“खाकी का ‘काला चिट्ठा’ खुला! जांजगीर की राहौद चौकी बनी ‘वसूली की मंडी’ — FIR रोकने के 15 हजार, चालान के 50 हजार + 70 बोतल शराब; पत्रकार के स्टिंग ने खींची वर्दी से इज्जत, SP दफ्तर में ‘शिकायती धमाके’ से मचा भूचाल”
"गरीब महिला को अपमानित कर चौकी से निकाला, पत्रकार से बोले — 'नोट लाओ, तुरंत काम पाओ'" | 48 घंटे में दो 'न्याय की हुंकार', वीडियो सबूत ने कर दिया सिस्टम बेनकाब | जनता का ऐलान: 'पत्रकार ही आखिरी सहारा है'"

जांजगीर-चांपा: वर्दी की ‘काली कमाई’ का पर्दाफाश, पत्रकार की कलम बनी इंसाफ की मशाल
जांजगीर-चांपा। वर्दी… जिसे देखकर डर नहीं, भरोसा जागना चाहिए। मगर शिवरीनारायण की राहौद चौकी ने इस भरोसे को ‘रिश्वत की पर्ची’ में तब्दील कर दिया। यहां कानून की किताब नहीं, ‘वसूली का बहीखाता’ चलता था। 48 घंटे के भीतर दो ‘शिकायती धमाकों’ ने ऐसा कोहराम मचाया कि पूरा पुलिस महकमा सकते में आ गया और खाकी का ‘काला चिट्ठा’ सोशल मीडिया की सुर्खी बन गया।


पहला खुलासा: गरीब की अस्मिता पर वर्दी का वार
20 अप्रैल को लक्ष्मीन कुमारी देवांगन की शिकायत ने पहला ‘न्याय का बिगुल’ फूंका। निशाने पर सीधे चौकी प्रभारी उप-निरीक्षक रामप्रसाद बघेल।
सौदे की शुरुआत: पति राजू देवांगन को छोड़ने की ‘कीमत’ 15,000 रुपये तय की गई।

बेरहम अंजाम: रकम न दे पाने पर जानू पटेल से साठगांठ कर झूठी FIR में पति को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।
दूसरा वार: 19 अप्रैल को चालान के लिए गई लक्ष्मीन से फिर 10,000 रुपये की मांग रख दी गई।
“साहब हम गरीब हैं” सुनते ही वर्दी का अहंकार भड़क उठा। शिकायत के अनुसार प्रभारी ने बेहद अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर महिला को चौकी से बाहर कर दिया और खुली ललकार दी — “IG के पास जा या SP के पास, मुझे फर्क नहीं पड़ता। तीन महीने तक जो करना है कर ले। हम तेरे बाप के नौकर नहीं हैं।”
यह सिर्फ एक महिला का अपमान नहीं था, यह गरीब के स्वाभिमान पर वर्दी का सीधा प्रहार था।
दूसरा खुलासा: पत्रकार का ‘ऑपरेशन स्टिंग’, बेनकाब हुई ‘रेट लिस्ट’
22 अप्रैल को पत्रकार अमित कुमार खुंटे ने दूसरी ‘सच्चाई की दहाड़’ लगाई — इस बार सबूतों की ‘तोप’ के साथ। SP को सौंपे शिकायती दस्तावेज में अमित ने पूरी ‘वसूली फेहरिस्त’ उजागर कर दी।
चालान का ‘शुल्क’: साले सुप्रिम कुमार यादव के केस में चालान पेश करने के लिए 50,000 रुपये नकद की सीधी मांग।
हस्ताक्षर का ‘सरचार्ज’: 17 जगह दस्तखत के एवज में 70 नग अंग्रेजी शराब की अलग फरमाइश।
TI की ‘साझेदारी’: आरोप है कि 02 मार्च को शिवरीनारायण TI राजीव श्रीवास्तव की मौजूदगी में ‘अर्नेश कुमार गाइडलाइन’ के नाम पर पूरा लेन-देन तय हुआ था।
सबसे बड़ा प्रहार: अमित खुंटे ने दो-टूक कहा — “मेरे पास इस पूरी सौदेबाजी की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।” यह वीडियो अब इंटरनेट पर ‘वायरल तूफान’ बनकर खाकी की साख को झकझोर रहा है।
एक चेहरा, दो शिकार: गरीब से 25 हजार का ‘जुर्माना’, रसूखदार से 50 हजार का ‘पैकेज’
दोनों शिकायतों का केंद्र एक ही अधिकारी — रामप्रसाद बघेल। कार्यशैली एक — ‘डराओ और वसूलो’।
गरीब के लिए फरमान: 25 हजार न दो तो घर उजाड़ देंगे, अपमानित कर भगा देंगे।
पहुंच वालों के लिए ऑफर: 50 हजार + 70 बोतल लाओ तो ‘तत्काल सेवा’ — “पैसे लेकर आओ, काम अभी निपट जाएगा।”
‘दागदार इतिहास’: पहले भी सामने आ चुका है ‘वसूली वीडियो’
यह पहली ‘करामात’ नहीं है। शिकायतों में दर्ज है कि कोतवाली जांजगीर में तैनाती के दौरान भी बघेल का रिश्वत लेते वीडियो सामने आ चुका है। सवाल बड़ा है — बार-बार दाग लगने पर भी कार्रवाई का इंतजार क्यों?
जब खाकी खामोश करे, तो कलम हुंकार भरती है
यह खबर सिर्फ भ्रष्टाचार की नहीं, भरोसे की लड़ाई है। लक्ष्मीन की सिसकी चौकी की चारदीवारी में दम तोड़ देती, अगर पत्रकार अमित खुंटे ने कैमरा उठाकर सच को कैद न किया होता।
यही अंतर है खामोशी और खबर में। वर्दी का रौब आम आदमी को चुप करा सकता है, पर एक निडर पत्रकार की कलम को नहीं। धमकियों और दबाव के बीच भी अमित खुंटे ने SP की मेज पर सबूतों का ‘सच का पहाड़’ रख दिया।
अब SP की चौखट पर इंसाफ की दस्तक: तीन मांग, एक मिसाल
पूरे जांजगीर की सांसें अब SP कार्यालय पर टिकी हैं। पीड़ितों की मांग एकदम साफ:
तत्काल निलंबन: TI राजीव श्रीवास्तव और चौकी प्रभारी रामप्रसाद बघेल को तुरंत पद से हटाया जाए।
FIR + फॉरेंसिक जांच: वायरल वीडियो की वैज्ञानिक जांच कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज हो।
नजीर बने कार्रवाई: ऐसी सजा हो कि कल कोई वर्दीवाला गरीब को आंख दिखाने से पहले सौ बार सोचे।
अंतिम सच: वर्दी पर छींटे पड़ सकते हैं, पत्रकारिता पर नहीं
जब रक्षक ही ‘वसूली एजेंट’ बन जाएं तो जनता किसके पास जाए? इस मामले ने जवाब दे दिया — निडर पत्रकार के पास।
वीडियो सबूत मौजूद है, दो लिखित गवाही दर्ज है, जनता की नजरें गवाह हैं। अब अगर चूक हुई तो भरोसा सिस्टम से उठेगा, पत्रकार से नहीं। क्योंकि हर गली-मोहल्ला जानता है — जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तो एक पत्रकार ही नया रास्ता खोलता है।
SP दफ्तर में फाइल खुल चुकी है। जांजगीर पूछ रहा है — वर्दी के दाग धुलेंगे या नहीं?
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




