रायगढ़ के धनागर में मौत की फैक्ट्री का पर्दाफाश: चायपत्ती और स्प्रिट से बन रही थी ब्रांडेड शराब, 869 बोतलें जब्त, जानिए असली-नकली की पहचान
रायगढ़ से जांजगीर तक फैला था मौत का कारोबार: ब्रांडेड बोतल में जहर बेचने वाले सावधान, अगला नंबर आपका हो सकता है

छत्तीसगढ़ रायगढ़ :- रायगढ़ पुलिस ने नकली शराब के एक ऐसे खतरनाक नेटवर्क को बेनकाब किया है जो ब्रांडेड बोतलों में जहर भरकर लोगों की जिंदगी से खेल रहा था। ऑपरेशन आघात के तहत कोतरारोड़ थाना क्षेत्र के ग्राम धनागर में हुई इस कार्रवाई ने सबको चौंका दिया है। यहां रेड लेबल चायपत्ती और इंडस्ट्रियल स्प्रिट मिलाकर रॉयल स्टेज, ब्लैक डॉग, किंगफिशर और आईबी जैसी महंगी शराब तैयार की जा रही थी।
ऐसे खुली नकली शराब के धंधे की पोल
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह को मुखबिर से पक्की खबर मिली थी कि धनागर निवासी दुष्यंत पटेल उर्फ पप्पू अपने घर से ही नकली शराब की फैक्ट्री चला रहा है। पुलिस ने पहले पूरी तस्दीक करना जरूरी समझा। एक प्वाइंटर को सादे कपड़ों में ग्राहक बनाकर दुष्यंत के पास भेजा गया। उसने 500 रुपये में रॉयल स्टेज की सील पैक बोतल खरीदी। जब उस बोतल को जांच के लिए खोला गया तो सारा खेल सामने आ गया। होलोग्राम डुप्लीकेट निकला, लेबल की प्रिंटिंग धुंधली थी, और शराब से स्प्रिट जैसी तेज, चुभने वाली गंध आ रही थी। पुष्टि होते ही आबकारी और पुलिस की संयुक्त टीम ने आधी रात को दुष्यंत के ठिकाने पर धावा बोल दिया।

ठिकाने से निकला जहर का पूरा कारखाना
छापेमारी की भनक लगते ही एक आरोपी दीवार फांदकर अंधेरे में भाग निकला। लेकिन मुख्य सरगना दुष्यंत पटेल पुलिस के हत्थे चढ़ गया। जब उसके घर के पीछे बने कोठे का ताला तोड़ा गया तो वहां का नजारा देखकर टीम के अफसर भी दंग रह गए। पूरा कोठा एक मिनी फैक्ट्री में बदला हुआ था।
वहां से पुलिस ने 869 नग छोटी-बड़ी बोतलों में करीब 240 लीटर तैयार नकली शराब बरामद की। इसके अलावा 560 नए ढक्कन, स्प्रिट से भरे तीन बड़े ड्रम, शराब मिलाने के लिए स्टील की बड़ी केटली, पाइप, कीप और सैकड़ों की संख्या में रॉयल स्टेज, ब्लैक डॉग, गोवा की खाली बोतलें मिलीं। सबसे खतरनाक बात यह थी कि वहां नकली लेबल और होलोग्राम के बंडल भी रखे थे। जब्त सामान की कुल कीमत 2,16,245 रुपये आंकी गई है।

