“सैकड़ों पर मेहरबानी, एक पर बुलडोजर: रतनपुर में वन विभाग की कार्रवाई बनी ‘चुनिंदा न्याय’ की मिसाल, ग्रामीणों ने पूछा – बाकी कब?”
रतनपुर में बुलडोजर का 'सेलेक्टिव धमाका', खुले भेदभाव के पुराने घाव

“सैकड़ों पर मेहरबानी, एक पर बुलडोजर: रतनपुर में वन विभाग की कार्रवाई बनी ‘चुनिंदा न्याय’ की मिसाल, ग्रामीणों ने पूछा – बाकी कब?”

बिलासपुर रतनपुर में बुलडोजर का ‘सेलेक्टिव धमाका’, खुले भेदभाव के पुराने घाव रतनपुर में वन विकास निगम का बुलडोजर चला तो जरूर, पर उसकी गड़गड़ाहट से न्याय कम और सवाल ज्यादा गूंजे। कार्रवाई शुरू होते ही पूरा कस्बा एक ही नारा लगा रहा है: “एक पर हथौड़ा, बाकी पर दरियादिली क्यों?”

मौके का मंजर: शोर, हंगामा और सियापा
बिलासपुर से आई वन विकास निगम की टीम सीधे खंडोबा मंदिर के पास पहुंची। टारगेट पर थी एक छोटी सी दुकान। जैसे ही बुलडोजर ने पहला वार किया, दुकानदार चीख पड़ा। उसकी आवाज सुनकर क्या मजाल कि मोहल्ला खामोश रहता। 10 मिनट में सैकड़ों लोग जुट गए। नारेबाजी, धक्का-मुक्की और आरोपों की बौछार के बीच माहौल ऐसा गरमाया कि टीम को पसीने आ गए।

पब्लिक का पंच: “हमारी बारी कब आएगी?”
गुस्साई भीड़ ने अफसरों को घेर लिया और वही सवाल दाग दिया जो हर जुबान पर था। लोग बोले, “साहब, जब पूरे रतनपुर में वन निगम की जमीन पर 300 से ज्यादा पक्के मकान, दुकानें और बंगले शान से खड़े हैं, तो बुलडोजर का शौक सिर्फ इस एक दुकान पर ही क्यों चढ़ा?” लोगों का साफ आरोप है कि ये अतिक्रमण हटाओ नहीं, ‘चेहरा देखकर हटाओ’ अभियान है।

‘हफ्ता नहीं तो हथौड़ा’ का आरोप
आग में घी डालने का काम किया पीड़ित दुकानदार ने। उसने कैमरे के सामने फूटकर आरोप लगाया कि “मुझसे पहले सेटिंग मांगी गई थी। मैंने मना किया तो बदले में मेरी दुकान पर बुलडोजर चढ़ा दिया गया।” वन निगम के अफसरों ने फिलहाल इस ‘रिश्वत-बम’ पर चुप्पी साध रखी है।

प्रशासन के गले की हड्डी बने 3 सवाल
इंसाफ का मीटर एक क्यों नहीं: अगर कब्जा गैरकानूनी है तो 300+ कब्जों पर एक साथ चोट क्यों नहीं? सिर्फ एक को बलि का बकरा क्यों बनाया?
लिस्ट कहां है साहब: वन निगम के पास अतिक्रमण की पूरी कुंडली है तो उसे चौराहे पर चिपकाकर पारदर्शी कार्रवाई क्यों नहीं करते?
जवाबदेही तय कौन करेगा: इस ‘अपना-दूसरा’ वाली कार्रवाई के पीछे की मंशा की जांच करेगा कौन?
अब आगे क्या: साख का सवाल
इस एक कार्रवाई ने रतनपुर में वन विभाग की साख को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब पब्लिक की डिमांड सिर्फ एक है: या तो पूरा शहर नापो और सब पर बराबर बुलडोजर चलाओ, या फिर इस दिखावटी ड्रामे को बंद करो।
फिलहाल गेंद प्रशासन के पाले में है। पूरा रतनपुर टकटकी लगाए देख रहा है कि वन विकास निगम भेदभाव के दाग धोने के लिए अगला बुलडोजर किसकी दहलीज पर ले जाता है, या फिर ये मामला भी सरकारी फाइलों के कफन में दफन हो जाता है।




