मरवाही गोबर खरीदी घोटाला: 14.77 लाख के फर्जीवाड़े में रेंजर सस्पेंड, तत्कालीन DFO पर कार्रवाई न होने से सवाल
जाली हस्ताक्षर, फर्जी वाउचर और धमकी देकर वसूली - विधानसभा में गूंजा मामला, FIR की मांग तेज

मरवाही/बिलासपुर, 29 मई 2026 :- मरवाही वनमंडल में 2022 में हुए पौधारोपण के नाम पर गोबर खाद खरीदी में सामने आए 14.77 लाख रुपये के घोटाले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय, नवा रायपुर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर मरवाही के तत्कालीन वन परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) रमेश कुमार खैरवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में खैरवार को बिलासपुर स्थित मुख्य वन संरक्षक (CCF) कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
यह घोटाला वर्ष 2022 में मरवाही वनमंडल में मिश्रित प्रजाति पौधारोपण कार्य के लिए गोबर खाद की खरीदी से जुड़ा है। आरोप है कि फर्जी बिल, जाली हस्ताक्षर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए 14,77,600 रुपये का भुगतान किया गया।
जांच में हुए बड़े खुलासे:
फर्जी दस्तावेज और जाली हस्ताक्षर: बिलासपुर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक मनोज कुमार पांडेय की जांच में खुलासा हुआ कि अक्टूबर 2024 में गोबर खाद खरीदी दिखाने के लिए फर्जी सप्लायरों की सूची तैयार की गई। आरोप है कि तत्कालीन SDO के जाली हस्ताक्षर कर फाइलों का सत्यापन कराया गया।
धमकी देकर कराए खाली वाउचर पर साइन: जांच के दौरान खुरपा (छुआबहरा बीट) के वन प्रबंधन समिति सचिव एवं फॉरेस्टर श्रीकांत परिहार ने बयान दिया कि उन्हें निलंबन की धमकी देकर DFO कार्यालय बुलाया गया। वहां उनसे खाली वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए गए। बाद में इन्हीं दस्तावेजों पर SDO के जाली हस्ताक्षर कर भुगतान प्रक्रिया पूरी की गई।
21 अक्टूबर 2024 को हुआ भुगतान: HDFC बैंक के माध्यम से कथित सप्लायरों के खातों में 14.77 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
भुगतान के बाद वापस मंगाई गई रकम: जांच में सामने आया कि भुगतान होते ही रेंजर रमेश खैरवार ने फॉरेस्टर को उन खातों से नकदी निकालकर लाने के निर्देश दिए। फॉरेस्टर के अनुसार, यह पूरी रकम रेंजर को सौंप दी गई। आरोप है कि रेंजर ने यह कहकर पैसा मंगाया था कि “पैसा DFO को ऊपर तक पहुंचाना है”।
ऑडियो वायरल: इस पूरे लेन-देन से जुड़ा एक कथित ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे मामले ने और तूल पकड़ा।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई:
इस मामले में कैंपा फंड शाखा के प्रभारी सहायक ग्रेड-दो भूपेंद्र कुमार साहू को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। अब रेंजर रमेश खैरवार दूसरे अधिकारी हैं जिन पर गाज गिरी है।
तत्कालीन DFO पर क्यों नहीं हुई कार्रवाई?
पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल तत्कालीन DFO रौनक गोयल की भूमिका पर उठ रहे हैं। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट है कि जाली हस्ताक्षर वाले दस्तावेजों के आधार पर ही तत्कालीन DFO ने भुगतान की स्वीकृति दी थी। बावजूद इसके, अभी तक उनके खिलाफ कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है। इसे लेकर स्थानीय स्तर पर भारी नाराजगी है।
विधानसभा तक पहुंचा मामला:
यह घोटाला इतना गंभीर था कि छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी इसकी गूंज सुनाई दी थी। विपक्ष ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था।
अब FIR की मांग तेज:
स्थानीय लोगों और वन कर्मियों की मांग है कि तत्कालीन DFO रौनक गोयल, निलंबित रेंजर रमेश खैरवार और कैंपा प्रभारी भूपेंद्र साहू के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी का आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक राजपत्रित अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी तरीके से इस्तेमाल करने का गंभीर अपराध है।
एक्स्ट्रा संदर्भ: छत्तीसगढ़ में गोबर खरीदी योजना
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत 2 रुपये किलो में गोबर खरीदी की जाती है। इसका उद्देश्य जैविक खाद को बढ़ावा देना और पशुपालकों की आय बढ़ाना है। मरवाही का यह मामला उसी योजना की आड़ में हुए भ्रष्टाचार को उजागर करता है, जिससे योजना की साख पर भी सवाल उठे हैं। वन विभाग में पौधारोपण कार्यों के लिए बड़ी मात्रा में गोबर खाद की जरूरत होती है, और इसी का फायदा उठाकर यह फर्जीवाड़ा किया गया।
फिलहाल वन विभाग की जांच जारी है और स्थानीय लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस घोटाले के “मास्टरमाइंड” तक कार्रवाई पहुंचेगी या नहीं।




