‘बिलासपुर मस्तूरी दो जनसेवकों के बीच मित्रतापूर्ण सहयोग को भ्रष्टाचार बताना घोर निंदनीय साजिश: भाजपा नेता चंद्रप्रकाश सूर्या व खिलावन पटेल’
जनसेवकों पर कीचड़ उछालने वाले पत्रकार को पत्रकारिता से बाहर करने की मांग, साजिश में शामिल तत्वों पर हो कड़ी कार्रवाई: भाजपा’

बिलासपुर। मस्तूरी क्षेत्र के लोकप्रिय जननेता एवं भाजपा प्रदेश महामंत्री चंद्रप्रकाश सूर्या और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि खिलावन पटेल पर लगाए गए निराधार आरोपों का पर्दाफाश हो गया है। सोमवार को संयुक्त प्रेसवार्ता में दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि 29 अप्रैल 2026 को कुकुर्दीकला जनसुनवाई के दौरान दो मित्रों के बीच हुई सामान्य मदद को ‘भ्रष्टाचार’ बताकर उनकी छवि खराब करने का षड्यंत्र रचा गया।
क्या था पूरा सच
29 अप्रैल को रेत घाट जनसुनवाई में जनता का पक्ष रखने पहुंचे चंद्रप्रकाश सूर्या को एक अत्यावश्यक व्यक्तिगत कार्य के लिए तत्काल राशि की जरूरत पड़ी। पास में मौजूद अपने अभिन्न मित्र खिलावन पटेल से उन्होंने मदद मांगी, जिस पर पटेल ने इंसानियत के नाते अपनी जेब से 25 हजार रुपये निकालकर दे दिए। पारदर्शिता के लिए सूर्या जी के कहने पर राशि को गिन भी लिया गया। यह पूरा वाकया सैकड़ों ग्रामीणों, अधिकारियों और मीडिया के सामने हुआ – यदि नीयत में खोट होती तो क्या कोई सार्वजनिक स्थान पर ऐसा करता?
पीत पत्रकारिता की सारी हदें पार: ऐसे तत्वों को पत्रकारिता से बाहर किया जाए

प्रेसवार्ता में नेताओं ने बताया कि कथित पत्रकार ने केवल चोरी-छिपे वीडियो बनाया, बल्कि पहले ब्लैकमेल करने की कोशिश की। सफल न होने पर अपने पोर्टल पर मनगढ़ंत, भ्रामक और एकतरफा खबर चला दी।
सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि उक्त पत्रकार ने अपनी झूठी खबर को जिले के अन्य कई सम्मानित पत्रकारों को भी भेजकर प्रकाशित करने का दबाव बनाया। गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में कुछ साथियों ने खबर लगा भी दी, लेकिन जब उन्हें सच्चाई पता चली और समझ आया कि यह पत्रकारों की मिली-जुली साजिश है, तो जिम्मेदार पत्रकार साथियों ने तुरंत खबर को अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया से हटा दिया। इससे साफ है कि पूरा प्रकरण पूर्व नियोजित था।
भाजपा नेताओं ने मांग की कि ऐसे ब्लैकमेलर और साजिशकर्ता तत्वों को पत्रकारिता जैसे पवित्र पेशे से तत्काल बाहर किया जाए। प्रेस क्लब, पत्रकार महासंघ और जिला प्रशासन ऐसे लोगों के प्रेस कार्ड निरस्त करे, ताकि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कलंकित न हो।
‘गरीबों के मसीहा’ हैं सूर्या-पटेल: क्षेत्र की जनता दे रही गवाही
चंद्रप्रकाश सूर्या और खिलावन पटेल का नाम मस्तूरी-बिलासपुर अंचल में ‘संकटमोचक’ के रूप में लिया जाता है। आधी रात को किसी गरीब की बेटी की शादी हो, किसी का इलाज हो या कार्यकर्ता पर कोई संकट हो – ये दोनों नेता अपना घर-बार छोड़कर मदद के लिए खड़े हो जाते हैं। इन्हीं की बढ़ती लोकप्रियता से बौखलाकर राजनीतिक विरोधियों ने पत्रकारिता की आड़ में यह घिनौना खेल खेला है।
कानूनी शिकंजा कसा, मानहानि का दावा तय
दोनों नेताओं ने कथित पत्रकार के खिलाफ थाने में एफआईआर दर्ज करा दी है। लीगल नोटिस पहले ही भेजा जा चुका है। अब करोड़ों रुपये का मानहानि दावा भी दायर किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी जनसेवक की पगड़ी उछालने से पहले हजार बार सोचे।
रेत घाट से कोई वास्ता नहीं
नेताओं ने फिर दोहराया कि उनका कुकुर्दीकला रेत घाट या किसी भी खनिज कारोबार से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। वे वहां सिर्फ जनता की आवाज बनकर गए थे।
जनता से अपील
चंद्रप्रकाश सूर्या ने कहा, “मेरी 25 साल की राजनीतिक तपस्या को 25 सेकंड के झूठे वीडियो से खत्म नहीं किया जा सकता। क्षेत्र की जनता हमारे चरित्र को जानती है। आप अफवाहों पर ध्यान न दें। सत्य की जीत होगी।”
(Neeraj Kumar Tiwari Editor-in-Chief)




