
खाकी शर्मसार: बिलाईगढ़ में 25 दबंगों ने घर में घुसकर मचाया खूनी तांडव, मासूमों तक को नहीं बख्शा, SP के आदेश पर भी पुलिस ने साधी चुप्पी पैर की हड्डी चकनाचूर, बच्चे का सिर फटा, महिलाओं को सड़क पर घसीटा… 5 दिन से FIR को तरस रहा पीड़ित परिवार, थाना प्रभारी पर ‘सेटिंग’ के गंभीर आरोप
बिलाईगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़ :- छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाली खबर सामने आई है। बिलाईगढ़ नगर पंचायत के वार्ड-10, रविदास मोहल्ला में 5 मई की दोपहर वह मंजर दिखा जिसे देखकर रूह कांप जाए। ग्राम छपोरा से आए 25 से ज्यादा हथियारबंद गुंडों ने दिनदहाड़े एक घर को ‘कत्लगाह’ बना दिया। न महिलाओं की लाज बची, न मासूमों की चीखें सुनी गईं।
5 मई की दोपहर: जब मौत बनकर टूटे 25 गुंडे
पीड़ित अमित कुमार रत्नाकर के आवेदन में दर्ज है खौफनाक दास्तान। दोपहर करीब 2 बजे टेकाराम निषाला अपने साथ अविनाश, भूपति, शेषनारायण, राहुल हिरवानी, किशन हिरवानी, सूरज निराला, रघु हिरमानी, टीका निराला, गुड्डा हिरवानी, हरीश निराला समेत 25 से ज्यादा लोगों की फौज लेकर घर पर टूट पड़ा।
हाथों में लाठी, डंडे, पत्थर और लोहे के रॉड। घर में घुसते ही गालियों का सैलाब और फिर शुरू हुआ मौत का नंगा नाच।

दरिंदगी की हद: बच्चे का सिर फोड़ा, पैर तोड़कर सड़क पर फेंका

अमित कुमार को कॉलर से पकड़ा, घसीटते हुए सड़क पर लाया गया। लात-घूंसों और रॉड से तब तक पीटा गया जब तक पैर की हड्डी चकनाचूर नहीं हो गई। सीएचसी बिलाईगढ़ की मेडिकल रिपोर्ट में पैर की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई है।

मासूम अंश रत्नाकर के सिर पर लोहे की रॉड मारी गई। बच्चा खून से लथपथ होकर वहीं गिर पड़ा। सिर में 8 टांके लगे हैं।
दूसरे बच्चे की कलाई मरोड़ी गई, अंगुलियां तोड़ दी गईं। उसकी चीखें सुनकर भी हमलावरों का कलेजा नहीं पसीजा।
महिलाओं के बाल पकड़कर घसीटा गया। गंदी-गंदी गालियां और धमकियां दी गईं – “पूरे परिवार को खत्म कर देंगे।”
घर का सामान तहस-नहस। टीवी, बर्तन, चारपाई सब तोड़ डाली।
चीख-पुकार पर दौड़े लोग, 3 गुंडे पकड़े… फिर भी पुलिस ने छोड़ दिया!
मोहल्ले में मची चीख-पुकार सुनकर जब पुरुष सदस्य और पड़ोसी दौड़े तो हमलावर भागने लगे। गुस्साए लोगों ने पीछा कर टीका निराला, सूरज और अविनाश को दबोच लिया। तीनों को पकड़कर थाना बिलाईगढ़ ले जाया गया। लेकिन आरोप है कि राजनीतिक फोन आते ही तीनों को थाने से ही छोड़ दिया गया।
SP तक गुहार, फिर भी FIR नहीं: खाकी पर ‘खादी’ भारी?
हद तो तब हो गई जब 5 मई को थाना बिलाईगढ़ में लिखित शिकायत देने के बाद भी 4 दिन तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। थक-हारकर 8 मई को पीड़ित परिवार SP सारंगढ़-बिलाईगढ़ के दफ्तर पहुंचा और कार्रवाई की मांग को लेकर आवेदन दिया।
लेकिन 10 मई तक हालात जस के तस। SP के संज्ञान में मामला आने के बाद भी बिलाईगढ़ थाना प्रभारी ने FIR दर्ज नहीं की।
‘थाना बना नेताओं का दफ्तर’: काउंटर केस की रची जा रही साजिश
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के बाद से ही क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधि थाने में डेरा डाले हुए हैं। आरोपियों को बचाने के लिए पीड़ित परिवार पर ही उल्टा केस दर्ज कराने की साजिश चल रही है।
सवाल आग की तरह उठ रहे हैं:
PCR वैन कहां थी? हर थाना क्षेत्र में गश्त चलती है। फिर 25 हथियारबंद लोग 2 KM दूर छपोरा से बिलाईगढ़ आए, तांडव मचाया और पुलिस को भनक तक नहीं लगी?
मेडिकल में गंभीर चोटें, फिर FIR क्यों नहीं?
पकड़े गए आरोपियों को किसके कहने पर छोड़ा गया?
दहशत का साया: “घर से निकलने में लगता है डर”
हमले के 5 दिन बाद भी रविदास मोहल्ले में सन्नाटा पसरा है। पीड़ित परिवार के बच्चे सहमे हुए हैं। महिलाएं कहती हैं – “दिन में घर में घुसकर मारते हैं, पुलिस कुछ नहीं करती। रात को सोएंगे कैसे?”
पीड़ित अमित बिस्तर पर पड़ा कराह रहा है – “साहब, हम गरीब हैं इसलिए हमारी सुनवाई नहीं हो रही। क्या हमारे लिए कानून नहीं है?”
जनता की मांग: तत्काल कार्रवाई हो
पूरे बिलाईगढ़ में उबाल है। लोगों की मांग है कि सभी आरोपियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें गिरफ्तार किया जाए। साथ ही थाना प्रभारी बिलाईगढ़ की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
अब गेंद SP के पाले में
5 दिन से न्याय को तरस रहा एक परिवार। 25 दबंग खुलेआम घूम रहे हैं। बिलाईगढ़ की खाकी पर दाग लग चुका है। अब देखना है कि SP का डंडा चलता है या फिर राजनीतिक रसूख के आगे कानून एक बार फिर घुटने टेक देता है।




