जांजगीर-चांपा के करही गांव में आयुष कश्यप हत्याकांड: 15 दिन बाद भी आरोपी फरार, पुलिस की स्मार्ट पुलिसिंग पर उठे गंभीर सवाल
करही गोलीकांड: 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ के दावों पर उठी उंगली हजारों CCTV और 35 जवानों की टीम भी बेअसर, पीड़ित पिता बोले- रेत माफिया के रसूख के आगे बेबस है कानून

जांजगीर-चांपा। बिर्रा थाना क्षेत्र के करही गांव में 23-24 अप्रैल की रात हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने पूरे छत्तीसगढ़ को हिला दिया था। कांग्रेस नेता सम्मेलाल कश्यप के घर में घुसे नकाबपोश बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं। इस हमले में 19 साल के आयुष कश्यप की मौके पर ही मौत हो गई और उसका छोटा भाई आशुतोष बुरी तरह घायल हो गया।

आज इस खौफनाक वारदात को 15 दिन से ज्यादा हो गए हैं। लेकिन पुलिस की फाइल में प्रगति के नाम पर सिर्फ जीरो लिखा है। न कोई मुख्य आरोपी पकड़ा गया, न हमले की असल वजह साफ हो पाई।

जांच के बड़े-बड़े दावे, नतीजा सिफर
वारदात के तुरंत बाद पुलिस ने माहौल संभालने के लिए बड़े दावे किए थे। एसपी ने कहा कि 35 जवानों की स्पेशल टीम बना दी गई है। साइबर सेल को एक्टिव कर दिया गया। गांव और हाईवे के हजारों CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। 100 से ज्यादा लोगों के मोबाइल की कॉल डिटेल निकाली गई। 100 से ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ हो चुकी है।
लेकिन 15 दिन बाद जब गांव के लोग पुलिस से सवाल करते हैं तो जवाब में सिर्फ चुप्पी मिलती है। जिस तेज जांच का वादा किया गया था, वो जमीन पर कहीं दिख नहीं रही।
IG के हाईटेक दावों की खुली पोल
बिलासपुर रेंज के नए IG रामगोपाल गर्ग ने कुर्सी संभालते ही कहा था कि अब पुलिस ‘स्मार्ट’ हो गई है। ‘त्रिनयन’ और ‘सशक्त’ जैसे ऐप से अपराधी तुरंत पकड़ में आएंगे। QR कोड स्कैन करते ही पीड़ित की शिकायत सीधे बड़े अफसरों तक पहुंचेगी। थानेदारों की मनमानी बंद होगी।
करही गोलीकांड इन तमाम दावों का पहला बड़ा टेस्ट था। और इस टेस्ट में सिस्टम फेल होता दिख रहा है। अगर पुलिस वाकई इतनी हाईटेक है, तो 15 दिन में एक भी आरोपी का चेहरा सामने क्यों नहीं आया? तकनीक सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस और बैनर-पोस्टर तक सीमित है क्या?
बेटे की मौत को लेकर दर-दर भटक रहा पिता
मृतक आयुष के पिता सम्मेलाल कश्यप का आरोप सीधे रेत माफिया पर है। उनका कहना है, “मैंने पुलिस को उन रसूखदारों के नाम दिए हैं जो अवैध रेत खनन कराते हैं। मेरे बेटे की हत्या के पीछे यही विवाद है। लेकिन 15 दिन में पुलिस ने उनसे एक सवाल तक नहीं पूछा।”
सम्मेलाल पिछले दो हफ्ते से न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटा चुके हैं। पहले बिर्रा थाना गए। फिर जांजगीर एसपी ऑफिस। इसके बाद बिलासपुर जाकर IG से मिले। कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप से मिलकर बेटे के लिए इंसाफ मांगा। मामला तूल पकड़ा तो भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े ने भी कलेक्टर-एसपी को फोन किया।
इतना सब होने के बाद भी जांच जहां थी वहीं अटकी है। घर में मातम है। घायल बेटा आशुतोष हर आहट पर डर जाता है। सम्मेलाल कहते हैं, “डर इस बात का है कि कहीं ये केस भी फाइलों में दब न जाए।”
विधायक-सांसद भी बोले: पुलिस चाहे तो क्या नहीं कर सकती
कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने सीधे पुलिस की नीयत पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा, “आज के जमाने में पुलिस के पास इतनी तकनीक है कि वो पाताल से भी मुजरिम को खोज लाए। फिर 15 दिन में करही के आरोपी कैसे बच रहे हैं? कहीं न कहीं जांच को कमजोर किया जा रहा है।”
उधर भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े ने भी सख्त लहजे में कहा है, “इस हत्याकांड में जो भी शामिल है, उसे किसी हाल में बख्शा न जाए। मैंने प्रशासन से साफ कहा है कि जिले में रेत का अवैध खनन बंद हो और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई हो।”
गांव में गुस्सा: क्या गरीब के लिए अलग कानून है?
करही गांव में अब यह चर्चा आम है कि अगर यही हमला किसी बड़े नेता या अफसर के घर हुआ होता तो क्या पुलिस 15 दिन तक खाली हाथ बैठी रहती? क्या तब भी आरोपी यूं ही खुलेआम घूम रहे होते?
गांव वालों का कहना है कि पुलिस सिर्फ कमजोर पर रौब दिखाती है। जब मामला रसूखदारों से जुड़ता है तो जांच धीमी हो जाती है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी बाकी
करही गोलीकांड अब सिर्फ आयुष की हत्या का केस नहीं रहा। यह छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था के लिए एक आईना बन गया है।
सवाल ये है कि जब 35 जवान, हजारों CCTV, साइबर सेल, ‘त्रिनयन’ ऐप सब कुछ मौजूद है, तो इंसाफ मिलने में इतनी देरी क्यों? क्या हाईटेक पुलिसिंग सिर्फ भाषणों तक है? और अगर सिस्टम वाकई स्मार्ट है, तो एक गरीब पिता को न्याय इतना कमजोर और दूर क्यों नजर आ रहा है?
फिलहाल करही का हर शख्स पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। लेकिन 15 दिन की खामोशी ने लोगों का भरोसा तोड़ दिया है।