चाय की पत्ती से बनता था ‘ब्रांडेड’ नशा: आरोपी ने खोला राज
गिरफ्तारी के बाद दुष्यंत पटेल टूट गया और उसने पूरे गोरखधंधे का कच्चा चिट्ठा खोल दिया। उसने बताया कि वह यह काम कोरोना काल यानी 2020 से कर रहा था। इस धंधे में उसका सगा भाई सुभाष पटेल और साथी विनय सिंह भी बराबर के हिस्सेदार थे।
इनका तरीका बेहद शातिर था:
कच्चा माल: ये लोग अरुणाचल प्रदेश, झारखंड और छत्तीसगढ़ से कम डिग्री वाली सस्ती शराब टैक्स बचाकर मंगाते थे।
मिलावट: उस शराब में इंडस्ट्रियल ग्रेड स्प्रिट और पानी मिलाकर मात्रा दोगुनी कर दी जाती थी। स्प्रिट से नशा तेज हो जाता था।
रंग और स्वाद: रेड लेबल चायपत्ती को खूब उबालकर गाढ़ा काढ़ा बनाया जाता था। उसी काढ़े को मिलाकर शराब का रंग हूबहू असली ब्रांडेड शराब जैसा भूरा कर दिया जाता था। चायपत्ती की कड़वाहट से असली शराब वाला टेस्ट भी आ जाता था।
पैकिंग: कबाड़ियों से 10 से 20 रुपये में महंगे ब्रांड की खाली बोतलें खरीदी जाती थीं। उन्हें धोकर, उनमें यह जहरीली शराब भरी जाती थी।
फाइनल टच: रायगढ़ और बिलासपुर की लोकल प्रिंटिंग प्रेस से छपवाए गए नकली लेबल और होलोग्राम चिपकाकर बोतल को सील पैक कर दिया जाता था।
सप्लाई: तैयार माल को गांव-गांव में फैले कोचियों के नेटवर्क के जरिए खपाया जाता था। कोचिये इसे बाजार से 100 से 200 रुपये सस्ता बताकर बेचते थे। लोग सस्ते के लालच में जहर खरीद लेते थे।
इसी फैक्ट्री से चलता था आसपास के जिलों में सप्लाई का खेल
पूछताछ में एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ कि धनागर की यह फैक्ट्री सिर्फ रायगढ़ तक सीमित नहीं थी। यहां बनी नकली शराब को कोचियों और पिकअप वाहनों के जरिए आसपास के कई जिलों में सप्लाई किया जाता था। पुलिस की जांच में सामने आया कि जांजगीर-चांपा, कोरबा, बिलासपुर, सक्ती और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों के ग्रामीण इलाकों में इस फैक्ट्री का माल खपाया जा रहा था। त्योहार और शादी के सीजन में डिमांड बढ़ने पर रातोंरात गाड़ियां भरकर माल भेजा जाता था। कई बार ओडिशा सीमा से लगे इलाकों में भी यह नकली शराब पहुंचाई गई। आरोपी ने कबूला कि बिलासपुर जशपुर और महासमुंद के कुछ कोचियों से भी उसका संपर्क था।
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होलोग्राम का 3D टेस्ट: छत्तीसगढ़ की असली बोतल पर लगे होलोग्राम को टेढ़ा करके देखें। उसमें तिरंगे के तीन रंग और ‘GOVT OF CG’ लिखा हुआ नजर आएगा। नकली स्टिकर हिलाने पर कलर नहीं बदलेगा।
लेबल को रगड़ें: असली लेबल की प्रिंटिंग हाई क्वालिटी की होती है। नकली लेबल को नाखून से रगड़ने पर उसकी स्याही निकलने लगती है।
ढक्कन की ‘कट’ आवाज: असली सील पैक बोतल को पहली बार खोलने पर ‘टक’ की आवाज के साथ सील टूटती है। नकली बोतल का ढक्कन अक्सर पहले से ढीला होता है या स्मूथली खुल जाता है।
बोतल के नीचे लेजर कोड: हर असली बोतल के नीचे लेजर से बैच नंबर, तारीख और समय उकेरा होता है जिसे मिटाया नहीं जा सकता। नकली में यह कोड या तो होता ही नहीं या फिर प्रिंट किया हुआ होता है।
बुलबुलों का खेल: बोतल को तेज से उल्टा करके सीधा करें। असली शराब में छोटे-छोटे बुलबुले बनते हैं जो धीरे-धीरे ऊपर जाकर खत्म होते हैं। नकली शराब में बड़े बुलबुले बनते हैं जो तुरंत फूट जाते हैं।
सिर्फ गंध से पहचान: असली शराब की एक खास महक होती है। नकली शराब खोलते ही उसमें नेल पॉलिश रिमूवर या केरोसिन जैसी बहुत तेज और आंखों में जलन करने वाली गंध आती है।
बिल है सबसे बड़ा सबूत: हमेशा आबकारी विभाग की लाइसेंसी दुकान से ही शराब खरीदें और कंप्यूटर वाला बिल जरूर लें। ठेले, ढाबे या किसी व्यक्ति से सस्ती शराब कभी न खरीदें।
अब क्या होगा
मामले में थाना कोतरारोड़ में आरोपी दुष्यंत पटेल उर्फ पप्पू, सुभाष पटेल एवं विनय ठाकुर के विरुद्ध धारा 61(2), 336(3), 336(4), 340(2), 275 भारतीय न्याय संहिता तथा आबकारी अधिनियम की धारा 34(2), 36-च 34(1)(क)(ख) एवं 59-क के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है। गिरफ्तार आरोपी दुष्यंत पटेल उर्फ पप्पू पिता पुरुषोत्तम पटेल, उम्र 47 वर्ष, निवासी ग्राम धनागर, थाना कोतरारोड़ को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
फिलहाल मुख्य आरोपी दुष्यंत पटेल को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। उसके भाई सुभाष पटेल और विनय सिंह फरार हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में जांजगीर, कोरबा और बिलासपुर में भी दबिश दे रही हैं। तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और आबकारी अधिनियम की संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने दो टूक कहा कि यह कार्रवाई एक संदेश है। रायगढ़ में अवैध शराब का कारोबार करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। पूरे नेटवर्क की एक-एक कड़ी को तोड़कर सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। अब दूसरे जिलों में फैले इनके नेटवर्क पर भी कार्रवाई होगी।
जनता से अपील: नकली शराब में मेथेनॉल नाम का जहर होता है। इसके 30 मिलीलीटर पीने से भी इंसान अंधा हो सकता है या उसकी मौत हो सकती है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही पूरे परिवार को बर्बाद कर सकती है। अगर आपके आसपास कहीं भी नकली शराब बिक रही है तो तुरंत पुलिस हेल्पलाइन 112 या आबकारी कंट्रोल रूम 0771-2234567 पर सूचना दें। आपकी पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी।
(Neeraj Kumar Tiwari, Editor-in-Chief)




