बिलासपुर ब्रेकिंग: राख के ढेर पर बैठा NTPC सीपत, मजदूर दिवस पर फूटेगा जनता का गुस्सा ग्राम सुखरीपाली, थाना-सीपत, जिला बिलासपुर | 1 मई 2026
बिलासपुर धमाका: NTPC सीपत में राख का खेल, करोड़ों का मेल; मजदूर दिवस पर दहाड़ेंगे गांव वाले ग्राम सुखरीपाली, थाना-सीपत, जिला बिलासपुर | 1 मई 2026

बिलासपुर ब्रेकिंग: राख के ढेर पर बैठा NTPC सीपत, मजदूर दिवस पर फूटेगा जनता का गुस्सा ग्राम सुखरीपाली, थाना-सीपत, जिला बिलासपुर 1 मई 2026
वादों की राख, हकीकत का धुआं
साहब ये विकास है या विनाश? बिलासपुर से महज 15 किमी दूर महारत्न NTPC सीपत में हालात ऐसे हैं कि बिजली तो बन रही है, पर ग्रामीणों की जिंदगी में अंधेरा पसर गया है। मजदूर दिवस पर 1 मई को सुखरीपाली के ठाकुर देव द्वार पर जनता का ऐसा सैलाब उमड़ेगा कि प्रबंधन की नींद उड़ना तय है। 24 सूत्रीय मांगों का बम तैयार है और फ्यूज पर उंगली रखी है जनप्रतिनिधियों ने।
AGM वासने निशाने पर, CBI जांच की ललकार
जनप्रतिनिधि नरेंद्र वस्त्रकार और रेवा शंकर साहू ने खुलेआम चैलेंज फेंका है। सीधा आरोप है कि फ्लाईऐश यूटिलाइजेशन विभाग के AGM अनंत वासने के संरक्षण में राख डेम से करोड़ों का खेल चल रहा है। मांग क्या है? वासने साहब का बैंक अकाउंट, मोबाइल कॉल डिटेल और उनके चहेते ट्रांसपोर्टरों की CBI से जांच कराओ। दावा है कि जांच शुरू हुई तो अरबों का घोटाला मुंह खोलकर सामने आ जाएगा।
एक ट्रक, अनेक नेम प्लेट: फर्जी बिल्टी का काला खेल
राखड़ वाहनों पर एक-दो नहीं, अनेक नेम प्लेट लगाकर फर्जी बिल्टी काटी जा रही है। मतलब एक ट्रक से 10 ट्रक का पैसा बनाया जा रहा है। ऊपर से प्रतिबंधित सेनोस्फीयर की चोरी रात के अंधेरे में हो रही है। रॉक, कौड़िया, गतौरा के खनिज को बिना रॉयल्टी दिए खपाया जा रहा है। सीधा-सीधा शासन को करोड़ों का चूना।
किसानों की खेती बनी दलदल, मवेशी राख में दफन
NTPC के राख बांध से रिसाव ने गतौरा, सुखरीपाली के खेतों को दलदल बना दिया। सिंचाई की नहरें राख से ऐसी जमी हैं कि पानी की बूंद तक नहीं पहुंचती। 18 साल से चारागाह का अता-पता नहीं। मवेशी राख में फंसकर मर रहे हैं और उड़ती राख से पूरा इलाका टीबी, दमा का चैंबर बन गया है। स्वास्थ्य जांच के नाम पर सिर्फ फोटो सेशन होता है।
152 आदिवासी पद खाली, बाहरी भर रहे तिजोरी
नौकरी का हाल सुनिए। आदिवासियों के 152 पद आज तक खाली पड़े हैं। त्रिपक्षीय बैठक में 692 पद तय हुए थे, पर कागजों में ऐसा गणित भिड़ाया गया कि स्थानीय बेरोजगार देखते रह गए। आरोप है कि बाहर से लोगों को पैसे लेकर भर्ती किया जा रहा है। राख ढोने वाले 70 टन के ट्रकों में हेल्पर तक नहीं, ड्राइवर अकेला यमराज से आंख-मिचौली खेल रहा है।
PM सड़क बनी खंडहर, CSR फंड कहां गया?
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की 14 टन वाली सड़क पर 60-70 टन के दैत्य ट्रक दौड़ रहे हैं। नतीजा? सड़क नहीं, गड्ढों का समंदर। घूमना पुल 4 साल से जर्जर पड़ा है। CSR के नाम पर करोड़ों का फंड पास होता है, पर गांव में स्कूल, अस्पताल, लाइट का एक खंभा तक नया नहीं लगा। पैसा गया कहां?
₹541 की जगह ₹350, हक मांगो तो रासुका की धमकी
मजदूरों को शासन की तय ₹541 मजदूरी की जगह ₹300-350 पकड़ाया जा रहा है। काम के दौरान हादसा हो जाए तो ESI, मुआवजा सब हवा। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का पेमेंट महीनों से रोक कर उन्हें बर्बाद किया जा रहा है। और कोई आवाज उठाए तो सीधे रासुका लगाने की धमकी। मतलब तानाशाही खुलेआम।
फोन नहीं उठाते साहब, जवाब कौन देगा?
AGM अनंत वासने का पक्ष जानने कई बार फोन लगाया गया, पर जवाब देने के डर से फोन उठाना ही मुनासिब नहीं समझा। अब जनता पूछ रही है: जब चोरी नहीं की तो डर किस बात का?
9 मार्च से 1 मई तक: सिर्फ घुमाने का खेल
जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि 9 मार्च को आंदोलन टालने के लिए 1 मई तक समाधान का झुनझुना पकड़ा दिया गया। अब तारीख आई तो प्रबंधन मीटिंग-मीटिंग खेलकर टाइमपास कर रहा है। न समाधान, न सुनवाई।
कानून की किताब भी चीख रही है
कानूनी जानकार बता रहे हैं कि ये 24 बिंदु सिर्फ शिकायत नहीं, न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण नियम, NGT के आदेश और पेसा कानून को रौंदने का सबूत हैं। निष्पक्ष जांच हुई तो बड़े-बड़े अफसरों पर गाज गिरेगी।
1 मई को आर-पार, अब राख नहीं चिंगारी उड़ेगी
अब ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया है। 1 मई को ठाकुर देव द्वार पर महाआंदोलन होगा। मांग साफ है: पूरे घोटाले की CBI जांच हो, 152 आदिवासी पदों पर तुरंत भर्ती हो, बर्बाद फसल का मुआवजा मिले, ओवरलोड ट्रक बंद हों और मजदूर को पूरी मजदूरी मिले।
अगर अब भी प्रबंधन नहीं जागा तो सुखरीपाली से उठी ये चिंगारी पूरे सीपत को अपने लपेटे में ले लेगी। क्योंकि वादों की राख में दबे ग्रामीण अब उठ खड़े हुए हैं।




