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बिलासपुर के मस्तूरी ब्लॉक में ‘की-बोर्ड से खेती’: बहतरा धान खरीदी केंद्र के ऑपरेटर ने 319 क्विंटल फर्जी धान खरीद दिखाकर लाखों उड़ाए, राजनीतिक दबाव के चलते 12 दिन बाद भी FIR नहीं

मस्तूरी में 'की-बोर्ड घोटाला': ऑपरेटर ने 319 क्विंटल फर्जी धान खरीद दिखाई, लाखों का खेल, 12 दिन बाद भी FIR पर राजनीतिक ब्रेक

बिलासपुर, 21 अप्रैल 2026  :- बिलासपुर जिले के मस्तूरी ब्लॉक स्थित बहतरा धान खरीदी केंद्र में सरकारी सिस्टम को ठेंगा दिखाते हुए ‘डिजिटल फर्जीवाड़ा’ सामने आया है। यहां तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर नरेन्द्र कुमार पटेल ने की-बोर्ड के दो क्लिक से 319 क्विंटल धान ‘पैदा’ कर दिया और लाखों की सरकारी रकम सीधे अपने खाते में ट्रांसफर कर ली। उप आयुक्त सहकारिता ने 9 अप्रैल को बर्खास्तगी, रिकवरी और FIR के कड़े आदेश दिए, लेकिन राजनीतिक दबाव के चलते 12 दिन बीतने के बाद भी न आरोपी पर एफआईआर दर्ज हुई, न पैसा वापस आया।

डिजिटल जादू’: बिना दाना आए 319 क्विंटल धान खरीदा दिखाया  

5 फरवरी 2026 को जब धान खरीदी का शटर गिरा, तब बहतरा केंद्र के रजिस्टर में 40,135 क्विंटल धान दर्ज था। खेल शुरू हुआ एक महीने बाद। 7 मार्च 2026 को ऑपरेटर नरेन्द्र कुमार पटेल ने सिस्टम में घुसकर आंकड़ा 40,454 क्विंटल कर दिया। यानी रातों-रात 319 क्विंटल धान ‘उग’ आया, वो भी बिना एक दाना आए।

जांच में खुलासा हुआ कि इस ‘डिजिटल फसल’ को गांव के दो किसानों हरिराम और लखेश्वर रजक के नाम पर दिखाया गया। कागजों में धान खरीदा गया और सरकारी भुगतान की पूरी रकम ऑपरेटर ने अपने निजी बैंक खाते में ट्रांसफर कर ली।

जांच में फटा ‘भ्रष्टाचार का बम’, कार्रवाई पर राजनीतिक ब्रेक  

व.स.नि. एच.एन. पुरेना और शाखा प्रबंधक दीपक तिवारी की जांच में 2 अप्रैल 2026 को पूरा कांड सामने आ गया। 9 अप्रैल 2026 को उप आयुक्त ने आदेश क्रमांक 505 जारी कर तीन लाइन का अल्टीमेटम दिया:

नौकरी से तुरंत छुट्टी – आरोपी को पद से हटाओ

पाई-पाई वसूली – लूटी गई रकम सेवा सहकारी समिति बहतरा के खाते में जमा कराओ  

FIR दर्ज करो – थाने में केस दर्ज कर रिपोर्ट भेजो

आदेश की कॉपी प्राधिकृत अधिकारी ओखर, मस्तूरी के सहकारिता विस्तार अधिकारी और लोहर्सी शाखा के बैंक मैनेजर तक पहुंचा दी गई। ‘सुनिश्चित करें’ शब्द लिखा गया – यानी टालमटोल की गुंजाइश नहीं।

12 दिन बीते, राजनीतिक दबाव से फाइलें दबी  

21 अप्रैल 2026 तक हालात जस के तस हैं। सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक दबाव के कारण ही न पालन प्रतिवेदन आया, न FIR दर्ज हुई, न सरकारी खजाने में पैसा लौटा। नियम कहता है 3 दिन में रिपोर्ट देनी थी, यहां 12 दिन बाद भी सन्नाटा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि धान खरीदी केंद्रों पर ‘ऊपर तक सेटिंग’ के बिना इतना बड़ा खेल मुमकिन नहीं। आरोपी नरेन्द्र कुमार पटेल को राजनीतिक संरक्षण मिलने के कारण ही पुलिस और प्राधिकृत अधिकारी ओखर कार्रवाई से बच रहे हैं। अगर 319 क्विंटल की फर्जी एंट्री पर 12 दिन में FIR नहीं हो रही, तो आम किसान किसके भरोसे न्याय मांगे?

आगे क्या?  

फिलहाल गेंद प्राधिकृत अधिकारी ओखर और संबंधित थाने के पाले में है। जनता पूछ रही है – राजनीतिक दबाव कब तक ‘डिजिटल डकैत’ को बचाएगा? अगर अगले 48 घंटे में FIR और रिकवरी नहीं हुई तो ये मामला सिर्फ फर्जीवाड़े का नहीं, ‘राजनीतिक संरक्षण में पल रहे भ्रष्टाचार’ का सीधा सबूत बन जाएगा।

(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)

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