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बिलासपुर में ‘शराबबंदी’ नहीं, ‘शराब-दुर्घटना’! 80 की देसी 250 में ब्लैक, काउंटर खाली, आबकारी के ‘साहब’ गायब, कोच्चियों के घर दिवाली

15 दिन से ‘सादा-लाल’ का महा-अकाल, चखना सेंटर बने ‘अघोषित बार’, वायरल वीडियो में खुली लूट, ग्रामीण इलाकों में हाहाकार, अफसरों का फोन ‘आउट ऑफ कवरेज’

बिलासपुर में ‘कोच्चियाराज’ का तांडव: सरकार की नीति फेल, नवनीत तिवारी समेत पूरा महकमा अंडरग्राउंड जनता प्यास से बेहाल

बिलासपुर, 7 मई 2026। छत्तीसगढ़ में शराब के दम पर खजाना भरने का दंभ भरने वाली सरकार के राज में बिलासपुर ‘ब्लैक मार्केट का गढ़’ बन चुका है। पिछले 15 दिन से ऐसा ‘अघोषित ड्राई डे’ चल रहा है कि शहर से गांव तक शराब के लिए हाहाकार मचा है। सरकारी दुकानों के शटर तो उठ रहे हैं पर काउंटर सूखे हैं, और कोच्चियों की पांचों उंगलियां घी में हैं।

1. 80 का पाव, 250 में ‘वीआईपी रेट’: गरीब की जेब में सरकारी डाका  

जो देसी का पाव 80 रुपये में मिलता था, आज वही 200 से 250 रुपये में नीलाम हो रहा है। 120 की गोवा, 160 की झन्नाटा जिलेभर से गायब। मजबूरी में मजदूर-किसान 200 की अंग्रेजी पीकर बजट और कलेजा दोनों जला रहे हैं। ‘सादा कहां मिलेगा’ की टोह में लोग 30-30 किमी बाइक का पेट्रोल फूंक रहे हैं। यानी नशा तिगुना महंगा, सफर का खर्च अलग।

2. ग्रामीण इलाकों में ‘शराब-इमरजेंसी’: मस्तूरी-मल्हार-पचपेड़ी में सबसे बुरा हाल  

शहर में तो फिर भी जुगाड़ चल रहा है, पर ग्रामीण इलाकों में तो ‘कर्फ्यू’ जैसे हालात हैं। मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जोंधरा, भट्टचौरा, जयरामनगर में स्थिति सबसे ज्यादा विस्फोटक है। यहां पिछले 10-12 दिन से सरकारी दुकानें रोज खुल रही हैं, शटर उठ रहा है, स्टाफ बैठ रहा है, पर काउंटर पर ‘स्टॉक खत्म’ का बोर्ड लटका है। 

और इसी का फायदा उठाकर मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जोंधरा, भट्टचौरा, जयरामनगर के चखना सेंटर ‘मिनी बार’ बन गए हैं। सरकारी दुकान में ‘माल नहीं आया’ का बहाना है और चखना सेंटर में 200-250 रुपये पाव का रेट खुलेआम चल रहा है। कोटा, सिरगिट्टी, तिफरा, रतनपुर रोड, सकरी, तोरवा में भी यही ‘स्क्रिप्ट’ चल रही है। कोटा का वायरल वीडियो तो बम फोड़ गया। दुकान खुली है, भीड़ लगी है, पर काउंटर से जवाब मिल रहा “खत्म हो गया”, और बगल के चखना सेंटर से हाथों-हाथ देसी की बिक्री।

3. प्लास्टिक-शीशा का ‘महाभारत’: नीति की लड़ाई में पिस गई जनता की ‘तलब’  

विभागीय सूत्रों ने सनसनीखेज पोल खोली है। सरकार को अचानक ‘पर्यावरण प्रेम’ का दौरा पड़ा और शीशे की जगह प्लास्टिक बोतल में शराब सप्लाई का तुगलकी फरमान जारी कर दिया। लेकिन डिस्टिलरी के गोदामों में शीशे की बोतलों में लाखों लीटर माल पहले से पैक पड़ा सड़ रहा है। नया नियम आया, पुराना स्टॉक फंसा, और सप्लाई की पाइपलाइन ही ब्लास्ट हो गई। 

