बिलासपुर: मस्तूरी के एरमसाही निवासी पुलिस जवान सत्यकुमार पाटले की श्री राम केयर में पथरी ऑपरेशन के बाद मौत, परिवार ने लगाया हत्या का आरोप
"पथरी के इलाज में गई पुलिस जवान की जान, बिलासपुर के श्री राम केयर हॉस्पिटल पर लापरवाही का आरोप, पिता बोले - पैसे के लिए बेटे को मार डाला"

बिलासपुर, 7 मई 2026 :- थाना सरकंडा में पदस्थ पुलिस आरक्षक सत्यकुमार पाटले की मौत ने बिलासपुर के स्वास्थ्य सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पथरी का ऑपरेशन कराने श्री राम केयर हॉस्पिटल गए 32 साल के सत्यकुमार की 30 अप्रैल को संदिग्ध हालत में मौत हो गई। पिता छतराम पाटले का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और पैसे की भूख ने उनके जवान बेटे की जान ले ली।

28 अप्रैल को भर्ती, 30 अप्रैल को मौत
ग्राम एरमसाही, मस्तूरी के रहने वाले छतराम पाटले ने कलेक्टर और एसपी को दिए शिकायती पत्र में बताया कि उनके बेटे सत्यकुमार को पथरी की शिकायत थी। 28 अप्रैल 2026 को उसे श्री राम केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने भरोसा दिलाया था कि कम खर्च में इलाज हो जाएगा और ऑपरेशन के दूसरे दिन छुट्टी दे देंगे।

30 अप्रैल को ऑपरेशन के बाद सत्यकुमार को जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। उसी दिन सुबह 5 बजे बहू नीतू पाटले का फोन आया। वह रोते हुए बोली कि सत्यकुमार को उल्टियां हो रही हैं, सांस नहीं आ रही, लेकिन नर्स को बुलाने पर भी कोई डॉक्टर देखने तक नहीं आया। पिता जब सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंचे तो बेटे को आनन फानन में आईसीयू ले जाया गया।

इलाज के नाम पर पहले 20 हजार, फिर 45 हजार वसूले

छतराम पाटले का कहना है कि आईसीयू में शिफ्ट करते ही अस्पताल ने 20 हजार रुपये जमा कराने को कहा। जब उन्होंने कहा कि पैकेज में इलाज की बात हुई थी तो स्टाफ ने जवाब दिया कि डिस्चार्ज के समय देना पड़ेगा। पिता ने बेटे की जान बचाने के लिए पैसे जमा कर दिए।
कुछ देर बाद डॉक्टरों ने कहा कि मरीज की हालत बिगड़ रही है, शरीर में इंफेक्शन फैल गया है, डायलिसिस करनी पड़ेगी। इसके लिए 45,000 रुपये की दवाइयां मंगवाई गईं। दोपहर 3:30 बजे सत्यकुमार को डायलिसिस के लिए दूसरे वार्ड में ले गए और 15 से 20 मिनट बाद ही परिवार को बता दिया गया कि उसकी मौत हो चुकी है।
दस्तावेजों में गड़बड़ी का आरोप
पिता ने शिकायत में लिखा है कि मौत के बाद जब उन्होंने इलाज के कागज और मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी मांगी तो अस्पताल ने 3 से 4 घंटे तक टालमटोल की। उनका आरोप है कि इस दौरान असली दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई और नए कागज जोड़े गए। बार बार मांगने पर भी सही जानकारी नहीं दी गई।
घर का इकलौता कमाने वाला था सत्यकुमार
सत्यकुमार अपने परिवार में अकेला कमाने वाला था। उसकी मौत के बाद दो छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। पत्नी नीतू पाटले और बूढ़े माता पिता के सामने अब रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। छतराम पाटले कहते हैं कि यह सिर्फ एक मौत नहीं है, यह पूरे परिवार के सपनों की हत्या है।
प्रशासन से पांच मांगें, नहीं मानी तो धरने की चेतावनी
पीड़ित परिवार ने कलेक्टर बिलासपुर और पुलिस अधीक्षक से पांच मांगें की हैं।
पहली, दोषी डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो।
दूसरी, परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
तीसरी, परिवार के एक सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिले।
चौथी, मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए टीम बनाई जाए।
पांचवी, जिले के सभी अस्पतालों में मेडिकल ऑडिट सिस्टम लागू किया जाए ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।
पत्र के अंत में चेतावनी दी गई है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो शव को नेहरू चौक पर रखकर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इस आवेदन पर ग्राम पंचायत एरमसाही के सरपंच सहित कई ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं। 06 मई 2026 को कलेक्टर कार्यालय में यह शिकायत दर्ज हो चुकी है।
अस्पताल की चुप्पी, पुलिस जांच में जुटी
इस मामले में श्री राम केयर हॉस्पिटल प्रबंधन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। वहीं सिविल लाइन थाना पुलिस ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है। थाना प्रभारी का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
पथरी जैसी आम बीमारी के ऑपरेशन के बाद 24 घंटे के अंदर एक स्वस्थ पुलिस जवान की मौत कैसे हो गई? मरीज की तबीयत बिगड़ने पर 4 घंटे तक कोई सीनियर डॉक्टर क्यों नहीं पहुंचा? पैकेज तय होने के बाद भी बार बार पैसे क्यों मांगे गए? मौत के बाद दस्तावेज देने में इतनी देरी क्यों हुई?
बिलासपुर में यह पहला मामला नहीं है जब निजी अस्पताल पर लापरवाही के आरोप लगे हों। अब देखना यह है कि प्रशासन इस परिवार को न्याय दिला पाता है या नहीं।
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




