Welcome to CHHATTISGARH JANTA KI AWAAZ NEWS   Click to listen highlighted text! Welcome to CHHATTISGARH JANTA KI AWAAZ NEWS
छत्तीसगढ़लोकल न्यूज़

चैत्र नवरात्रि: नववर्ष का शुभारंभ, घटस्थापना से लेकर वैज्ञानिक महत्व तक

चैत्र नवरात्रि: नववर्ष का शुभारंभ, घटस्थापना से लेकर वैज्ञानिक महत्व तक

चैत्र नवरात्रि: नववर्ष का शुभारंभ, घटस्थापना से लेकर वैज्ञानिक महत्व तक :- आज, 19 मार्च, से पावन चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ हो गया है, जो 27 मार्च तक चलेगी। हिंदू नववर्ष के साथ शुरू होने वाली यह नवरात्रि साल की पहली और अत्यंत महत्वपूर्ण नवरात्रि मानी जाती है। वसंत ऋतु में आने के कारण इसे ‘वासंती नवरात्रि’ भी कहा जाता है, जो प्रकृति के नए सृजन और आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।

🙏घटस्थापना: ब्रह्मांडीय ऊर्जा का आह्वान🙏

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। इस वर्ष घटस्थापना के लिए 8 शुभ मुहूर्त रहेंगे। मिट्टी के कलश को पृथ्वी तत्व का प्रतीक माना जाता है, जिसमें जल और वायु तत्व भी समाहित होते हैं। पास रखा दीपक अग्नि तत्व का द्योतक है। इस विधि के माध्यम से कलश में आकाश तत्व यानी ब्रह्मांड की सकारात्मक ऊर्जा का आह्वान किया जाता है। जल को सृष्टि की उत्पत्ति का आधार और सभी देवी-देवताओं का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए कलश में शक्ति का आवाहन कर पूजा-अर्चना की जाती है।

🙏देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना🙏

नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। देवी भागवत के अनुसार, यह सभी रूप स्वयं देवी दुर्गा के ही हैं, जिनकी आराधना इन नौ दिनों में विशेष रूप से होती है। मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्मा जी ने इन नवदुर्गाओं के नाम और उनके महत्व का विस्तार से वर्णन किया है। नवदुर्गा-पूजन की यह परंपरा 8वीं सदी से ही ग्रंथों में दर्ज है, जो आस्था और भक्ति का गहरा संदेश देती है। यदि कोई भक्त चाहे तो नौ दिनों तक केवल देवी दुर्गा के मूल स्वरूप की पूजा भी कर सकता है।

🙏व्रत का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व🙏

नवरात्रि के व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक शुद्धि का भी माध्यम हैं। आयुर्वेद के अनुसार, वसंत ऋतु में बीमारियां बढ़ने की आशंका रहती है, और इन दिनों खानपान में संयम बरतने से पूरे साल स्वस्थ रहा जा सकता है।

आधुनिक विज्ञान भी व्रत के इस महत्व को स्वीकार करता है। व्रत के दौरान शरीर ‘ऑटोफेजी’ नामक प्रक्रिया से गुजरता है, जिसमें पुरानी और कमजोर कोशिकाएं टूटकर ऊर्जा में बदल जाती हैं, जिससे नई और स्वस्थ कोशिकाएं बनी रहती हैं। जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओशुमी को 2016 में इसी प्रक्रिया पर उनके शोध के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजिंग के मार्क मैटसन के शोध बताते हैं कि उपवास शरीर को एक हल्का और अच्छा स्ट्रेस देता है, जिससे कोशिकाएं मजबूत होती हैं, शरीर की क्षमता बढ़ती है और स्वस्थ दीर्घायु की संभावना भी बढ़ती है।

🙏मन, वचन और कर्म का संयम🙏

व्रत का अर्थ केवल भोजन त्यागना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म से भी संयम साधना है। इसे मानसिक, वाचिक और कायिक व्रत कहा जाता है:

मानसिक व्रत: काम, क्रोध, लोभ जैसे नकारात्मक विचारों का त्याग कर मन को शुद्ध रखना। 

• वाचिक व्रत: सत्य बोलना और ऐसे वचन न कहना जिससे किसी को ठेस पहुँचे।

 • कायिक व्रत: शारीरिक हिंसा से बचना और ऐसा कोई कार्य न करना जिससे किसी का अहित हो। 

इस प्रकार, चैत्र नवरात्रि सिर्फ देवी आराधना का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और नवजीवन के आरंभ का भी प्रतीक है, जो हमें आध्यात्मिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है।


पंडित नीरज कुमार तिवारी (संपादक)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!