बिलासपुर में 17 करोड़ का ‘सर्पदंश घोटाला’ बेनकाब, अब ‘लू घोटाले’ का भी खुलासा: 17 FIR दर्ज | MLA सुशांत शुक्ला बोले- ‘दलाल सिंडिकेट को प्रशासन का संरक्षण’
नागलोक जशपुर में 100 से कम मौतें, बिलासपुर में 431 मौतें दर्ज। 2021-24 में लू से 50 मौतों का मुआवजा बांटा गया। राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस के साथ वकील-डॉक्टर भी रैकेट में शामिल।

नागलोक जशपुर में 100 से कम मौतें, बिलासपुर में 431 मौतें दर्ज। 2021-24 में लू से 50 मौतों का मुआवजा बांटा गया। राजस्व, स्वास्थ्य, पुलिस के साथ वकील-डॉक्टर भी रैकेट में शामिल।
बिलासपुर, 21 जून 2026 :- छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सर्पदंश और लू से मौत के नाम पर करोड़ों के मुआवजा घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा विधानसभा में मुद्दा उठाए जाने के बाद मामले में अब तक 17 FIR दर्ज हो चुकी हैं।
‘सर्पदंश घोटाला’: आंकड़ों ने उड़ाए होश
छत्तीसगढ़ में जशपुर जिले को ‘नागलोक’ कहा जाता है, लेकिन मुआवजा वितरण में बिलासपुर सबसे आगे निकला। तुलनात्मक अध्ययन में सामने आया कि सुविधा विहीन जशपुर में सर्पदंश से 100 से कम मौतें हुईं, जबकि सुविधा संपन्न बिलासपुर में यह आंकड़ा 431 तक पहुंच गया। अलग-अलग सालों में 17 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा बांटा गया।
विधायक सुशांत शुक्ला ने इसे पूर्ववर्ती सरकार की “गैर नियंत्रित व्यवस्था” का नतीजा बताया। उन्होंने कहा, “प्रशासन इतना बेलगाम था कि वंचितों के नाम पर व्यापक घोटाला कर दिया गया। राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग की मिलीभगत से यह तांडव चला।”
‘लू घोटाला’: अब नया खुलासा
सर्पदंश के बाद अब लू से होने वाली मौतों पर भी मुआवजे के घोटाले का आरोप लगा है। विधायक सुशांत शुक्ला ने बताया, “जब मैंने विधानसभा में लू के बारे में प्रश्न पूछा तो सिर्फ बिलासपुर, दुर्ग और शक्ति जिले में ही मौतों के आंकड़े बताए गए। यानी प्रदेश में सिर्फ तीन जिलों में ही लू चलती है, यही मौतें होती हैं?”
उन्होंने कहा कि 2021, 2022, 2023 और 2024 में बिलासपुर में लगभग 50 मौतें लू से दर्ज की गई हैं और उनका मुआवजा दिया गया है। विधायक का आरोप है कि यह घोटाला भी “प्रशासनिक अधिकारियों के संरक्षण में सिंडिकेट यानी दलालों के माध्यम से” किया गया है।
कैसे चल रहा था सिंडिकेट
जिला प्रशासन की जांच में 17 प्रकरणों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। आरोप है कि मृतकों के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी राशि निकाल ली गई। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि इस रैकेट में केवल आवेदक ही नहीं, बल्कि कुछ वकील, डॉक्टर और परिजन भी शामिल थे। यानी सरकारी मुआवजे को लूटने के लिए पूरा नेटवर्क काम कर रहा था।
कहां कितनी FIR
पुलिस कार्रवाई के तहत सरकंडा में 5, कोनी में 3, सिविल लाइन में 3, तोरवा में 2 और सिटी कोतवाली में 1 FIR दर्ज की गई है।
“कठोर कार्रवाई से कायम होगी मिसाल” – विधायक
विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि FIR दर्ज होना सिर्फ शुरुआत है। कांग्रेस शासनकाल में हुए इस कथित घोटाले में शामिल अन्य लोगों और संरक्षण देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “बिना प्रशासनिक संरक्षण के इतने बड़े स्तर पर फर्जी प्रमाण पत्र, दस्तावेज और मुआवजा वितरण संभव ही नहीं है। जो-जो आरोपी हैं उनके विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई तय होगी, तब एक मिसाल कायम होगी कि शासन के साथ 420 करने का क्या परिणाम होता है।”
विधायक ने मौजूदा जांच पर असंतोष जताते हुए पूरे मामले की सघन और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पृष्ठभूमि
यह मुद्दा बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने मार्च 2025 में उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी नाराजगी जताते हुए पूरे मामले की जल्द जांच के निर्देश दिए थे। तत्कालीन मंत्री रतनकरम वर्मा ने भी जांच के आदेश दिए थे।
विधायक का दावा है कि जब सिस्टम सो जाता है तो भ्रष्टाचार सिंडिकेट बन जाता है। बिलासपुर में सांप काटने और लू से मौत के नाम पर सरकारी खजाने से लाखों-करोड़ों रुपये निकाले गए, फर्जी दस्तावेज बनते रहे और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे।
(Neeraj Kumar Tiwari (Editor-in-Chief)




