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“जयरामनगर धान खरीदी केंद्र का खेल: सूतली से सफाई तक जेब से खर्च किया, पैसा आया तो संतोष ने लूटा – बैंक मैनेजर भी शक के घेरे में, 44 दिन से इंसाफ को तरस रहा पीड़ित”

जयरामनगर धान खरीदी केंद्र प्रभारी ने काम किया सूतली, तारपोलीन, चौकीदारी, फड़ सफाई का खर्च, शासन ने भेजा पैसा तो प्रबंधक संतोष ने मार ली बाजी बैंक मैनेजर सुशील पनौरे की भूमिका भी संदिग्ध, बिलासपुर में 44 दिन से इंसाफ को तरस रहा पीड़ित

जयरामनगर समिति प्रबंधक संतोष पर गबन का आरोप, बैंक मैनेजर सुशील पनौरे पर भी गुमराह करने का शक — 3 दिन में जांच का आदेश, 36 दिन बाद भी रिपोर्ट नहीं, पीड़ित बोला ‘डिप्रेशन में हूं’

बिलासपुर, जयरामनगर :-  खरीफ वर्ष 2025-26 में 69,490 क्विंटल धान खरीदी करने वाले जयरामनगर सेवा सहकारी समिति पं.क्र. 3089 के प्रभारी वीरेंद्र टंडन को आज तक ‘सुरक्षा भंडारण एवं प्रासंगिक व्यय’ की राशि नहीं मिली। कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत के 44 दिन और उप आयुक्त सहकारिता के 3 दिन में जांच पूरी करने के आदेश के 36 दिन बाद भी न जांच पूरी हुई, न भुगतान मिला। आरोप है कि संस्था प्रबंधक संतोष ने पूरी राशि निकाल ली और बैंक मैनेजर सुशील पनौरे द्वारा भी मामले को गुमराह किया जा रहा है।

 मामले के 3 अहम दस्तावेज: जो खोल रहे हैं लापरवाही की पोल

 (1). कलेक्टर को पहला आवेदन: 24 फरवरी 2026

  वीरेंद्र टंडन पिता धनसाय टंडन ने कलेक्टर बिलासपुर को आवेदन देकर बताया कि उन्होंने कुल 69,490.00 क्विंटल धान की खरीदी की और पूरा परिवहन भी हो चुका है। सूतली, तारपोलीन, चौकीदारी, फड़ सफाई आदि पर खुद खर्च की गई राशि शासन से आ चुकी है, लेकिन संस्था प्रबंधक ने भुगतान नहीं किया। जनदर्शन टोकन क्रमांक 2070126000835, सुरक्षा क्रमांक 335 जारी हुआ।

 (2) उप आयुक्त का सख्त जांच आदेश: 02 मार्च 2026

  कलेक्टर जनदर्शन से शिकायत पहुंचने पर उप आयुक्त सहकारिता ने पत्र क्रमांक/उपवि/जनदर्शन/2026/321 दिनांक 02/03/2026 जारी किया। सहकारिता विस्तार अधिकारी मस्तुरी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि “उक्त विषय की जाँच कर स्पष्ट अभिमत के साथ प्रतिवेदन 03 दिवस के भीतर कार्यालय में प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें।”

 (3) 44 दिन बाद भी हालात जस के तस: न जांच, न भुगतान

  कलेक्टर को आवेदन दिए 44 दिन और उप आयुक्त का आदेश जारी हुए 36 दिन बीत चुके हैं। 3 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश था, लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट लंबित है। भुगतान के अभाव में प्रभारी भटकने को मजबूर है।

 पीड़ित का दर्द: ‘पैसा मांगा तो घुमाता है डिप्रेशन में हूं

वीरेंद्र टंडन (मो. 8959781153) ने बताया, “खरीदी से लेकर परिवहन तक सारा काम मैंने किया। सूतली वाले, चौकीदार और सफाई मजदूर रोज पैसे के लिए फोन कर रहे हैं। संस्था प्रबंधक संतोष को बोला तो साफ कहता है ‘जो करना है कर लो, पैसा नहीं दूंगा’। मैं बहुत डिप्रेशन में हूं।”

 वीरेंद्र का आरोप है कि जांच की जिम्मेदारी सहकारिता विभाग को सौंपी गई थी, पर 2 महीने में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रबंधक संतोष कार्यालय से नदारद रहते हैं, जिससे किसानों के केसीसी और खाद वितरण का काम भी पूरी तरह ठप पड़ा है।

  बैंक की भूमिका पर भी उठे सवाल: 19 लाख निकालने की सूचना, मैनेजर सुशील पनौरे पर गुमराह करने का आरोप

 पीड़ित का कहना है कि शासन से राशि जारी होने के बावजूद भुगतान नहीं हो रहा। सूत्रों के अनुसार संस्था प्रबंधक संतोष द्वारा बैंक से करीब 19 लाख रुपए निकाल लिए गए हैं, जिसका मामला सामने आया है। आशंका है कि बैंक मैनेजर सुशील पनौरे द्वारा भी मामले में गुमराह किया जा रहा है। बिना प्रबंधक और बैंक की मिलीभगत के इतनी बड़ी राशि का गबन संभव नहीं। इस बिंदु की भी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

मामले का पूरा लेखा-जोखा एक नजर में प्रशासन से 4 बड़े सवाल, जिनके जवाब बाकी हैं  

उप आयुक्त के 3 दिन में जांच के स्पष्ट आदेश के 36 दिन बाद भी रिपोर्ट क्यों नहीं आई?  

जांच में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी सुश्री गोधुलि वर्मा पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?  

69 हजार क्विंटल धान की खरीदी करने वाले सरकारी प्रभारी को ही भुगतान के लिए दर-दर भटकना क्यों पड़ रहा है?  

संस्था प्रबंधक संतोष और बैंक मैनेजर सुशील पनौरे की भूमिका की जांच कर गबन के आरोप में कार्यवाही क्यों नहीं की गई?

 पीड़ित की मांग: दोषियों पर हो तत्काल कार्रवाई 

 पीड़ित वीरेंद्र टंडन ने कलेक्टर बिलासपुर से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि राशि गबन के आरोपी संस्था प्रबंधक संतोष, संदिग्ध भूमिका वाले बैंक मैनेजर सुशील पनौरे और जांच में लेटलतीफी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही बकाया राशि का तत्काल भुगतान कराया जाए, ताकि मजदूरों-चौकीदारों को उनका मेहनताना मिल सके।

 नोट: पीड़ित के पास कलेक्टर को दिया गया मूल आवेदन, जनदर्शन की पावती, उप आयुक्त का सील-साइन युक्त आदेश पत्र तीनों दस्तावेज सुरक्षित हैं।

(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)

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