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ग्राम देवकिरारी की बेटी ने रचा इतिहास: श्रेया तिवारी ने 5 वीं में 95% अंक लाकर किया बिल्हा का नाम रोशन

देवकिरारी से निकलकर बिल्हा तक पहुंची सफलता की गूंज, शिक्षकों-परिजनों ने कहा - "पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा है श्रेया"

बिल्हा, ग्राम देवकिरारी, 5 मई 2026 ग्राम देवकिरारी की होनहार बेटी और बिल्हा स्थित एकता विद्या मंदिर स्कूल की कक्षा 5वीं की छात्रा कुमारी श्रेया तिवारी ने 95% अंक हासिल कर न सिर्फ स्कूल बल्कि पूरे बिल्हा क्षेत्र और अपने गांव देवकिरारी का सिर गर्व से ऊँचा कर दिया है। श्रेया की इस शानदार उपलब्धि से स्कूल परिसर और देवकिरारी गांव में जश्न का माहौल है।

मेहनत, अनुशासन और लगन का दूसरा नाम – श्रेया  

स्कूल की प्रधानाचार्या ने बताया, “देवकिरारी से रोज स्कूल आने वाली श्रेया शुरू से ही सबसे मेहनती छात्रा रही है। दूरी कभी उसकी पढ़ाई के आड़े नहीं आई। आज उसने साबित कर दिया कि गांव छोटा हो तो क्या, हौसले बुलंद हों तो हर मंजिल आसान है।”

सफलता का श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को  

श्रेया ने कहा, “मेरे गांव देवकिरारी के संस्कार, पापा-मम्मी का साथ और बिल्हा के मेरे टीचर्स का मार्गदर्शन ही मेरी ताकत है। रोज 2 घंटे बिना नागा पढ़ाई और अनुशासन ही मेरी सफलता का मंत्र है। मैं डॉक्टर बनकर देवकिरारी और बिल्हा के लोगों की सेवा करना चाहती हूं।”

परिजनों और दोनों जगह का बढ़ा मान  

श्रेया के पिता सूरज तिवारी एवं दादा दादी बड़े पापा बड़े मम्मी ने भावुक होकर कहा, “देवकिरारी की बेटियां बोझ नहीं, बिल्हा का गौरव हैं। श्रेया ने आज यह साबित कर दिया। हम चाहते हैं वो खूब पढ़े और अपने सपनों को पूरा करे।” स्कूल प्रबंधन ने श्रेया को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया और घोषणा की कि हर साल 5वीं में टॉप करने वाले छात्र को ‘श्रेया तिवारी प्रोत्साहन पुरस्कार’ दिया जाएगा।

अन्य छात्रों के लिए बनी मिसाल  

देवकिरारी के ग्रामवासियों ने कहा, “सूरज तिवारी जी की बेटी ने बिल्हा में परचम लहराया है। पंचायत की ओर से श्रेया को सम्मानित किया जाएगा ताकि देवकिरारी की हर बेटी पढ़े और आगे बढ़े।”

मुख्य बातें जो हर छात्र सीख सकता है श्रेया से: 

नियमितता: गांव से रोज स्कूल आकर भी रोजाना 2-3 घंटे पढ़ाई। छुट्टी के दिन भी रिवीजन नहीं छोड़ा।

सवाल पूछने की आदत: जो समझ न आए, तुरंत टीचर से पूछना। “शर्माने से बेहतर है पूछ लेना” – यही श्रेया का फॉर्मूला है।

संतुलन: पढ़ाई के साथ खेल और 8 घंटे की नींद। श्रेया कहती है, “थके हुए दिमाग से पढ़ाई नहीं होती।”

लक्ष्य तय करना: डॉक्टर बनने का बड़ा सपना देखना और उस पर रोज थोड़ा-थोड़ा काम करना।

टाइम टेबल का पालन: सुबह 5 बजे उठना, स्कूल से आकर 1 घंटा आराम, फिर पढ़ाई। रात 9 बजे तक सो जाना।

नोट्स बनाने की आदत: हर चैप्टर के अपने शब्दों में छोटे नोट्स बनाना, जिससे एग्जाम टाइम में रिवीजन आसान हो।

मोबाइल से दूरी: पढ़ाई के समय फोन और टीवी से पूरी तरह दूर रहना। “फोकस ही टॉपर बनाता है” – श्रेया

माता-पिता का सम्मान: रोज मम्मी-पापा के पैर छूकर आशीर्वाद लेना और उन्हें अपनी पढ़ाई के बारे में बताना।

हार न मानना: कोई टॉपिक मुश्किल लगे तो उसे 3 बार पढ़ना। श्रेया कहती है, “तीसरी बार में सब आसान लगने लगता है।”

कॉपी साफ-सुथरी रखना: हैंडराइटिंग अच्छी रखना और हेडिंग-अंडरलाइन करना, ताकि कॉपी चेक करने वाले को भी मजा आए।

श्रेया, तुम्हारी ये उड़ान देवकिरारी से शुरू होकर बिल्हा होते हुए पूरे देश तक जाएगी। दोनों जगह तुम्हारे साथ हैं। ऐसे ही पढ़ो, बढ़ो और देश का नाम रोशन करो। 

सूरज तिवारी की बेटी, देवकिरारी की शान, बिल्हा का गौरव – शाबाश श्रेया!

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