट्रक में खाली बारदाने होने का कथित वीडियो।
सबूत 4: मिलर का बयान।
सबूत 5: 72 + 94 = 166 क्विंटल के जारी DO की प्रति।
ग्रामीणों की मांग है कि इन सबूतों के आधार पर EOW या उच्च स्तरीय एजेंसी से जांच कराई जाए।




