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“बिलासपुर के सिरगिट्टी में स्वास्थ्य केंद्र बना ‘लापरवाही का अड्डा’, कड़कती धूप में तड़पते रहे मरीज, निक्की दुबे के छापे में खुली पोल”

"डॉक्टर नदारद, कंपाउंडर बने 'भगवान' — आयुष्मान आरोग्य मंदिर में मरीजों की जिंदगी राम भरोसे!"

बिलासपुर के सिरगिट्टी इलाके से स्वास्थ्य विभाग को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। जिस आयुष्मान आरोग्य मंदिर को सरकार ने जनता की सेहत का ‘मंदिर’ बताया था, वो अब डॉक्टरों की मनमानी का ‘अड्डा’ बन चुका है। यहां न डॉक्टर हैं, न इलाज, न जवाबदेही — बस खाली कुर्सियां, लंबी कतारें और मरीजों की मजबूरी का तमाशा है।

कंपाउंडर बना डॉक्टर, पर्ची वाला गायब  

मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब सिरगिट्टी मंडल उपाध्यक्ष निक्की दुबे ने अचानक स्वास्थ्य केंद्र पर धावा बोल दिया। नजारा देखकर वो भी सन्न रह गए। OPD में डॉक्टर हर प्रसाद मेश्राम और RMO रजनी रघुवंशी की कुर्सियां धूल फांक रही थीं। पर्ची काउंटर पर ताला लटका था। और अंदर? अंदर कंपाउंडर साहब खुद ‘डॉक्टर’ बने बैठे थे — बिना बीपी देखे, बिना जांच किए, बस अंदाजे से मरीजों को दवाइयों की पुड़िया थमा रहे थे। 

एक बुजुर्ग मरीज ने गुस्से में कहा, “बाबू, हम गरीबों की जान इतनी सस्ती है का? बिना देखे गोली पकड़ा देत हैं। कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार?” 

महीने में दो दिन के मेहमान’ बन गए डॉक्टर  

ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका आरोप है कि डॉ. मेश्राम और रजनी रघुवंशी महीने में सिर्फ एक-दो दिन ‘दर्शन’ देने आते हैं। बाकी 28 दिन पूरा अस्पताल कंपाउंडर के हवाले रहता है। 45 डिग्री की झुलसाती गर्मी में 20-25 किमी दूर गांवों से आए बुखार-उल्टी से तपते मरीज घंटों लाइन में खड़े रहे, लेकिन ‘साहब’ के दर्शन नहीं हुए। 

एक महिला मरीज बोली, “बच्चा को तेज बुखार है। सुबह 9 बजे से बैठे हैं। अब 2 बज गए। डॉक्टर का अता-पता नहीं। कंपाउंडर ने एक गोली दे दी और बोला ‘घर जाओ’। यही इलाज है का?”

निक्की दुबे का फूटा गुस्सा: “ये लापरवाही नहीं, हत्या है”  

निरीक्षण के बाद मंडल उपाध्यक्ष निक्की दुबे का पारा चढ़ गया। उन्होंने कहा, “ये स्वास्थ्य केंद्र नहीं, मौत का कुआं बन गया है। बिना MBBS की डिग्री के कंपाउंडर दवा बांट रहा है — ये सीधे-सीधे मरीजों की हत्या करने जैसा है।” 

दुबे ने ऐलान किया कि इस ‘आपराधिक लापरवाही’ की शिकायत वो सीधे स्वास्थ्य मंत्री और बिलासपुर कलेक्टर से करेंगे। “डॉ. मेश्राम और रजनी रघुवंशी पर सख्त एक्शन होगा। सस्पेंशन नहीं, बर्खास्तगी होनी चाहिए। जब तक ऐसे डॉक्टरों को सबक नहीं सिखाया जाएगा, गरीब ऐसे ही मरते रहेंगे,” उन्होंने दो टूक कहा।

ग्रामीणों की चेतावनी: अब सड़क पर उतरेंगे  

स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर 7 दिन में डॉक्टरों की रोज हाजिरी शुरू नहीं हुई, तो वो स्वास्थ्य केंद्र पर ताला जड़ देंगे और चक्काजाम करेंगे। “हम वोट देते हैं, टैक्स देते हैं, फिर भी इलाज के लिए तरस रहे हैं। अब बहुत हुआ,” एक ग्रामीण ने कहा।

सवाल जो आग की तरह उठ रहे हैं:  

जब डॉक्टर महीने में 2 दिन आते हैं, तो बाकी 28 दिन की सैलरी किस बात की ले रहे हैं?  

CMHO और BMO क्या कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं?  

कंपाउंडर को दवा बांटने का अधिकार किसने दिया? अगर कोई मरीज मर गया तो जिम्मेदार कौन?  

आयुष्मान’ के नाम पर बने इस ‘आरोग्य मंदिर’ में बीमारों की आरती कौन उतारेगा? 

फिलहाल सिरगिट्टी का ये स्वास्थ्य केंद्र ‘बीमार’ है, और इलाज करने वाले ही लापता हैं। अब देखना ये है कि निक्की दुबे की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटती है या फिर ये फाइल भी बाकी शिकायतों की तरह धूल खाती रहेगी।

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