मस्तूरी में गहराया जल संकट: 300 से ज्यादा तालाब सूखे, खूंटाघाट डैम से एक सप्ताह में पानी छोड़ने का कलेक्टर का आश्वासन
मस्तूरी में गहराया जल संकट: 300 से ज्यादा तालाब सूखे, खूंटाघाट डैम से एक सप्ताह में पानी छोड़ने का कलेक्टर का आश्वासन

मस्तूरी, बिलासपुर :- गर्मी शुरू होते ही मस्तूरी क्षेत्र में पेयजल और निस्तारी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। हालात यह हैं कि खारंग जलाशय यानी खूंटाघाट डैम पर निर्भर 300 से अधिक तालाबों में से आधे से ज्यादा पूरी तरह सूख चुके हैं। इसके चलते हैंडपंप और बोरवेल का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है और गांवों में पीने के पानी के लिए हाहाकार मच गया है।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, एक सप्ताह में राहत का वादा
सोमवार को जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत के नेतृत्व में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने बिलासपुर कलेक्टर से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपकर बताया कि भीषण गर्मी के कारण न सिर्फ निस्तारी का संकट है, बल्कि पेयजल के स्रोत भी जवाब दे रहे हैं। ग्रामीणों ने अघोषित बिजली कटौती पर भी नाराजगी जताई, जिससे पानी की समस्या और बढ़ रही है।
कलेक्टर ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आश्वस्त किया कि आगामी एक सप्ताह के भीतर खारंग जलाशय से पानी छोड़ दिया जाएगा। इससे क्षेत्र के सूखे तालाबों को फिर से भरा जा सकेगा और लोगों को निस्तारी के साथ पेयजल की समस्या से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
किसानों ने दिखाई समझदारी, रबी में धान नहीं बोया
ग्राम पंचायत पाराघाट के सरपंच संदीप सोनी ने बताया कि गांव में पानी की किल्लत को देखते हुए इस साल रबी सीजन में धान की फसल नहीं ली गई। इसके बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलों जैसे चना, गेहूं और मूंगफली को प्राथमिकता दी गई ताकि भूजल स्तर को और गिरने से बचाया जा सके।
मौके पर ये जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
कलेक्टर से मुलाकात के दौरान जिला पंचायत सदस्य दामोदर कांत, जनपद सदस्य देव सिंह पोर्ते, सरपंच संदीप सोनी, चंदन केंवट, दीपचंद वस्त्रकार, संतोष डोंगरे, धरम लाल डहरिया, विजय राठौर, रोशन वस्त्रकार, प्रेम सागर मरकाम, किरन तिवारी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
मुख्य बिंदु
संकट का दायरा: मस्तूरी विधानसभा के 300+ तालाब खूंटाघाट डैम पर निर्भर, 50% से ज्यादा सूखे।
असर: निस्तारी ठप, हैंडपंप-बोरवेल फेल, पेयजल का गहराता संकट।
प्रशासन का कदम: कलेक्टर का एक सप्ताह में डैम से पानी छोड़ने का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों की पहल: पराघाट गांव में पानी बचाने के लिए रबी में धान की जगह चना, गेहूं, मूंगफली की खेती।
अतिरिक्त समस्या: अघोषित बिजली कटौती से संकट और बढ़ा।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें एक सप्ताह बाद खूंटाघाट से छोड़े जाने वाले पानी पर टिकी हैं। अगर समय पर पानी नहीं मिला तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।




