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कलेक्टर की आदेशों की अवहेलना: जयरामनगर में 19 लाख का गबन, पीड़ित 49 दिन से भटक रहा, सीईओ बोलीं- ‘रिपोर्ट जमा कर दी’

उप आयुक्त के 3 दिन में जांच के आदेश को 41 दिन बीते। प्रभारी वीरेंद्र को भुगतान नहीं, मजदूर रोज कर रहे तकादा। बैंक मैनेजर सुशील पनौरे की भूमिका भी संदिग्ध

बिलासपुर, 13 अप्रैल 2026 :- मस्तूरी विकासखंड के जयरामनगर धान खरीदी केंद्र, सेवा सहकारी समिति पं.क्र. 3089 में खरीफ सीजन 2025-26 का काम पूरा कराने वाले प्रभारी वीरेंद्र टंडन अपनी ही जेब से खर्च किए 19 लाख के लिए 49 दिन से दर-दर भटक रहे हैं। शासन से ‘सुरक्षा भंडारण एवं प्रासंगिक व्यय’ मद में जारी पूरी राशि संस्था प्रबंधक संतोष ने बैंक से आहरित कर ली, लेकिन प्रभारी को एक रुपया नहीं दिया।

49 दिन की पीड़ा, सिस्टम की बेरुखी  

पीड़ित ने 24 फरवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में टोकन क्रमांक 2070126000835 पर शिकायत की थी। 2 मार्च को उप आयुक्त ने 3 दिन में जांच रिपोर्ट मांगी थी। आदेश को 41 दिन और शिकायत को 49 दिन बीत गए, मगर पीड़ित को भुगतान नहीं मिला।

जांच रिपोर्ट पर विरोधाभास: पीड़ित को नहीं मिली, सीईओ का दावा- ‘जमा कर दी’  

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब जांच की जिम्मेदारी संभाल रहीं मस्तूरी सहकारिता विभाग की सीईओ सुश्री गोधुलि वर्मा से संपर्क किया गया। सीईओ गोधुलि वर्मा का कहना है कि, “हमने अपना प्रतिवेदन नियत समय में तैयार कर उप आयुक्त कार्यालय में जमा कर दिया है। आगे की कार्रवाई उनके स्तर से की जानी है।”

इस बयान से दो बड़े सवाल खड़े होते हैं। पहला, अगर रिपोर्ट जमा हो गई है तो 41 दिन बाद भी उप आयुक्त स्तर पर कार्रवाई क्यों लंबित है। दूसरा, पीड़ित वीरेंद्र टंडन का आरोप है कि उसे आज तक न जांच रिपोर्ट की कॉपी मिली है और न ही भुगतान। वीरेंद्र का कहना है, ‘रिपोर्ट जमा करने से मेरा क्या भला होगा। 49 दिन से मैं अपने ही पैसे के लिए भीख मांग रहा हूं। कागजों में जांच पूरी हो गई, पर मेरी पीड़ा जस की तस है’।

बैंक से निकले 19 लाख, मैनेजर सुशील पनौरे पर मिलीभगत का आरोप  

बैंक से मिली जानकारी के अनुसार पूरी राशि प्रबंधक के हस्ताक्षर से निकाली जा चुकी है। इससे बैंक मैनेजर सुशील पनौरे की भूमिका पर भी मिलीभगत का संदेह गहरा गया है। सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी राशि का आहरण बिना बैंक की उचित जांच पड़ताल के कैसे संभव हुआ।

डिप्रेशन में प्रभारी, ठप पड़ा किसानों का काम  

भुगतान न मिलने से परेशान प्रभारी वीरेंद्र टंडन (मो. 8959781153) डिप्रेशन में चले गए हैं। सूतली वाले, चौकीदार और सफाई मजदूर रोज उनसे पैसे के लिए तकादा कर रहे हैं। प्रबंधक संतोष के अक्सर कार्यालय से नदारद रहने के कारण किसानों के केसीसी और खाद वितरण का काम भी पूरी तरह ठप पड़ा है।

मामले का पूरा लेखा-जोखा एक नजर में  

पीड़ित की मांग: उचित कार्यवाही कर 19 लाख रिकवर किए जाएं  

पीड़ित ने कलेक्टर बिलासपुर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि गबन के आरोपी प्रबंधक संतोष, संदिग्ध भूमिका वाले बैंक मैनेजर सुशील पनौरे और लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर उचित जांच कर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही 19 लाख रुपये की राशि रिकवर कराकर मजदूरों का बकाया भुगतान कराया जाए।

नोट: पीड़ित के पास कलेक्टर को दिया गया मूल आवेदन, जनदर्शन की पावती, उप आयुक्त का सील साइन युक्त आदेश पत्र एवं बैंक से राशि आहरण के दस्तावेज सुरक्षित हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल के आदेशों की लगातार अवहेलना की जा रही है। जब विभाग के कर्मचारी की ही सुनवाई नहीं हो रही तो आम जनता का क्या होगा।

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