बिलासपुर जयरामनगर में धान के नाम पर 19.64 लाख की ‘दिनदहाड़े डकैती’! गबनशुदा प्रबंधक ने 13 बार में लूटा खजाना, ईमानदार प्रभारी के हाथ लगी सिर्फ फटी जेब

बिलासपुर,सहकारिता में ‘सह’ गया, ‘कारिता’ रह गई! बिलासपुर के मस्तूरी ब्लॉक की सेवा सहकारी समिति जयरामनगर में धान खरीदी के नाम पर ऐसा गदर मचा कि सरकार भी हिल जाए। प्रभारी प्रबंधक संतोष आनंद ने 19 लाख 64 हजार रुपए को ऐसा ‘गायब’ किया कि जांच अधिकारी भी लिखने को मजबूर हो गईं कि “यह सीधा आर्थिक अपराध है।”

और सबसे बड़ा तमाशा देखिए। धान खरीदी प्रभारी विरेन्द्र टंडन ने 69490 क्विंटल धान खरीदा और 69490 क्विंटल ही शून्य शॉर्टेज के साथ सरकार को सौंप दिया। एक दाना भी इधर-उधर नहीं। इनाम क्या मिला? सूतली, तारपोलिन, चौकीदारी, मजदूरी सब अपनी जेब से। सरकारी खाते से मिले सिर्फ 1 लाख 63 हजार। बाकी 19.64 लाख? वो तो ‘साहब’ ने 13 किस्तों में ठिकाने लगा दिए।

‘13 तारीखें, 13 वार, और खाली हुआ सरकारी भंडार’
जांच रिपोर्ट में तारीख-दर-तारीख ‘लूट का कैलेंडर’ दर्ज है। सुनिए पूरी फिल्म:
खाता 606007042354 से पहला हमला 15 दिसंबर 2025 को हुआ। 22 माह के लंबित वेतन का ड्रामा रचकर एक ही दिन में 1 लाख 76 हजार और 1 लाख 54 हजार रुपए सीधे जेब में। 22 दिसंबर को डनेज-सूतली का बहाना बनाकर 2 लाख 65 हजार रुपए और साफ। 30 दिसंबर को भवन रिपेयरिंग का बोर्ड लगाकर 2 लाख 70 हजार रुपए उड़ा दिए। 24 फरवरी को तो हद हो गई। बिना किसी कार्यवाही के सीधे 40 हजार रुपए निकाल लिए।

खाता 106003870399 से दूसरा धावा और खतरनाक था। 30 दिसंबर को बिना कार्यवाही 1 लाख 30 हजार रुपए निकले। 03 जनवरी को ‘हमाली’ के नाम पर अज्ञात आदमी को 2 लाख 80 हजार रुपए का तोहफा दे दिया गया और उसी दिन सूतली नगद बोलकर 1 लाख 40 हजार और ले उड़े। 31 जनवरी को धान स्टेक सूतली के नाम पर 1 लाख रुपए, 04 फरवरी को बिना कार्यवाही 1 लाख 40 हजार और उसी दिन फिर अज्ञात को 2 लाख रुपए का भुगतान। 24 फरवरी को 43 हजार और 03 मार्च को आखिरी वार 26 हजार रुपए हमाली-मजदूरी के नाम पर।

कुल हिसाब: 13 बार में 19 लाख 64 हजार रुपए ‘स्वाहा’।
‘पुराना खिलाड़ी’ फिर मैदान में
जांच अधिकारी श्रीमती गोधुली वर्मा ने रिपोर्ट में बम फोड़ दिया। लिखा कि संतोष आनंद “पूर्व में भी गबनशुदा कर्मचारी रहा है और अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहा है।” मतलब यह कोई पहली बार नहीं है। आदतन अपराधी है। फिर भी कुर्सी पर बैठकर सरकारी खाते से पैसा निकाल रहा है। शासन की जांच भी हो गई, FIR की सिफारिश भी हो गई, बर्खास्तगी की मांग भी हो गई। पर कार्रवाई? जीरो।
अब तो जागो सरकार!
उप आयुक्त सहकारिता ने 20 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक 565 ठोक दिया है ! कलेक्टर साहब को भी कॉपी गई है। संयुक्त आयुक्त को भी भेज दी गई है। जांच में साफ लिखा है कि 19.64 लाख या तो खाते में जमा कराओ या FIR करो। साथ में लिखा है कि समिति की इज्जत बचानी है तो संतोष आनंद को तुरंत लात मारकर बाहर करो।
सवाल सीधा है: जब 69490 क्विंटल धान शून्य शॉर्टेज के साथ उठ गया तो प्रभारी को उसका हक क्यों नहीं मिला? और जब ‘आदतन गबनशुदा’ पकड़ा गया तो वह अब तक कुर्सी पर क्यों बैठा है?
किसान का धान, सरकार का पैसा, और बीच में ‘साहब’ का खेल। अब शासन की नींद खुलेगी या फाइलें धूल खाती रहेंगी? जनता हिसाब मांग रही है।
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




