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बिलासपुर मल्हार महोत्सव जिसने मल्हार को पहचान दी, उसी का नाम काटा! महाउत्सव के कार्ड से ‘जनक’ डॉ. बांधी गायब, अफसरशाही पर फूटा जनाक्रोश”

प्रशासन की 'भूल' या साजिश? मल्हार के शिल्पकार को आमंत्रण से बाहर कर अफसरों ने जले पर नमक छिड़का, भाजपा में बगावत के सुर

मस्तूरी/मल्हार। नगर पंचायत मल्हार में 28-29 मार्च को होने जा रहे प्रतिष्ठित मल्हार महाउत्सव से पहले ही प्रशासन की एक ‘शाही भूल’ ने पूरे आयोजन को विवादों के घेरे में ला खड़ा किया है। आमंत्रण कार्ड से उस शख्स का नाम गायब है, जिसने मल्हार को नक्शे पर लाने और इस महोत्सव की नींव रखने में अपना राजनीतिक जीवन खपा दियापूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी।

यह चूक नहीं, क्षेत्र की जनता इसे प्रशासनिक अहंकार और राजनीतिक साजिश मान रही है। भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर है। उनका साफ कहना है – “जिस नेता ने मल्हार को नगर पंचायत का दर्जा दिलाया, जिसने महोत्सव की पहली मशाल जलाई, आज उसी को मेहमानों की सूची से मिटा देना, यह भूल नहीं, अपमान है।”

अफसरशाही की मनमानी, जनप्रतिनिधि हाशिए पर!

सूत्रों की मानें तो महोत्सव की पूरी कमान बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के हाथों में है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आयोजन समिति की बैठक तो आपसी खींचतान में फेल हो चुकी थी, जिसके बाद प्रशासन ने खुद ही ‘अतिथि देवो भव’ की लिस्ट बना डाली। नतीजा सामने है — वर्तमान पदस्थ लोगों को सलामी, और क्षेत्र के पुरोधा को वनवास!

विडंबना देखिए, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने तोखन साहू की अनुशंसा पर महोत्सव का बजट 5 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दिया, ताकि आयोजन भव्य हो। लेकिन अफसरों की एक कलम ने पूरे आयोजन की भव्यता पर कालिख पोत दी।

भाजपा में अंदरूनी आग, थप्पड़ कांड के बाद अब ‘नाम कांड’!

यह विवाद यूं ही नहीं भड़का। एक दिन पहले ही मल्हार रेस्ट हाउस में नगर पंचायत अध्यक्ष धनेश्वरी केंवट और उपाध्यक्ष सुशील चौबे के बीच हुई थप्पड़बाजी ने भाजपा की गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया था। अब डॉ. बांधी का नाम काटना, उसी गुटबाजी की अगली कड़ी माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह “पुराने को हटाओ, नए को चढ़ाओ” की सोची-समझी रणनीति है, जिसका खामियाजा पार्टी को भविष्य में भुगतना पड़ सकता है।

सवाल जो शासन-प्रशासन से पूछे जा रहे हैं:

आमंत्रण सूची फाइनल करने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी? क्या बिना क्रॉस चेक किए ही कार्ड छपवा दिए गए?

जब डॉ. बांधी का मल्हार से ऐतिहासिक जुड़ाव रिकॉर्ड में दर्ज है, तो उनका नाम छूटना कैसे संभव हुआ?

क्या यह सिर्फ लापरवाही है या वर्तमान जनप्रतिनिधियों को खुश करने के लिए पूर्व नेता को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?

क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी, या हमेशा की तरह ‘जांच’ के नाम पर फाइल ठंडे बस्ते में डाल दी जाएगी?

जनता का निवेदन, शासन से अपील:

मल्हार की जनता शासन से मांग करती है कि इस ‘भूल’ की निष्पक्ष जांच हो। यदि यह लापरवाही है तो जिम्मेदार अफसर पर कार्रवाई हो, और यदि साजिश है तो उसे बेनकाब किया जाए। महोत्सव संस्कृति का उत्सव है, किसी की व्यक्तिगत ईगो या गुटबाजी का अखाड़ा नहीं।

फिलहाल महोत्सव से पहले ही मल्हार की सियासत गरमा गई है। अब देखना है कि प्रशासन अपनी गलती सुधारता है या इस अपमान को जनता के जख्म के तौर पर छोड़ देता है।

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