सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ‘जल जीवन मिशन’ बना सफेद हाथी: कर्राकोट में पानी के लिए हाहाकार, CM के ‘हर घर जल’ दावे के बीच 1 KM दूर से ढो रही प्यास
सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 'जल जीवन मिशन' का दम घुटा: कर्राकोट के 1200 लोग प्यासे, CM के वादों पर 1 KM दूर से ढो रहे हक का पानी

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ‘जल जीवन मिशन’ बना सफेद हाथी: कर्राकोट में पानी के लिए हाहाकार, CM के ‘हर घर जल’ दावे के बीच 1 KM दूर से ढो रही प्यास

सारंगढ़-बिलाईगढ़: मुख्यमंत्री के ‘हर घर नल-हर घर जल’ के दावे को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत कर्राकोट ने आईना दिखा दिया है। ‘जल जीवन मिशन’ के तहत करोड़ों खर्च होने के बावजूद यहां के 1200 ग्रामीण आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट: 45 डिग्री में ‘मौत का सफर’
कर्राकोट की हकीकत रोंगटे खड़े कर देती है। गांव की महिलाएं और स्कूली बच्चियां तपती दोपहरी में सिर पर 3-3 मटके रखकर रोजाना 1 किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं। गांव में ‘जल जीवन मिशन’ के नए-नए बोर्ड तो लगे हैं, पर नलों से पानी की एक बूंद नहीं टपकती। सालों से सभी हैंडपंप खराब पड़े हैं।
‘विकास’ के नाम पर धोखा: कहां गया करोड़ों का बजट?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है। कागजों में कर्राकोट ‘हर घर जल’ योजना से संतृप्त घोषित हो चुका है, लेकिन जमीन पर हकीकत यह है कि लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीण पूछ रहे हैं – “जब पैसा आया, तो नल क्यों नहीं लगा? ‘जल जीवन मिशन’ का बजट किसकी जेब में गया?”
बिजली कटौती ने तोड़ी कमर
पानी के संकट के बीच रोज 8 से 10 घंटे की अघोषित बिजली कटौती ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है। मोटर नहीं चलती, टंकी नहीं भरती। जिनके पास थोड़ा-बहुत साधन है, वो भी पानी नहीं चढ़ा पा रहे।
प्रशासन का रवैया: शिकायतों का पुलिंदा, कार्रवाई जीरो
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले 6 महीने से वे ब्लॉक कार्यालय से लेकर जिला कलेक्ट्रेट तक के चक्कर काट रहे हैं। हर बार आवेदन लेने के बाद अधिकारियों का रटा-रटाया जवाब मिलता है – “जांच कराकर जल्द कार्रवाई करेंगे।” पर जमीन पर एक ईंट तक नहीं लगी।
फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: 72 घंटे का अल्टीमेटम
झूठे आश्वासनों से तंग आकर दर्जनों ग्रामीण एकजुट होकर जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने दो टूक चेतावनी दी है: “अगर अगले 72 घंटे में गांव में स्थायी पेयजल व्यवस्था शुरू नहीं हुई, तो राष्ट्रीय राजमार्ग 153 पर अनिश्चितकालीन चक्काजाम किया जाएगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।”
शासन से तीन सीधे सवाल, जवाब कौन देगा?
‘जल जीवन मिशन’ का करोड़ों का फंड कर्राकोट में खर्च क्यों नहीं दिख रहा?
जब सरकार ‘सुशासन तिहार’ मना रही है, तो सारंगढ़-बिलाईगढ़ के अफसर आंखें मूंदकर क्यों बैठे हैं?
क्या कर्राकोट के लोगों को अपने हक का पानी लेने के लिए सड़क पर उतरना ही एकमात्र विकल्प बचा है?
अब गेंद प्रशासन के पाले में है। या तो 72 घंटे में कर्राकोट के सूखे हलक तर होंगे, या फिर जनता का आक्रोश सड़कों पर दिखेगा। क्योंकि अब ग्रामीणों ने साफ कह दिया है – “पानी नहीं, तो वोट नहीं और अब चैन भी नहीं।”
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




