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बिलासपुर के कोटा तहसील में 87 वर्षीय बुजुर्ग बालकुंवर बसोर से 23 लाख और 6.50 एकड़ जमीन की ठगी, पुलिस पर लीपापोती का आरोप: न्याय न मिलने पर बेसहारा बुजुर्ग ने PM-CM से मांगी ‘सम्मानपूर्वक इच्छामृत्यु’ की अनुमति

बिलासपुर में प्रशासनिक उपेक्षा से हारी 87 वर्षीय बेसहारा बुजुर्ग बालकुंवर बसोर, न्याय न मिलने पर PM-CM को पत्र लिखकर मांगी 'सम्मानपूर्वक इच्छामृत्यु' की अनुमति

बिलासपुर जिला, कोटा तहसील, बेलगहना चौकी क्षेत्र में 87 साल की बुजुर्ग से 23 लाख और 6.50 एकड़ जमीन की ठगी: न्याय न मिलने पर इच्छामृत्यु की मांग, पुलिस पर लीपापोती का आरोप

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ :- कोटा विधानसभा के ग्राम पंचायत बेलगहना की 87 वर्षीय बालकुंवर बसोर ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, बिलासपुर रेंज पहुंचकर इच्छामृत्यु की मांग की है। आरोप है कि दूर के रिश्तेदार फागुन प्रजापति ने पेंशन के बहाने 23 लाख रुपये और पावर ऑफ अटॉर्नी के नाम पर 6.50 एकड़ जमीन हड़प ली। पुलिस पर मामले को दबाने और आरोपी को बचाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

कैसे हुई 23 लाख और 6.50 एकड़ जमीन की ठगी?

बालकुंवर बसोर, पति स्व. गंगाराम बसोर ने आवेदन में बताया कि बेटे की मौत के बाद केंदा निवासी फागुन प्रजापति पिता हरिसिंह घर आता-जाता था। 14 दिसंबर 2021 को उसने कहा कि “पेंशन खाते में नहीं आ रही” और आधार कार्ड लेकर बैंक चलने को कहा। वहां KYC के बहाने भारतीय स्टेट बैंक शाखा बेलगहना में जमा 23 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए।

इसके बाद “धान बेचने और पैसा लाने-ले जाने में तकलीफ होगी” कहकर कोटा ले गया। ग्राम लूफा की दो जमीनें – खसरा नं. 763 रकबा 4.40 एकड़ और खसरा नं. 991 रकबा 1.94 एकड़, कुल 6.50 एकड़ भूमि को पावर ऑफ अटॉर्नी के नाम पर अपने नाम रजिस्ट्री करा ली।

जब खुला धोखे का राज

बुजुर्ग को ठगी का पता तब चला जब पैसों की जरूरत पड़ने पर बैंक गईं। खाता खाली मिला। सहकारी बैंक में धान का पैसा चेक किया तो पता चला कि तीन साल से उनके नाम पर धान ही नहीं बिक रहा। जांच करने पर मालूम हुआ कि जमीन भी उनके नाम पर नहीं है।

पुलिस पर लीपापोती का आरोप: 420 की जगह 155 का फेना

पीड़िता ने सबसे पहले बेलगहना चौकी में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत पर मामला जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) कोटा को दिया गया। 

आरोप है कि अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) कोटा ने “सारे दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई” का आश्वासन दिया। लेकिन सारे सबूत मिलने के बावजूद भारतीय दंड संहिता की धारा 155 का फेना काटकर न्यायालय जाने की सलाह दे दी गई। 

आवेदन में बड़ा खुलासा: छलपूर्वक रजिस्ट्री कराते समय फागुन सिंह ने बैनामे में चेक का उल्लेख किया था, जिसे वह खुद रखे हुए है। वह राशि आजतक प्रार्थी के खाते में नहीं आई। पीड़िता का कहना है कि सिर्फ इस आधार पर भी पुलिस 420 और षड्यंत्रपूर्वक जमीन-पैसा हड़पने की FIR दर्ज कर सकती थी, पर “पुलिस अधिकारी की मंशा आरोपी को बचाने की थी” इसलिए अपराध दर्ज नहीं किया।

“न्याय मिले या मरने की अनुमति दो”

पति और बच्चों की जीवन भर की कमाई पूंजी को वापस पाने के लिए दर-दर ठोकर खा रही 87 वर्षीय वृद्धा अब टूट चुकी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को इच्छामृत्यु का आवेदन दिया है। 

उन्होंने लिखा, “जब मेरा सबकुछ लूट गया है तो जीकर क्या करूंगी। या तो न्याय मिले या चैन से मरने की अनुमति दी जाए।” 18 मार्च 2026 को हरीश राणा को इच्छामृत्यु की अनुमति मिलने का हवाला देते हुए कहा कि बेसहारा लोगों को भी उम्मीद जगी है।

अब पुलिस महानिरीक्षक से आस

पूरे मामले की शिकायत पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय, बिलासपुर रेंज में देने के बाद प्रार्थी बालकुंवर बसोर को अब न्याय का इंतजार है। पीड़िता ने बताया कि आरोपी धमकी देता है कि “मैं सब जगह पैसा फेंकता हूं, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

प्रमुख तथ्य:

राशि: 23 लाख रुपये बैंक से ट्रांसफर, दिनांक 14/12/2021

जमीन: 6.50 एकड़, खसरा नं. 763 रकबा 4.40 एकड़ + खसरा नं. 991 रकबा 1.94 एकड़, ग्राम लूफा

आरोपी: फागुन प्रजापति पिता हरिसिंह, केंदा निवासी, दूर का रिश्तेदार

शिकायत: बेलगहना चौकी, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस (SDOP) कोटा

पुलिस कार्रवाई: भादवि धारा 155 का फेना, धारा 420 के तहत FIR नहीं

संपर्क: बालकुंवर बसोर, ग्राम पंचायत बेलगहना, मो. 8827666748

(Neeraj Kumar Tiwari Editor-in-Chief)

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