बिलासपुर के मस्तूरी में 29 अप्रैल की ‘भूतिया जनसुनवाई’: बिना प्रचार-प्रसार कुकुर्दीकला रेत घाट का सौदा, जनता सोती रही, रेत माफिया-प्रशासन गठजोड़ पर ग्रामीणों में उबाल
बिलासपुर में रेत माफिया-प्रशासन गठजोड़ उजागर: मस्तूरी के कुकुर्दीकला में 29 अप्रैल को गुपचुप जनसुनवाई, बिना प्रचार-प्रसार रेत घाट आबंटन की तैयारी, ग्रामीणों में उबाल

“29 अप्रैल की ‘भूतिया जनसुनवाई’: जनता सोती रही, रेत माफिया ने कुकुर्दीकला का सौदा कर लिया?”

बिलासपुर/मस्तूरी। मस्तूरी विधानसभा कुकुर्दीकला गांव में आज 29 अप्रैल को नए रेत घाट के लिए ‘जनसुनवाई’ का ड्रामा रचा गया, लेकिन गांव वालों को इसकी भनक तक नहीं लगी। नियम कहते हैं कि रेत घाट से पहले 30 दिन तक ढोल पीटकर, अखबार में छपवाकर जनता को बताना जरूरी है। यहां उल्टा हुआ – अफसरों ने मुंह पर उंगली रख ली और कागज पर ‘जनसुनवाई पूरी’ का ठप्पा लगाने की तैयारी कर ली।
जिला खनिज अधिकारी किशोर गोलघाटे से मीडिया ने सच पूछना चाहा तो साहब का फोन ‘नॉट रीचेबल’ हो गया। गांव वाले पूछ रहे हैं – “साहब, तनख्वाह सरकार से लेते हो या रेत ठेकेदार से? जिसका फोन उठाते हो, उसी के हो क्या?”
अमलडीहा से सबक नहीं लिया, अब कुकुर्दीकला की बारी
कुकुर्दीकला के बगल में अमलडीहा रेत घाट ने पहले ही PMGSY की सड़क का कचूमर निकाल दिया। 12-14 टन की सड़क पर 90 टन के हाइवा ऐसे दौड़ते हैं जैसे गांव वालों की जान फ्री की हो। सड़क नहीं, गड्ढों का मेला है। एम्बुलेंस वाला भी पूछे – “मरीज ले जाऊं या पहले JCB बुलाऊं?”
स्कूल के बच्चे, बीमार बुजुर्ग धूल फांक रहे हैं। रेत के ट्रकों पर तिरपाल नहीं, मानो पूरे गांव को टीबी बांटने का ठेका ले लिया हो।
नदी का पेट फाड़ दिया, अब गांव प्यासा मरेगा
नियम 3 मीटर से ज्यादा गहराई मना करता है, यहां JCB-पोकलेन ने नदी की आंतें तक निकाल दीं। नतीजा – हैंडपंप हवा मार रहे हैं, खेत का पानी सूख गया। 2 साल बाद रेत खत्म, ठेकेदार मालामाल, और गांव ‘रेगिस्तान’।
“कलम के गुंडे: पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली करने वाला गिरोह सक्रिय”
रेत के नाम पर कुछ लोग माइक नहीं, ‘हफ्ता वसूली की पर्ची’ लेकर घूम रहे हैं। असली पत्रकार की कलम बदनाम, नकली वाले की जेब गरम। इसे कहते हैं ‘चौथा स्तंभ’ की जगह ‘चौथ वसूली’।
ग्रामीणों का अल्टीमेटम – अब आर-पार की लड़ाई 29 अप्रैल की ‘चोर दरवाजे वाली जनसुनवाई’ तुरंत रद्द करो।
जिला खनिज अधिकारी गोलघाटे की 6 महीने की कॉल डिटेल सार्वजनिक करो।
पहले अमलडीहा की टूटी सड़क ठेकेदार से बनवाओ, फिर नए घाट की सोचना।
CM साहब, ‘सुशासन तिहार’ का बोर्ड मस्तूरी में भी लगवा दो।
सीधी बात: गांव वालों कान खोलकर सुन लो
रेत 2 साल में खत्म हो जाएगी। ठेकेदार नया फॉर्च्यूनर ले आएगा, अफसर का ट्रांसफर हो जाएगा। पीछे बचोगे तुम, तुम्हारी टूटी सड़क, सूखा कुआं और खांसते बच्चे। आज नहीं बोले तो कल कुकुर्दीकला का नाम नक्शे से मिट जाएगा।
अब फैसला सरकार का है – जनता के साथ हो या रेत माफिया की जेब में?




