बलौदाबाजार: सुहेला पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 235 पाव सरकारी शराब के साथ दो तस्कर गिरफ्तार, करही बाजार के ‘शराब माफिया’ पर कब कसेगा शिकंजा?
सरकारी जहर' की होम डिलीवरी! 235 पाव शराब संग धराए प्यादे, करही बाजार के 'शराब किंग' पर मेहरबान कौन?


बलौदाबाजार, छत्तीसगढ़ :- बलौदाबाजार में नशे का खुला खेल जारी है और सरकारी शराब की अवैध बिक्री खुलेआम हो रही है। सुहेला पुलिस ने एक बार फिर ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाते हुए मौत के सौदागरों को रंगे हाथों दबोच लिया। सुहेला-टुण्डा रोड पर फिल्मी स्टंट की तरह घेराबंदी कर दो तस्करों को 235 पाव सरकारी शराब के ‘जखीरे’ के साथ उठा लिया गया। बाइक पर लदी इन बोतलों की कीमत भले 26,280 रुपये हो, मगर इनसे बर्बाद होने वाले घरों की कीमत कोई नहीं चुका सकता।
खाकी का खौफ, मगर ‘आकाओं’ को किसका संरक्षण?
पुलिस को खबर मिली थी कि दो ‘मौत के वाहक’ बाइक पर जहर लेकर निकले हैं। सुहेला थाने की टीम ने पलक झपकते ही चक्रव्यूह रच दिया। जैसे ही तस्कर फंदे में फंसे, खाकी ने उन्हें जमीन सुंघा दी। बोरियों में ठुंसी 235 पाव देशी-अंग्रेजी शराब देखकर पुलिसवालों के भी होश उड़ गए। मोटरसाइकिल समेत पूरा सामान जब्त और दोनों ‘प्यादों’ पर आबकारी एक्ट का चाबुक चला दिया गया।
लेकिन असली खेल तो अब शुरू होता है। पुलिस हर बार छोटे मोहरों को तो पकड़ लेती है, मगर शतरंज के वो ‘बादशाह’ कहां हैं जो इस पूरे खेल को चला रहे हैं?
करही बाजार: ‘ड्राई स्टेट’ का सबसे गीला इलाका, फिर भी रेड क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों की जुबान पर एक ही नाम है – करही बाजार। यह इलाका अवैध शराब का ‘सुपरमार्केट’ बन चुका है। यहां सुबह से लेकर आधी रात तक अवैध बिक्री का दौर चलता है। सरकारी ठेका बंद होने के बाद तो यहां ‘नाइट सर्विस’ शुरू हो जाती है। दोगुने-तिगुने दाम पर सरकारी बोतलें थोक में मिलती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुहेला, लवन में 200 पाव पकड़ने वाली पुलिस की गाड़ी करही बाजार के हाईवे पर क्यों धीमी पड़ जाती है? जो कारोबार दिन के उजाले में धड़ल्ले से चल रहा है, उसके ‘शराब किंग’ पर पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या रसूख की चादर इतनी मोटी है कि कानून की तलवार भी उसे नहीं काट पा रही? चर्चा तो यहां तक है कि बिना ‘ऊपर’ से हरी झंडी मिले, करही बाजार में एक पत्ता भी नहीं हिल सकता।
हर बोतल पर बर्बादी की कहानी, हर घूंट में उजड़ता परिवार
यह सिर्फ शराब नहीं, ‘लिक्विड क्राइम’ है। इसी के नशे में बीवियां पिट रही हैं, बच्चे सड़कों पर भीख मांग रहे हैं, और युवा अपराध की दुनिया में उतर रहे हैं। बलौदाबाजार शहर से सटे करही बाजार के आसपास के दर्जनों गांव इस जहर से तबाह हो चुके हैं। घर-घर में कलह है, हर मोहल्ले में परेशानी है।
आबकारी विभाग बना ‘मूकदर्शक’, जनता पूछे कब टूटेगी चुप्पी?
इस पूरे गोरखधंधे पर लगाम लगाने का जिम्मा आबकारी विभाग का है। करोड़ों का बजट, गाड़ियों का काफिला और अफसरों की फौज होने के बाद भी विभाग ‘गहरी नींद’ में सोया है। अगर पुलिस 235 पाव पकड़ सकती है, तो आबकारी विभाग करही बाजार के उस गोदाम पर छापा क्यों नहीं मारता जहां हजारों पाव का स्टॉक बताया जाता है? जनता का सीधा आरोप है – ‘सब मिलीभगत है’।
अब वक्त आ गया है कि सिर्फ कोचियों की गिरफ्तारी कर जनता को न बहलाया जाए। असली कार्रवाई तब मानी जाएगी जब करही बाजार के उस ‘अड्डे’ पर सख्त कार्रवाई होगी जहां से इस जहर की सप्लाई होती है। जब तक ‘शराब माफिया’ के सरगना को कानून के शिकंजे में नहीं लाया जाएगा, तब तक रोज नए कोचिये पैदा होते रहेंगे और बलौदाबाजार नशे की चपेट में रहेगा।
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




