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रायगढ़ में फिर मातम: 4 माह के हाथी के बच्चे की संदिग्ध मौत, बीमार होने की आशंका, लैलूंगा रेंज में 13 हाथियों के दल पर वन विभाग की पैनी नजर

रायगढ़ में फिर टूटा जंगल का दिल: 4 महीने के नन्हे हाथी की संदिग्ध मौत, 13 हाथियों के दल पर वन विभाग की निगरानी

रायगढ़, छत्तीसगढ़ | 23 अप्रैल 2026 छत्तीसगढ़  रायगढ़ जिले से एक बार फिर इंसान-हाथी संघर्ष की दुखद खबर सामने आई है। धरमजयगढ़ वन मंडल के लैलूंगा रेंज में एक 4 माह के हाथी के बच्चे का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया है। शुरुआती तौर पर बच्चे की मौत बीमारी के चलते होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद से वन विभाग की टीम अलर्ट पर है और पूरे मामले की गहन जांच कर रही है

क्या है पूरा मामला? 

स्थान :- लैलूंगा रेंज के अंतर्गत आमापाली बीट के 176 आरएफ, चिलकागुड़ा के पास एक टिकरा 

घटना: वन विभाग की ट्रैकिंग टीम को बुधवार सुबह गश्त के दौरान हाथी के बच्चे का शव मिला

दल की स्थिति: इस इलाके में पिछले कई दिनों से 13 हाथियों का एक दल विचरण कर रहा है। दल में 1 नर, 7 मादा और 5 बच्चे शामिल थे। मृत बच्चा भी इसी दल का हिस्सा था।

उम्र और स्थिति: मृत हाथी के बच्चे की उम्र करीब 4 माह बताई जा रही है। वन कर्मियों के मुताबिक वह पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहा था।

वन विभाग की कार्रवाई

सूचना और पोस्टमार्टम: शव मिलने के तुरंत बाद टीम ने वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। शव का पोस्टमार्टम करा लिया गया है।

जांच जारी: वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल बीमारी को मुख्य वजह माना जा रहा है, लेकिन अन्य पहलुओं से भी जांच की जा रही है।

दल पर निगरानी: घटना के बाद भी 13 हाथियों का दल उसी इलाके में मौजूद है। वन विभाग की टीम लगातार दल की गतिविधियों पर नजर रख रही है ताकि कोई और अनहोनी न हो।

पृष्ठभूमि 

रायगढ़ और आसपास के जिले हाथी प्रभावित क्षेत्रों में आते हैं। धरमजयगढ़ वन मंडल में हाथियों की अच्छी-खासी मौजूदगी रहती है। बीते कुछ सालों में भोजन-पानी की तलाश में भटकते हाथियों के दल और उनके बच्चों की मौत की घटनाएं सामने आती रही हैं। इससे पहले भी बीमारी, करंट या अन्य कारणों से हाथियों की मौत की खबरें आ चुकी हैं।

अब आगे क्या 

फिलहाल वन विभाग पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। साथ ही दल के बाकी सदस्यों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।

यह घटना एक बार फिर मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व और जंगली हाथियों के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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