“बेलगहना में सिस्टम ने मारी पलटी: बिना नंबर ट्रैक्टर ने 4 को रौंदा, तहसीलदार-SDM की चुप्पी पर उठे सवाल, अब किसके सिर फूटेगा जिम्मेदारी का ठीकरा?”
बेलगहना लहूलुहान: 'अंधे सिस्टम' की सड़क पर दौड़ा मौत का बिना नंबर ट्रैक्टर, 3 मासूम समेत 4 की सांसें अटकीं, तहसीलदार-SDM अब भी खामोश क्यों?

बिलासपुर/बेलगहना, 11 जून 2026 :- बेलगहना की सड़क पर बुधवार सुबह जो मंजर दिखा, उसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। एक बिना नंबर का जॉन डियर ट्रैक्टर मौत बनकर आया और पलभर में 4 जिंदगियों को अस्पताल की बेड पर ला पटका। इनमें 3 बच्चे हैं जिनकी उम्र 14 साल से भी कम है। गनीमत रही कि कोई जान नहीं गई, वरना आज कंचनपुर गांव से 4 अर्थियां एक साथ उठतीं। लेकिन सवाल ये है कि क्या शासन-प्रशासन की आंखों पर बंधी लापरवाही की पट्टी अब भी नहीं खुलेगी?
वो 30 सेकंड जो बन गए काल
11 जून की सुबह 8:40 बजे। ग्राम कंचनपुर के प्रदीप कुमार उइके अपने साला मुनेश्वर नागेशी और तीन बच्चों, श्रद्धा 14 साल, सिमरन 12 साल, वीरेंद्रप्रताप 9 साल, के साथ पल्सर बाइक CG 10 EB 8171 से पेट्रोल भराने निकले थे। कंचनपुर बाजार चौक मेन रोड पर पहुंचे ही थे कि बछाली की तरफ से आ रहे बिना नंबर के ट्रैक्टर ने सीधी टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक के परखच्चे उड़ गए। चारों लोग सड़क पर गिरे और खून से लथपथ हो गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई। हरेंद्र पन्द्राम समेत गांव वालों ने दौड़कर डायल 112 को बुलाया।
अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग
सभी घायलों को पहले रतनपुर स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत नाजुक देख डॉक्टरों ने तुरंत बिलासपुर रेफर कर दिया। मुनेश्वर की दाहिनी आंख के ऊपर गहरा घाव है, दायां हाथ भी फ्रैक्चर है। 14 साल की श्रद्धा की कमर और पैर में चोट है। 12 साल की सिमरन का सिर फट गया है और पैर में भी चोट आई है। सबसे छोटे 9 साल के वीरेंद्रप्रताप की छाती और सिर में गंभीर चोट है। डॉक्टर कह रहे हैं कि अगर 15 मिनट की भी देरी होती तो बच्चों को बचाना मुश्किल था।


FIR तो दर्ज हो गई, पर असली कहानी तो अब शुरू हुई है
बेलगहना चौकी पुलिस ने ट्रैक्टर चालक करन पोर्ते, निवासी बड़े बरर, के खिलाफ BNS की धारा 281 और 125(क) में अपराध दर्ज कर लिया है। पर ग्रामीणों का गुस्सा सिर्फ ड्राइवर पर नहीं है। उनका कहना है कि ये हादसा नहीं, सिस्टम की हत्या की साजिश है।

बिना नंबर ट्रैक्टर: ये इत्तेफाक नहीं, अवैध रेत का ‘काला खेल’ है
बेलगहना क्षेत्र में पिछले 2 साल से अरपा नदी से अवैध रेत उत्खनन का खेल चल रहा है। दिन हो या रात, सैकड़ों ट्रैक्टर बिना रॉयल्टी पर्ची के रेत ढोते हैं। पकड़े जाने से बचने के लिए इनमें से ज्यादातर ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट ही नहीं होती। गांव-गांव में लोग इन्हें ‘भूतिया ट्रैक्टर’ कहते हैं। आज इसी ‘भूतिया ट्रैक्टर’ ने 4 लोगों को रौंद दिया।

शिकायतों की फाइलें कहां सड़ रही हैं साहब
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आरोप शासन पर है। उनका कहना है कि माइनिंग विभाग को पिछले एक साल में 20 से ज्यादा बार मौखिक और लिखित शिकायत दी गई। तहसीलदार बेलगहना और तहसीलदार कोटा को ज्ञापन सौंपा गया। SDM कोटा से मिलकर फोटो-वीडियो सबूत दिए गए। हर बार जवाब मिला, “जांच कराकर कार्रवाई करेंगे।”
पर कार्रवाई हुई कितनी? जीरो। नतीजा आज सबके सामने है। प्रदीप उइके रोते हुए कहते हैं, “अगर उस दिन साहब लोग एक भी ट्रैक्टर जब्त कर लेते, तो आज मेरे बच्चे अस्पताल में नहीं होते।”
‘ऊपर तक सेटिंग’ है या अफसरों की मजबूरी
बेलगहना में चर्चा आम है कि अवैध रेत के इस खेल में हर महीने की ‘मंथली’ बंधी है। तभी तो खुले मेन रोड पर बिना नंबर के ट्रैक्टर दौड़ते हैं और RTO, पुलिस, माइनिंग, राजस्व विभाग सब आंख मूंद लेते हैं। अब जनता पूछ रही है कि तहसीलदार और SDM की गाड़ी जब इसी सड़क से निकलती है तो क्या उन्हें ये बिना नंबर ट्रैक्टर नहीं दिखते? या देखने के बाद भी ‘नोटों की गर्मी’ से आंखें बंद हो जाती हैं?
अब जनता का सब्र टूट रहा है
इस हादसे के बाद कंचनपुर, बेलगहना, बछाली के ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि ड्राइवर को पकड़ना काफी नहीं है। उन अफसरों पर भी गाज गिरनी चाहिए जिनकी लापरवाही से ये ‘मौत के ट्रैक्टर’ सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
ग्रामीणों की सीधी मांग है कि कलेक्टर बिलासपुर तुरंत तहसीलदार बेलगहना, तहसीलदार कोटा और SDM कोटा को शोकॉज नोटिस दें। पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच हो। दोषी अफसरों को तत्काल सस्पेंड किया जाए। साथ ही 7 दिन के अंदर पूरे क्षेत्र में ‘ऑपरेशन क्लीन’ चलाकर सभी बिना नंबर वाहन जब्त किए जाएं।
चेतावनी भी, गुहार भी
गांव वालों ने दो टूक कहा है कि अगर 7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो नेशनल हाईवे 130 पर चक्काजाम करेंगे। “हम अपने बच्चों की लाशें नहीं देख सकते। अब या तो प्रशासन जागे, वरना जनता खुद सड़क पर उतरेगी।”
एक ड्राइवर की लापरवाही ने 4 घरों के चिराग बुझा दिए। पर उन अफसरों का क्या जो AC कमरों में बैठकर शिकायतों को रद्दी की टोकरी में डाल देते हैं? बेलगहना आज जवाब मांग रहा है। क्या अगली हेडलाइन किसी मासूम की मौत की होगी, तहसीलदार साहब, SDM साहब?
आप क्या कर सकते हैं: अगर आपके इलाके में भी अवैध खनन या बिना नंबर वाहन दिखे तो चुप न रहें। CM हेल्पलाइन 1076 पर कॉल करें। वीडियो बनाकर कलेक्टर बिलासपुर को भेजें। क्योंकि आज प्रदीप का परिवार है, कल आपका हो सकता है।
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




