बिलासपुर जिले के मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जोधरा में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा विकास: सरपंच की देखरेख में घटिया निर्माण से ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, 3 लाख की राशि पर सवाल
मस्तूरी के जोधरा में विकास बना दिखावा: 3 लाख की लागत, काम घटिया, सरपंच पर उठे सवाल

(नीरज कुमार तिवारी संपादक) बिलासपुर/मस्तूरी, 23 अप्रैल 2026: विकास के नाम पर सरकारी खजाना लूटने का एक और मामला बिलासपुर जिले की मस्तूरी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत जोधरा से सामने आया है। यहां ‘विधायक निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना’ के तहत स्वीकृत छत निर्माण कार्य में सरपंच समारू राम केवट पर भारी भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगे हैं। 3 लाख रुपये की लागत से बन रहा यह ढांचा अब ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी बन गया है!

जमीनी हकीकत: कागज पर विकास, मौके पर भ्रष्टाचार
ग्राम के कुम्हारीपारा में बन रहे इस निर्माण कार्य की हालत देखकर हर कोई हैरान है। सूचना पटल पर भले ही बड़े-बड़े दावे लिखे हों, लेकिन मौके पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। सूचना पटल के अनुसार यह कार्य विधायक निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के तहत स्वीकृत है जिसका नाम छत निर्माण कार्य कुम्हारीपारा है। इसके लिए तीन लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी। काम शुरू करने की तारीख 13 अक्टूबर 2025 दर्ज है और इसे 24 फरवरी 2026 तक पूरा हो जाना था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अप्रैल 2026 बीतने के बाद भी छत अधूरी और टेढ़ी मेढ़ी बनी है और दीवारें बेहद कमजोर हैं। मौके पर काम कहीं से भी तीन लाख रुपये का नहीं दिख रहा है। काम शुरू तो हुआ था पर निर्माण में कोई मानक अपनाया ही नहीं गया। ग्रामीणों को अब शक हो रहा है कि क्या वाकई यह विधायक की योजना है या इसके नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है।

क्या-क्या गड़बड़ियां मिलीं मौके पर
जानलेवा ढांचा: छत का निर्माण किसी भी तकनीकी मानक पर खरा नहीं उतर रहा। सरिया और सीमेंट की गुणवत्ता बेहद घटिया है। दीवारों का प्लास्टर हाथ लगाते ही झड़ रहा है। ग्रामीणों का डर है कि हल्की बारिश या आंधी में यह ढांचा कभी भी गिर सकता है और बड़ा हादसा हो सकता है।
समय सीमा की धज्जियां: सूचना पटल साफ बता रहा है कि काम 24 फरवरी 2026 को पूरा हो जाना था। आज 23 अप्रैल 2026 है, यानी तय समय से 2 महीने बाद भी काम अधूरा है। इससे साफ है कि जिम्मेदारों को न नियम की परवाह है, न जनता की।
3 लाख रुपये कहां गए?: सबसे बड़ा सवाल यही है। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि सरपंच समारू राम केवट ने तकनीकी बारीकियों और सामग्री की गुणवत्ता को पूरी तरह नजरअंदाज किया। 3 लाख जैसी बड़ी राशि मिलने के बाद भी अगर छत ढंग से नहीं बन पाई, तो पैसा गया कहां?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय निवासी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं, “सरपंच जी ने अपने लोगों को ठेका दे दिया। न कोई इंजीनियर आया, न कोई जांच हुई। रेत में सीमेंट नाममात्र का है। ये तो सीधा-सीधा सरकारी पैसे का बंदरबांट है।”
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ एक छत का मामला नहीं है। जब 3 लाख में एक छोटी सी छत तक मानक स्तर की नहीं बन पा रही, तो गांव के बाकी विकास कार्यों का क्या हाल होगा? यह जनता के पैसे और भरोसे दोनों के साथ धोखा है।
अब आगे क्या: प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और स्थानीय मीडिया ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
प्रमुख मांगें:
तकनीकी जांच: PWD या RES विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों से पूरे निर्माण की गुणवत्ता जांच कराई जाए और सैंपल लेकर लैब टेस्ट हो।
रिकवरी और FIR: जांच में गड़बड़ी साबित होने पर सरपंच समारू राम केवट से पूरी राशि की वसूली की जाए और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज हो।
पंचायत के अन्य कार्यों की जांच: जोधरा पंचायत में पिछले 2 साल में हुए सभी निर्माण कार्यों का सोशल ऑडिट कराया जाए।
फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस घटिया निर्माण को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीण अब कलेक्टर बिलासपुर और मस्तूरी जनपद CEO से उम्मीद लगाए बैठे हैं कि दोषियों पर कार्रवाई होगी और उनके गांव को भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी।




