बिलासपुर: मस्तूरी थाना से 500 मीटर दूर चल रहा चोरी के कबाड़ का ‘काला कारोबार’, जनता ने पूछा- पुलिस कब जागेगी?
थाने से 500 कदम दूर 'चोर बाजार' गुलज़ार, मस्तूरी पुलिस कब जागेगी?

बिलासपुर/मस्तूरी, 29 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मस्तूरी थाना से महज 500 मीटर की दूरी पर मल्हार रोड स्थित अवैध कबाड़ की दुकानें इन दिनों चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां कागज, प्लास्टिक और गत्ते की आड़ में चोरी के लोहे, तांबे और बिजली के तारों की खुलेआम खरीद-फरोख्त हो रही है।
क्या है पूरा मामला
मस्तूरी-मल्हार मुख्य मार्ग पर संचालित इन कबाड़ दुकानों को लेकर क्षेत्रवासियों का दावा है कि पिछले 4-5 महीनों से इलाके में चोरी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। बाइक, पानी के पंप, खेतों से ट्रांसफार्मर का सामान और घरों से लोहे का स्क्रैप चोरी होने के बाद सीधे इन्हीं दुकानों पर खपाया जा रहा है। लोगों का कहना है कि रात 9 बजे के बाद यहां संदिग्ध वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है।
शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
ग्रामीणों के अनुसार, इस मामले में तीन बार लिखित शिकायत मस्तूरी थाना और एसडीएम कार्यालय में दी जा चुकी है। हर बार पुलिस टीम ने मौका मुआयना किया, लेकिन ठोस कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हुई। न तो दुकानों के लाइसेंस चेक किए गए, न ही स्टॉक का रजिस्टर मांगा गया।
स्थानीय लोगों का आरोप
थाने की नाक के नीचे धंधा: इतने पास अवैध कारोबार चलना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
चोरों का सेफ जोन: चोरी का माल बेचने वालों के लिए यह जगह सबसे आसान ठिकाना बन गई है।
असामाजिक तत्वों का जमावड़ा: कबाड़ दुकानों के आसपास शाम के बाद नशेड़ियों की भीड़ बढ़ जाती है, जिससे महिलाओं का निकलना मुश्किल हो गया है।
प्रशासन को अल्टीमेटम
मस्तूरी के नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिन के भीतर इन अवैध दुकानों को सील कर संचालकों पर एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वे बिलासपुर कलेक्टर और एसपी कार्यालय के सामने धरना देंगे। लोगों की मांग है कि कबाड़ विनियमन अधिनियम के तहत सभी दुकानों की जांच हो और चोरी का माल बरामद किया जाए।
पुलिस का पक्ष
इस मामले में मस्तूरी थाना प्रभारी से संपर्क किया गया, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
सबसे बड़ा सवाल
जब थाना महज 500 मीटर दूर है, तो इतने बड़े स्तर पर अवैध कबाड़ का कारोबार किसकी शह पर चल रहा है? क्या इस बार प्रशासन सख्ती दिखाएगा या फिर मामला पहले की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?




