ब्रेकिंग न्यूज़ :- बिलासपुर के मस्तूरी में ‘धान घोटाले’ का मास्टरमाइंड जेल से निकलते ही फिर बना प्रबंधक: गतौरा से बर्खास्त नहीं, दर्रीघाट में कुर्सी पर कब्जा – सीईओ के ‘डबल गेम’ से सहकारिता विभाग में हड़कंप!
धान घोटाले का 'डबल गेम': जेल से छूटा प्रबंधक दर्रीघाट में कुर्सी पर, गतौरा से अब तक बर्खास्त नहीं! सीईओ गोधूलि वर्मा के इलाके में ही सबसे बड़ा 'खेल'

बिलासपुर/मस्तूरी – 28 लाख के धान घोटाले में जेल की हवा खा चुके प्रबंधक कोमल प्रसाद चंद्राकर का मामला अब और गरमा गया है। जमानत पर छूटते ही दर्रीघाट की कुर्सी तो मिल गई, लेकिन गतौरा धान खरीदी केंद्र से आज तक बर्खास्त क्यों नहीं किया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि गतौरा की प्राधिकृत अधिकारी खुद सहकारिता विभाग की सीईओ गोधूलि वर्मा हैं, फिर भी इतने बड़े फर्जीवाड़े के बाद कार्रवाई क्यों नहीं?
डबल चार्ज, डबल सवाल
3 अप्रैल 2026 को गतौरा धान खरीदी केंद्र में 919.96 क्विंटल धान, 28.51 लाख के गबन में कोमल चंद्राकर, राजेंद्र राठौर और हुलेश्वर धीरही जेल गए थे। खुलासा हुआ कि कोमल चंद्राकर एक साथ गतौरा और दर्रीघाट दोनों केंद्रों का प्रबंधक था।
जमानत पर रिहा होते ही दर्रीघाट का चार्ज फिर से कोमल को दे दिया गया, जबकि कुछ दिन पहले ही सभी की सहमति से टेकारी के प्रबंधक को दर्रीघाट का चार्ज दिया गया था। बिना जानकारी चार्ज कैसे पलट गया?
सबसे सनसनीखेज खुलासा: गतौरा से बर्खास्तगी क्यों नहीं?
सीईओ के इलाके में ही ‘मेहरबानी’? – गतौरा धान खरीदी केंद्र की प्राधिकृत अधिकारी खुद सीईओ गोधूलि वर्मा हैं। उनके ही केंद्र में 28 लाख का घोटाला हुआ, प्रबंधक जेल गया, फिर भी कोमल चंद्राकर को गतौरा से बर्खास्त क्यों नहीं किया गया?
बिना बर्खास्तगी नई नियुक्ति? – नियम कहते हैं पहले बर्खास्त करो, फिर नया प्रबंधक बनाओ। यहां गतौरा में कोमल को बर्खास्त किए बिना ही किसी और को प्रबंधक की जिम्मेदारी दे दी गई। यह कौन सा नियम है?
सीईओ का कबूलनामा – गोधूलि वर्मा ने माना कि “निलंबन की कार्रवाई हमने ही की थी और बहाली की कार्रवाई भी हमने ही की है।” यानी निलंबित किया, फिर बहाल भी कर दिया। लेकिन बर्खास्तगी का ‘ब’ तक नहीं।
बैंक मैनेजर भी हैरान: इस पूरे मामले में जब जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मस्तूरी के शाखा प्रबंधक से पक्ष लिया गया तो उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा – “हमें खुद सहकारिता विभाग से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली कि कोमल चंद्राकर को जेल से आने के बाद कब और किसके आदेश पर दर्रीघाट धान खरीदी केंद्र का प्रबंधक बनाया गया। बैंक रिकॉर्ड में अभी भी पुरानी स्थिति ही दर्ज है।”
दर्रीघाट में ‘गतौरा से बड़ा कांड’ का डर
दर्रीघाट के प्राधिकृत अधिकारी बृजनंदन का कहना है – “टेकारी का प्रबंधक ही दर्रीघाट देख रहा है।”
लेकिन विभाग कह रहा है – “कोमल चंद्राकर प्रबंधक है।”
एक कुर्सी, दो दावेदार।
स्थानीय लोगों की आशंका: “जब गतौरा में 28 लाख का खेल कर दिया, तो क्या गारंटी है कि दर्रीघाट में गतौरा से भी बड़ा कांड नहीं होगा? जमानत पर छूटा आरोपी अगर फिर से मालिक बनकर बैठेगा तो किसानों का धान सुरक्षित कैसे रहेगा?”
एक आरोपी अब भी फरार, अफसर ‘साइलेंट मोड’ पर
घोटाले का एक आरोपी अब भी फरार है, लेकिन डीआर ऑफिस समेत उच्च अधिकारी फोन नहीं उठा रहे।
जनता की मांग: पहले बर्खास्त करो!
सर्वप्रथम कोमल चंद्राकर को गतौरा धान खरीदी केंद्र से तत्काल बर्खास्त किया जाए।
दर्रीघाट धान खरीदी केंद्र से भी तुरंत हटाया जाए, क्योंकि दोनों केंद्रों का प्रभारी वही है।
जब तक विभागीय जांच पूरी न हो, किसी भी केंद्र का चार्ज न दिया जाए।
सवाल ही सवाल: जिस केंद्र में घोटाला हुआ, उसकी प्राधिकृत अधिकारी सीईओ खुद हैं। उसी केंद्र के आरोपी को बर्खास्त तक नहीं किया गया। उल्टा दूसरे केंद्र की कमान सौंप दी। क्या यह ‘सेटिंग’ का खेल नहीं है?
प्रशासन की चुप्पी बता रही है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है। अब देखना है कि शासन इस ‘डबल गेम’ पर कब संज्ञान लेता है, या फिर दर्रीघाट में गतौरा से बड़ा धमाका होने का इंतजार किया जा रहा है?



