बिलासपुर: कर्रा में ‘काला खेल’ हिन्द एनर्जी कोल वाशरी का विस्तार, 24 जून की ‘गुपचुप जनसुनवाई’ की तैयारी, नोटिस सरकारी वेबसाइट से गायब CECB और प्रशासन मौन, अरपा नदी में जहर, जे.के. कॉलेज में ब्लैक डस्ट, 20×50 HP मोटरों से भूजल की खुली लूट
एक्सक्लूसिव: CECB और जिला प्रशासन की वेबसाइट पर सन्नाटा, 24 जून को गुपचुप जनसुनवाई की तैयारी?अरपा नदी में जहर, जे.के. कॉलेज में ब्लैक डस्ट, 20x50 HP मोटरों से भूजल की डकैती — आधा दर्जन गांव तबाही की कगार पर

बिलासपुर, 19 जून 2026 :- जिला मुख्यालय से महज 10 किमी दूर मस्तूरी तहसील के ग्राम गतौरा में संचालित Hind Energy And Coal Benefication Ltd की क्षमता विस्तार योजना को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय ग्रामीणों, छात्र संगठनों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कंपनी प्रबंधन पर जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल CECB की मिलीभगत से 24 जून 2026 को ‘गुपचुप जनसुनवाई’ कराने का गंभीर आरोप लगाया है।
नियमों को ताक पर रखकर जनसुनवाई?
पर्यावरण नियमों के तहत किसी भी प्रदूषणकारी उद्योग के विस्तार से पहले जनसुनवाई की तारीख से 30 दिन पूर्व CECB और जिला प्रशासन की वेबसाइट पर नोटिस अपलोड करना तथा दो स्थानीय अखबारों में विज्ञापन देना अनिवार्य है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 24 जून की प्रस्तावित जनसुनवाई का कोई नोटिस न तो CECB की वेबसाइट पर है और न ही बिलासपुर जिला प्रशासन के जनसम्पर्क विभाग की ओर से कोई सूचना जारी की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रभावित जनता को आपत्ति दर्ज करने से रोकने के लिए जानबूझकर सूचना छिपाई जा रही है और अंदरखाने कागजी औपचारिकताएं पूरी करने की साजिश रची जा रही है।

पहले से ही नर्क बने 6 गांव, अब विस्तार की मार
वाशरी के मौजूदा संचालन से ही आसपास के गांवों का हाल बेहाल है। गतौरा, फरहदा, खैरा और कर्रा गांवों में चौबीसों घंटे कोयले की बारीक राख उड़ रही है, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में सांस और फेफड़ों की बीमारी आम हो चुकी है। फरहदा और लगरा की कृषि भूमि पर कोयले की काली परत जमने से फसलें बर्बाद हो रही हैं और उपजाऊ जमीन बंजर में तब्दील हो रही है। खैरा में ओवरलोड डंपरों की बेतरतीब आवाजाही से सड़कें पूरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और आए दिन हादसे हो रहे हैं।
जे.के. कॉलेज और गतौरा स्टेशन पर ब्लैक डस्ट का कहर
वाशरी से उड़ने वाले काले गुबार ने पास के प्रसिद्ध जे.के. कॉलेज को भी चपेट में ले लिया है। क्लासरूम, लैब और खेल मैदान में लगातार कोयले की राख जमा हो रही है। छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। पढ़ाई का माहौल पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। वहीं गतौरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म और पटरियों पर काली धूल की मोटी परत जम गई है। ट्रेन का इंतजार करने वाले यात्रियों और वहां तैनात रेलकर्मियों का दम घुट रहा है। छोटे दुकानदार भी धूल के गुबार से परेशान हैं।
अरपा-खारून नदी में जहर, पर्यावरण नियमों की धज्जियां
शिकायत है कि हिन्द एनर्जी प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के नियमों को ताक पर रखकर वाशरी चला रहा है। कोयला धुलाई से निकलने वाले केमिकल युक्त काले अपशिष्ट को बिना ट्रीटमेंट के सीधे अरपा नदी और स्थानीय नालों में बहाया जा रहा है। इसके चलते जीवनदायिनी अरपा और खारून नदी का पानी कई जगह काला और जहरीला हो गया है। जलीय जीवन खत्म हो रहा है और आसपास का भूजल भी दूषित हो चुका है।
भूजल की डकैती: 50 HP की 20 मोटरें 24 घंटे चालू
CGWB के नियमों के मुताबिक व्यावसायिक उपयोग के लिए भूजल निकासी सीमित है और वाटर मीटर अनिवार्य है। इसके उलट कंपनी परिसर में 50 HP की 20 से अधिक मोटरें 24 घंटे चल रही हैं। एक आम किसान 2 से 5 HP की मोटर चलाता है, जबकि यहां लाखों गैलन पानी रोज खींचा जा रहा है। नतीजा यह कि गतौरा, कर्रा, फरहदा, लगरा और खैरा के बोरवेल सूख चुके हैं। वाटर लेवल 350 फीट नीचे चला गया है। ग्रामीण पीने के पानी के लिए टैंकर पर निर्भर हैं और खेती चौपट हो चुकी है।
रोजगार और CSR के वादे हवाहवाई
स्थानीय प्रभावित युवाओं को रोजगार देने के वादे पूरे नहीं किए गए। CSR फंड के तहत अस्पताल, शुद्ध पेयजल, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं पर कोई काम नहीं हुआ। भारी वाहनों की बेतरतीब आवाजाही से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रबंधन बेपरवाह है।
टैक्स चोरी में भी घिर चुकी है कंपनी
हिन्द एनर्जी पर पूर्व में GST विभाग द्वारा टैक्स चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के चलते बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कंपनी न तो सरकारी नियम मानती है और न ही सामाजिक जिम्मेदारी निभाती है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की चेतावनी
क्षेत्रवासियों ने साफ कहा है कि यदि 24 जून को गुपचुप जनसुनवाई कर विस्तार को मंजूरी देने की कोशिश हुई तो उग्र आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा। छात्र संगठनों ने जे.के. कॉलेज को बचाने के लिए ‘ब्लैक डस्ट के खिलाफ व्हाइट मार्च’ निकालने का ऐलान किया है।
प्रशासन से सवाल
जब जनसुनवाई का नोटिस ही सार्वजनिक नहीं है तो सुनवाई पारदर्शी कैसे होगी? क्या अरपा नदी को काली नदी और बिलासपुर को गैस चैंबर बनाने की तैयारी है?
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