नतीजा: मस्तूरी से मल्हार तक, पचपेड़ी से जयरामनगर तक, कोटा से सिरगिट्टी तक कहीं एक बूंद नहीं पहुंच रही। कहीं 2-4 पेटी पहुंच भी जाए तो 30 मिनट में ‘हाउसफुल’ का बोर्ड लग जाता है।

4. कोच्चियों का ‘सुपर सिंडिकेट’: आबकारी की छत्रछाया में फल-फूल रहा काला कारोबार  

‘कल से टोटा पड़ जाएगा’ के खौफ से पियक्कड़ खुद ही 5-10 बोतल का स्टॉक कर रहे हैं। इससे किल्लत और भड़की, कोच्चियों के रेट और चढ़े। पक्की खबर है कि मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जोंधरा, भट्टचौरा, जयरामनगर, कोटा, सिरगिट्टी, तिफरा में कोच्चियों का पूरा संगठित गिरोह दिन-दहाड़े ऑपरेट कर रहा है। 80 की बोतल 250 में, वो भी ‘साहब की सेटिंग’ वालों को। बिना आबकारी विभाग की ‘कृपा’ के ये ‘ओपन सीक्रेट’ चलना नामुमकिन है।

5. ‘मिस्टर इंडिया’ बने नवनीत तिवारी: दफ्तर वीरान, मोबाइल स्विच ऑफ, पूरा महकमा अंडरग्राउंड  

इस पूरे ‘शराब-महाघोटाले’ का सबसे काला चेहरा है आबकारी विभाग। सहायक आयुक्त आबकारी नवनीत तिवारी का नाम अब ‘वांटेड’ के पोस्टर जैसा हो गया है। चर्चा सब जगह, पर दर्शन दुर्लभ। दफ्तर जाओ तो कुर्सी खाली, चपरासी बोलता है ‘साहब दौरे पर हैं’। मोबाइल लगाओ तो या तो स्विच ऑफ या घंटी बजकर कट। 

सर्किल इंचार्जों का भी यही ‘स्टेटस’: मस्तूरी सर्किल, कोटा सर्किल, सिरगिट्टी सर्किल, तिफरा सर्किल, तोरवा सर्किल। सबके इंचार्जों के नंबर पर सिर्फ ‘टू-टू’ की आवाज। सप्लाई करने वाली डिस्टिलरी कंपनियों के लोकल मैनेजर भी ऐसे गायब हैं जैसे गधे के सिर से सींग। यानी मस्तूरी से लेकर मल्हार तक, पचपेड़ी से जयरामनगर तक जनता हलक तर करने को तरस रही है और जिम्मेदार ‘भूमिगत’ हो गए।

 राजस्व के नाम पर डकैती, जवाबदेही के नाम पर लुट

सरकार हर साल शराब से 10 हजार करोड़ का टारगेट ठोकती है। लेकिन जब मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जोंधरा, भट्टचौरा, जयरामनगर में 80 की देसी तक नहीं दे पा रही, तो ये वसूली किस मुंह से? एक तरफ प्लास्टिक की नीति का ड्रामा, दूसरी तरफ चखना सेंटरों से खुली ब्लैक की गंगा।

 फिलहाल का क्लाइमेक्स: सरकारी दुकान = खाली शोकेस, कोच्चिया = करोड़पति, नवनीत तिवारी एंड कंपनी = अंडरग्राउंड।

 मस्तूरी, मल्हार, पचपेड़ी, जोंधरा, भट्टचौरा, जयरामनगर, कोटा, सिरगिट्टी, तिफरा की जनता का खुला आरोप है कि यहां चल रहे ‘अघोषित ठेकों’ को आबकारी विभाग का फुल प्रोटेक्शन है। अगर नहीं, तो सहायक आयुक्त नवनीत तिवारी कैमरे के सामने आकर बताएं कि इन इलाकों में छापेमारी कब होगी और 80 वाली देसी कब से मिलेगी?

शराब नीति का ये ‘हैंगओवर’ सरकार और अफसरों दोनों को चुनाव में उल्टी करवा देगा। तब तक बिलासपुर की एक ही चेतावनी: “साहब, या तो बोतल दो, या बोरिया-बिस्तर बांधो।”

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