बिलासपुर: पथरी के ऑपरेशन के बाद कॉन्स्टेबल की संदिग्ध मौत, मजिस्ट्रियल जांच शुरू – परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल बोला- हार्ट अटैक से गई जान, 4 डॉक्टरों की टीम ने की वीडियोग्राफी के साथ पीएम
बिलासपुर: कॉन्स्टेबल की मौत पर बवाल – पथरी ऑपरेशन के बाद 4 घंटे तक नहीं मिला डॉक्टर, परिजनों ने कहा 'लापरवाही से गई जान', अस्पताल बोला 'हार्ट अटैक', मजिस्ट्रियल जांच शुरू

बिलासपुर: पथरी के ऑपरेशन के बाद कॉन्स्टेबल की संदिग्ध मौत, मजिस्ट्रियल जांच शुरू – परिजनों का इलाज में लापरवाही का आरोप, अस्पताल बोला- हार्ट अटैक से गई जान, 4 डॉक्टरों की टीम ने की वीडियोग्राफी के साथ पीएम

बिलासपुर. नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल में पुलिस आरक्षक सत्यकुमार पाटले (36) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों के हंगामे और लापरवाही के गंभीर आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं। सिम्स के चार विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव का पोस्टमार्टम किया, जिसकी वीडियोग्राफी भी कराई गई है। अब प्रशासन और परिजन दोनों को पीएम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही मौत की असली वजह साफ होगी।

क्या है पूरा मामला
मस्तूरी थाना क्षेत्र के ग्राम एरमशाही निवासी सत्यकुमार पाटले पुलिस विभाग में आरक्षक थे और सरकंडा थाने में पदस्थ थे। 26 अप्रैल को पेट में असहनीय दर्द होने पर वे नेहरू नगर स्थित श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे। जांच में पथरी की समस्या बताकर डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी।
परिजनों का आरोप है कि बिना चीरा लगाए लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई। ऑपरेशन के अगले दिन तक सत्यकुमार बिल्कुल ठीक थे, लेकिन अचानक शाम को उनकी तबीयत बिगड़ गई।
4 घंटे तक नहीं आया विशेषज्ञ डॉक्टर, आरोप
परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तबीयत बिगड़ने के बाद करीब 4 घंटे तक कोई विशेषज्ञ डॉक्टर इलाज के लिए नहीं आया। समय पर इलाज न मिलने से हालत गंभीर होती चली गई और शुक्रवार दोपहर सत्यकुमार की मौत हो गई।
मौत की खबर मिलते ही परिजन आक्रोशित हो गए और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। स्थिति तनावपूर्ण होते देख बड़ी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंचा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज करने की मांग की। उनका कहना है कि अगर समय रहते मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया जाता, तो शायद जान बच जाती।
अस्पताल प्रबंधन का दावा: मौत हार्ट अटैक से हुई
वहीं, श्रीराम केयर अस्पताल के संचालक डॉ. अमित सोनी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका दावा है कि कॉन्स्टेबल की मौत इलाज में लापरवाही से नहीं, बल्कि हार्ट अटैक से हुई है। ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा था।
मजिस्ट्रियल जांच शुरू, इन बिंदुओं पर फोकस
शनिवार को परिजनों के लगातार विरोध के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। पहले जिला अस्पताल में पीएम की बात हुई, लेकिन चार डॉक्टरों की टीम गठित न होने के कारण सिम्स में पोस्टमार्टम कराया गया।
जिला प्रशासन ने कार्यपालिक मजिस्ट्रेट एवं नायब तहसीलदार आकाश गुप्ता को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। आकाश गुप्ता ने खुद अस्पताल पहुंचकर स्टाफ से पूछताछ की है।
जांच के मुख्य बिंदु:
आरक्षक की हालत बिगड़ने के समय ड्यूटी पर कौन से डॉक्टर मौजूद थे?
मरीज को क्या उपचार दिया गया और किस समय दिया गया?
क्या इलाज में कोई लापरवाही या गलत दवा दी गई?
4 घंटे तक विशेषज्ञ डॉक्टर के न आने के आरोप की सच्चाई क्या है?
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष हो और किसी भी रसूख का प्रभाव न पड़े, इसलिए मजिस्ट्रियल जांच कराई जा रही है।
पीएम रिपोर्ट से खुलेगा राज
सिम्स के चार डॉक्टरों की विशेषज्ञ टीम ने शनिवार शाम करीब 5 बजे पोस्टमार्टम किया। माना जा रहा है कि सोमवार को पीएम रिपोर्ट सौंपी जा सकती है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन से उनका भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि बड़ी चूक है।
ASP का बयान
पंकज पटेल, ASP बिलासपुर ने कहा, “परिजनों की मांग पर मजिस्ट्रियल जांच कराई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर पुलिस आगे की वैधानिक कार्रवाई करेगी। मामले को पूरी गंभीरता से लिया गया है।”
फिलहाल पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बयान एक-दूसरे के उलट हैं। असली सच्चाई पोस्टमार्टम और मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएगी।




