बिलासपुर जनदर्शन में उमड़ा फरियादियों का सैलाब: कलेक्टर ने मौके पर ही कस दी अफसरों की लगाम, बुजुर्ग महिला से लेकर सरपंच तक सबकी सुनी ‘मन की बात’
बिलासपुर जनदर्शन में उमड़ा फरियादियों का सैलाब: कलेक्टर ने मौके पर ही कस दी अफसरों की लगाम, बुजुर्ग महिला से लेकर सरपंच तक सबकी सुनी 'मन की बात'

बिलासपुर, 21 अप्रैल 2026 मंगलवार को जिला कलेक्टर कार्यालय का नजारा कुछ अलग ही था। साप्ताहिक जनदर्शन में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल की चौखट पर शहर से लेकर गांव-देहात तक से सैकड़ों फरियादी अपनी-अपनी ‘दुखभरी दास्तान’ लेकर पहुंच गए। किसी के सिर पर शौचालय की चिंता, तो कोई मुक्तिधाम की जमीन पर कब्जे से परेशान। लेकिन कलेक्टर साहब ने भी दिखा दिया कि ‘सरकार आपके द्वार’ सिर्फ नारा नहीं है — अधिकांश मामलों में मौके पर ही संबंधित अफसरों को फोन घुमाकर बोले, “तुरंत निपटाओ, जनता को टहलाना नहीं है!”
जनदर्शन में कलेक्टर के साथ नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे और जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे। तीनों अफसरों ने एक-एक फरियादी को इत्मीनान से सुना और आवेदन लेते ही एक्शन का भरोसा दिया।

किस-किस की खुली किस्मत, कौन लाया दर्द-ए-दिल
1. मुक्तिधाम पर कब्जा, सरपंच लाए गांव का दर्द
फरियादी: कोटा ब्लॉक के ग्राम पंचायत छतौना के सरपंच और ग्रामीण
दर्द-ए-दिल: गांव के ही गंगा राम गोड़ ने मुक्तिधाम की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया। नौबत ये कि किसी की मौत पर अंतिम संस्कार के लिए भी जगह नहीं बची।
किस्मत कैसे खुली: कलेक्टर ने आवेदन देखते ही राजस्व विभाग को तलब किया और बोले— “तुरंत जांच कर कब्जा हटाओ, मुक्तिधाम की जमीन मुक्त कराओ।”
2. 70 की उम्र में ‘इज्जत घर’ की जंग
फरियादी: मस्तूरी के खोरसी गांव की वृद्धा जहाज बाई
दर्द-ए-दिल: घर में शौचालय नहीं। मजबूरी में खुले में जाना पड़ता है। उम्र ऐसी कि हर कदम पर डर, और जेब ऐसी कि खुद से बनवा नहीं सकतीं।
किस्मत कैसे खुली: कलेक्टर ने जिला पंचायत CEO को मौके पर ही निर्देश दिए— “आज ही राशि स्वीकृत कर शौचालय बनवाना शुरू करो। प्राथमिकता में रखो।”
3. भूमिहीन मजदूर की पीड़ा
फरियादी: ग्राम करमा की त्रिवेणी साहू
दर्द-ए-दिल: न खेत, न एक इंच जमीन। मजदूरी से जैसे-तैसे घर चलता है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना का लाभ आज तक नहीं मिला।
किस्मत कैसे खुली: कलेक्टर ने संबंधित अफसर को फटकार लगाई— “पात्र हितग्राही छूटे कैसे? इसी हफ्ते नाम जोड़कर लाभ दिलाओ।”
4. कटी केबल, जान का खतरा
फरियादी: बिल्हा ब्लॉक के केसला गांव के किसान उत्तम रात्रे
दर्द-ए-दिल: खेत के बोर पंप की बिजली केबल जगह-जगह से कटी हुई। करंट फैलने का खतरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा। सिंचाई ठप, फसल बर्बाद होने की नौबत।
किस्मत कैसे खुली: बिजली विभाग के अफसर को जनदर्शन से ही कलेक्टर का फोन गया— “24 घंटे के अंदर नई केबल लगाओ, कल स्टेटस रिपोर्ट मेरी टेबल पर हो।”
5. 5 महीने से अटकी पेंशन, अटका बुढ़ापा
फरियादी: ग्राम बिरगहनी के वृद्ध शिवनंदन यादव
दर्द-ए-दिल: 4-5 महीने से वृद्धा पेंशन बंद। दवा-रोटी के लिए भी दूसरों का मुंह ताकना पड़ रहा है।
किस्मत कैसे खुली: समाज कल्याण विभाग को सख्त हिदायत— “आज ही पेंशन रिलीज करो, कल तक बुजुर्ग के खाते में पैसा पहुंच जाना चाहिए।”
6. आधा-अधूरा PM आवास, पूरी टेंशन
फरियादी: चनाडोंगरी के देवसिंह गेंदले
दर्द-ए-दिल: प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान स्वीकृत हुए साल भर हो गया, पर किस्त नहीं आई। आधा बना घर बारिश में टपकता है, परिवार परेशान।
किस्मत कैसे खुली: PM आवास शाखा को कलेक्टर का आदेश— “फाइल देखो, कल तक इनका भुगतान क्लियर करो।”
जनदर्शन बना ‘तुरंत समाधान दरबार’
केवल यही नहीं, जनदर्शन में प्रधानमंत्री आवास, जमीन-जायदाद के विवाद, पेंशन, राजस्व और बिजली से जुड़े दर्जनों आवेदन आए। खास बात ये रही कि कलेक्टर ने किसी भी फरियादी को ‘बाद में आना’ कहकर नहीं टरकाया। हर आवेदन को पढ़ा, समस्या समझी और वहीं बैठे-बैठे संबंधित अफसर को बुलाकर कहा — “ये काम आज ही शुरू होना चाहिए, फाइल घुमाने की बीमारी नहीं चलेगी।”
ग्रामीणों का कहना था कि “साहब ने ऐसे सुना जैसे घर का बड़ा बुजुर्ग सुनता है”। वृद्धा जहाज बाई तो आंखों में आंसू लिए बोलीं, “अब लगता है शौचालय बन जाएगा, इज्जत से जी सकूंगी।”
क्यों खास रहा ये जनदर्शन?
मौके पर निपटारा: 80% से ज्यादा मामलों में अफसरों को तुरंत फोन पर निर्देश
हर वर्ग की सुनवाई: सरपंच से लेकर भूमिहीन मजदूर तक, सबको मिला बराबर समय
टीम वर्क: कलेक्टर के साथ कमिश्नर और CEO भी पूरे समय मौजूद,थे
कुल मिलाकर बिलासपुर कलेक्ट्रेट में मंगलवार का दिन ‘फरियाद से फौरन समाधान’ वाला रहा। अब देखना ये है कि अफसरों की कलम कितनी तेजी से चलती है, क्योंकि कलेक्टर साहब ने साफ कर दिया है — “जनता की अर्जी, मेरी फर्जी नहीं चलेगी। कलेक्टर” संजय अग्रवाल




