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खेती में क्रांति! धान छोड़ केला उगाया, अब लाखों में खेल रहे हेतराम मनहर तकदीर बदली, आमदनी बढ़ी उद्यानिकी विभाग के सहारे कपसिया कला के किसान ने रचा नया इतिहास

बिलासपुर,अक्सर कहा जाता है कि सही समय पर लिया गया सही फैसला और आधुनिक तकनीक किसी भी क्षेत्र में सफलता की नई कहानी लिख सकती है, और इस बात को बिलासपुर के तखतपुर विकासखंड के ग्राम कपसिया कला के किसान श्री हेतराम मनहर ने सच कर दिखाया है। उन्होंने धान की पारंपरिक खेती को अलविदा कहकर केले की खेती अपनाई और आज वे लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं। उनकी यह सफलता सिर्फ उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

परंपरा से हटकर, मुनाफे की ओर कदम

श्री हेतराम मनहर लंबे समय से धान की खेती करते आ रहे थे, जिसमें मेहनत तो बहुत थी लेकिन मुनाफा उम्मीद के मुताबिक नहीं मिल पा रहा था। तभी उन्होंने उद्यानिकी विभाग से संपर्क किया और राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत केले (जी-9 किस्म) की खेती करने का फैसला किया। यह उनके लिए एक बड़ा और साहसिक कदम था, क्योंकि पारंपरिक खेती छोड़कर कुछ नया अपनाना आसान नहीं होता।

विभाग से मिले मार्गदर्शन ने उनकी राह आसान कर दी। उन्हें न सिर्फ तकनीकी सहायता मिली, बल्कि उन्नत किस्म के पौधे और खेती की वैज्ञानिक विधियों का ज्ञान भी प्राप्त हुआ। उन्होंने लगभग 0.900 हेक्टेयर (करीब 2.22 एकड़) ज़मीन पर केले के पौधे लगाए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मेहनत और तकनीक का सफल संगम

उचित देखभाल और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रयोग करते हुए, श्री मनहर ने अपनी फसल को पोषित किया। परिणाम वाकई चौंकाने वाले थे! उन्हें अपनी मेहनत के दम पर लगभग 510 क्विंटल केले का शानदार उत्पादन मिला। इस पूरी प्रक्रिया में उनकी कुल लागत करीब 1.70 लाख रुपये आई, लेकिन इससे उन्हें 4 से 5 लाख रुपये तक की बंपर आय हुई। यह कमाई पारंपरिक धान की खेती की तुलना में कई गुना ज़्यादा है।

बदली जिंदगी, बेहतर भविष्य

केले की खेती से हुई इस अप्रत्याशित कमाई ने श्री हेतराम मनहर और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया है। अब वे अपने परिवार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और अन्य आवश्यक चीजों पर भी अब वे पहले से ज़्यादा ध्यान दे पाते हैं, जिससे उनके बच्चों का भविष्य भी उज्ज्वल हो रहा है।

श्री मनहर की यह सफलता कपसिया कला और आसपास के गांवों के किसानों के लिए एक मिसाल बन गई है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर किसान पारंपरिक सोच से बाहर निकलकर नई फसलों और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं, तो वे न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी पूरी जीवनशैली को भी बेहतर बना सकते हैं। हेतराम मनहर की यह पहल निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ के कृषि परिदृश्य में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी।

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