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बिलाईगढ़ में मारपीट मामला: राजनीतिक दबाव में पुलिस की मिलीभगत का आरोप, मार खाने वाले पीड़ित परिवार पर भी काउंटर केस दर्ज, क्या यह न्याय है?

बिलाईगढ़ में खूनी तांडव: 12-15 हमलावरों ने घर में घुसकर महिलाओं-बच्चों को किया लहूलुहान, 9 संगीन धाराओं में केस दर्ज करने की मांग, थाना प्रभारी पर आरोपियों से साठगांठ का आरोप

सारंगढ़ बिलाईगढ़, 12 मई 2026 :- नगर पंचायत बिलाईगढ़ के वार्ड-10 रविदास मोहल्ला में 5 मई को हुई हिंसक झड़प ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने मार खाने वाले पक्ष पर ही काउंटर केस दर्ज कर दिया।

राजनीतिक दबाव में पुलिस पर मिलीभगत का आरोप  

पीड़ित अमित कुमार रत्नाकर का आरोप है कि थाना बिलाईगढ़ की पुलिस राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। परिवार का कहना है कि 5 मई को 12 से 15 लोगों ने घर में घुसकर हमला किया, जिसमें उनके पैर की हड्डी टूटी और बच्चों को गंभीर चोटें आईं। इसके बावजूद पुलिस ने कार्रवाई के बजाय उल्टा पीड़ित पक्ष पर ही काउंटर केस बना दिया।

पीड़ित परिवार ने 8 मई को SP को दिए आवेदन में थाना प्रभारी की भूमिका की जांच की मांग की है। उनका सवाल है कि जब घर में घुसकर मारपीट हुई तो आत्मरक्षा करने वाले पर केस कैसे बन सकता है?

घर में घुसकर मारपीट का आरोप, 12 से 15 लोग थे शामिल  

पीड़ित के आवेदन के अनुसार 5 मई दोपहर 2 बजे टेकाराम निषाद अपने साथियों अविनाश, भूपति, शेषनारायण, राहुल हिरवानी, किशन हिरवानी, सूरज निराला, रघु हिरवानी, टीका निराला, गुड्डा हिरवानी, हरीश निराला समेत 12 से 15 लोगों के साथ लाठी, डंडे, लोहे के पाइप लेकर घर में घुस आए। 

मारपीट में अमित कुमार के पैर में फ्रैक्चर हुआ, जिसकी पुष्टि सीएचसी बिलाईगढ़ के एक्स-रे से हुई है। मासूम अंश रत्नाकर के सिर पर और एक अन्य नाबालिग के हाथ में चोट आने का दावा है। महिलाओं से अभद्रता का आरोप भी है।

मार खाने वाले पर ही केस, क्या यह सही है?  

यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि दोनों पक्षों पर FIR दर्ज हुई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि हमलावर उनके घर में घुसे थे। ऐसे में उन पर काउंटर केस दर्ज होना न्यायसंगत नहीं है। परिवार का दावा है कि उन्होंने सिर्फ आत्मरक्षा की थी। 

परिवार का सवाल है कि क्या राजनीतिक पहुंच के कारण पुलिस ने असली आरोपियों को बचाने के लिए पीड़ितों को ही आरोपी बना दिया?

सर्व रविदास समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी  

11 मई 2026 को सर्व रविदास समाज छत्तीसगढ़ के पदाधिकारियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। समाज ने पुलिस की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए 7 दिन में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने पर जिला मुख्यालय में उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।

इन 9 संगीन धाराओं में कार्रवाई की मांग

पीड़ित परिवार और समाज ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि सभी नामजद आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता BNS 2023 के तहत तत्काल FIR दर्ज हो:  

धारा 191(2) BNS – दंगा करना  

धारा 190 BNS – गैरकानूनी जमाव के हर सदस्य द्वारा किया गया अपराध  

धारा 333 BNS – उपहति कारित करने की तैयारी के बाद गृह-अतिचार  

धारा 74 BNS – स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से हमला या आपराधिक बल का प्रयोग  

धारा 115(2) BNS – स्वेच्छा से उपहति कारित करना  

धारा 117(2) BNS – स्वेच्छा से घोर उपहति कारित करना  

धारा 109 BNS – हत्या करने का प्रयास  

धारा 352 BNS – शांति भंग कराने के आशय से जानबूझकर अपमान करना  

धारा 351(3) BNS – मृत्यु या घोर उपहति कारित करने की आपराधिक धमकी

साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं जोड़ने और पीड़ित परिवार को तत्काल पुलिस सुरक्षा देने की मांग भी की गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के आरोपों की जांच कर रही है। वरिष्ठ अधिकारियों का बयान अभी प्रतीक्षित है। पीड़ित परिवार दहशत में है।

(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)

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