EXPOSED:- बहतरा कांड’ में 315 क्विंटल की डील खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, डीआर जयसवाल और CEO गोधूलि वर्मा जैसे वरिष्ठ अफसरों के रहते ‘गिरफ्तारी आदेश’ के बाद भी प्रबंधक उमाशंकर पटेल पर कार्रवाई क्यों नहीं?
315 क्विंटल की डील EXPOSED, गिरफ्तारी आदेश के बाद भी ‘बहतरा’ प्रबंधक पर कार्रवाई शून्य: अमृत कुजूर, जयसवाल, गोधूलि वर्मा की ‘जीरो टॉलरेंस’ पर उठे सवाल

बिलासपुर | Chhattisgarh Janta Ki Awaaz News :- ‘बहतरा’ धान उपार्जन केंद्र में 315 क्विंटल धान की कैमरे पर हुई ‘डील’ को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जिस दिनांक व समय पर यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हुई, उसके बाद गिरफ्तारी का आदेश जारी होने के बावजूद आज तक मुख्य आरोपी संस्था प्रबंधक उमाशंकर पटेल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कंप्यूटर ऑपरेटर नरेंद्र पटेल का नाम कार्रवाई के लिए सामने आया था, उस पर भी आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले के 5 नए तथ्य
1. दिनांक-समय सहित सबूत, फिर भी कार्रवाई ‘शून्य’:
जिस दिनांक और समय पर ‘बहतरा’ केंद्र में 315 क्विंटल धान की अवैध डील कैमरे में कैद हुई, उसके पुख्ता वीडियो सबूत मौजूद हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का आदेश भी जारी हुआ। बावजूद इसके आज तक न प्रबंधक उमाशंकर पटेल पर कार्रवाई हुई, न ही कंप्यूटर ऑपरेटर नरेंद्र पटेल पर।
2. ‘दिखावे की कार्रवाई’ भी नहीं हुई:
ताजा जानकारी के मुताबिक आज दिनांक तक नरेंद्र पटेल के ऊपर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यानी पूरा मामला सिर्फ कागजों में घूम रहा है।
3. ‘संयुक्त जवाबदेही’ के बावजूद सब बचे:
नियमानुसार केंद्र पर गड़बड़ी में प्रबंधक, फड़ प्रभारी, प्राधिकृत अधिकारी और ऑपरेटर सभी जिम्मेदार होते हैं। लेकिन यहां बैंक मैनेजर दीपक तिवारी, फड़ प्रभारी और प्राधिकृत अधिकारी पर भी अब तक कोई नोटिस तक नहीं।
4. तीन वरिष्ठ अफसरों की साख पर सवाल:
बिलासपुर में खाद्य व सहकारिता की कमान तीन कड़क छवि वाले अफसरों के पास है:
खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर:
अवैध भंडारण पर जिले में सबसे ज्यादा छापामार कार्रवाई के लिए चर्चित। पीडीएस घोटालों में इन्होंने कई गोदाम सील कराए हैं।
वरिष्ठ अधिकारी डीआर जयसवाल:
धान खरीदी में औचक निरीक्षण कर मौके पर FIR कराने का इनका रिकॉर्ड है। किसान हित में रात में भी केंद्रों का दौरा करते रहे हैं।
CEO गोधूलि वर्मा, जिला सहकारी बैंक:
डिजिटल पेमेंट और रियल टाइम मॉनिटरिंग से समितियों में पारदर्शिता लाने का श्रेय इन्हें जाता है।
इनकी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के बावजूद ‘बहतरा कांड’ में दिनांक-समय सहित सबूत होने पर भी आज तक एक भी गिरफ्तारी न होना गंभीर सवाल है।
5. जनता के 3 बड़े सवाल:
1. जिस दिनांक-समय पर घटना रिकॉर्ड हुई, उस वीडियो के आधार पर गिरफ्तारी आदेश के बाद भी उमाशंकर पटेल कुर्सी पर कैसे?
2. जब कंप्यूटर ऑपरेटर नरेंद्र पटेल पर भी आज तक कार्रवाई नहीं हुई तो आदेश का मतलब क्या?
3. फाइल किस टेबल पर और क्यों अटकी है? नियम क्या कहते हैं
सहकारी समिति अधिनियम के तहत वीडियो सबूत और गिरफ्तारी आदेश के बाद तत्काल निलंबन व कार्रवाई अनिवार्य है।




