अचानकमार में DFO का ‘तानाशाही फरमान’! 10 लाख की सड़क पर ‘तालाबंदी’, राष्ट्रपति के ‘दत्तक पुत्र’ बैगा बूंद-बूंद पानी को बिलखे, कलेक्टर का आदेश ‘कूड़ेदान’ में?
‘राजस्व ग्राम’ अचानकमार में DFO का ‘जंगलराज’! विधायक की सड़क पर ‘वन विभाग का ताला’, लाखों का माल सड़े, बैगा बूंद-बूंद को तरसे

अचानकमार में DFO का ‘तानाशाही फरमान’! 10 लाख की सड़क पर ‘तालाबंदी’, राष्ट्रपति के ‘दत्तक पुत्र’ बैगा बूंद-बूंद पानी को बिलखे, कलेक्टर का आदेश ‘कूड़ेदान’ में?
लोरमी, मुंगेली (छ.ग.) – 12 साल पहले ‘राजस्व ग्राम’ का कलंक धोकर विकास की दौड़ में शामिल हुए अचानकमार को DFO साहब ने ‘रेड कार्ड’ दिखा दिया! 21 अप्रैल को विधायक मद से 10 लाख की सड़क का ‘श्रीगणेश’ हुआ, 22 अप्रैल को वन विभाग ने ‘श्राद्ध’ कर दिया। अब हाल ये है कि पंचायत में सीमेंट की बोरियां ‘आंसू’ बहा रही हैं और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के ‘दत्तक पुत्र’ बैगा आदिवासी बूंद-बूंद पानी के लिए ‘मातम’ मना रहे हैं।
‘माल’ गिरते ही DFO को आया ‘दौरा’! 24 घंटे में पलट दी बाजी
21 अप्रैल: जनपद CEO का ‘शाही फरमान-57’ जारी – “विजय किराना से पंचायत भवन” और “गोदाम से हॉस्पिटल” तक 10 लाख की सड़क ‘चमकाएंगे’। आदेश की कॉपी PMO से लेकर पंचायत सचिव तक दौड़ा दी गई।
22 अप्रैल: ग्राम पंचायत द्वारा -गिट्टी पंचायत में ‘उड़ेल’ दी। मजदूरों ने ‘जय श्री राम’ बोलकर फावड़ा उठाया ही था कि DFO साहब का ‘ब्रह्मास्त्र-294’ गिर गया – “SBWL की चिट्ठी लाओ, वरना जेल जाओ!”
अब जनता पूछ रही है – “साहब, जब ‘ना’ ही करनी थी तो ‘हाँ’ से पहले क्यों नहीं बोले? अब लाखों का माल ‘कौन खाएगा’? बारिश आई तो सीमेंट की ‘खीर’ बनेगी, उसकी ‘जिम्मेदारी’ DFO लेंगे क्या?”

2014 का कलेक्टर आदेश ‘रद्दी’? DFO बने ‘सुपर कलेक्टर’!

‘असली बवाल’ तो ये है कि 13 जनवरी 2014 को कलेक्टर ने आदेश 262 ठोककर अचानकमार को ‘वन ग्राम’ की ‘जंजीर’ से आजाद कर दिया था। 60.300 हेक्टेयर जमीन को ‘राजस्व ग्राम’ का ‘पट्टा’ दे दिया था। मतलब साफ है – यहां अब ‘विकास’ होगा।

लेकिन DFO साहब को शायद ‘पुराना कैलेंडर’ पसंद है! जनपद के आदेश में ‘लाल स्याही’ से लिखा है – “काम सिर्फ सरकारी जमीन पर होगा”, फिर भी ‘टाइगर’ का नाम लेकर गरीबों की सड़क ‘निगल’ गए। लगता है साहब को अचानकमार की ‘मिट्टी’ से नहीं, यहां के ‘वोट’ से दिक्कत है! कलेक्टर का आदेश ‘कूड़ेदान’ में और DFO का ‘ईगो’ आसमान में?

‘दत्तक पुत्र’ की ‘दुर्गति’: बोर है, पानी नहीं, मोटर ‘कोमा’ में!
सड़क का ‘महाभारत’ एक तरफ, दूसरी तरफ बैगा बस्ती में ‘कर्बला’ का सीन है। राष्ट्रपति जिन्हें ‘दत्तक पुत्र’ का ‘दुलार’ देती हैं, वो अचानकमार के बैगा बूंद-बूंद पानी को ‘तरस’ रहे हैं। गांव में बोर है पर ‘नाम का’, मोटर महीने भर से ‘वेंटिलेटर’ पर है। 45 डिग्री गर्मी में औरतें 2 किमी दूर से ‘मटका ढो’ रही हैं।
‘सबसे शर्मनाक’ बात – दर्जनों बार पी ए ची विभाग को ‘आंसू भरे खत’ लिखे, पर जवाब में ‘बाबू’ बोलते हैं – “फाइल प्रोसेस में है”। अरे साहब, ‘प्रोसेस’ में तो बैगा परिवार की ‘जान’ जा रही है! विशेष पिछड़ी जनजाति का ‘बजट’ कहां ‘डकार’ गए?
‘आग’ लगी है अचानकमार में: अब ‘आंदोलन’ ही आखिरी इलाज!
अब अचानकमार का ‘खून खौल’ रहा है। 12 साल से ‘राजस्व ग्राम’ का झुनझुना, विधायक का पैसा ‘आया’, सड़क का सामान ‘गिरा’, काम ‘शुरू’ हुआ… और DFO ने एक ‘कागज’ से सब ‘स्वाहा’ कर दिया। ऊपर से बैगा परिवार ‘प्यासे’ मर रहे हैं।
जनता का ‘अल्टीमेटम’ साफ है – “7 दिन में सड़क शुरू करो और बोर में मोटर लगाओ, वरना DFO ऑफिस का ‘घेराव’ होगा और कलेक्टर के सामने ‘मटका फोड़’ आंदोलन करेंगे!”
अब देखना ये है कि जिला प्रशासन DFO की ‘तानाशाही’ पर ‘लगाम’ कसता है या फिर अचानकमार को ‘भगवान भरोसे’ छोड़ देता है। अगर सीमेंट ‘पत्थर’ बना और बैगा ‘प्यासे’ मरे, तो इसका ‘पाप’ किसके सिर? जवाब तो देना ही पड़ेगा!




