डूडगा में राशन दुकान पर बड़ा ‘फर्जीवाड़ा’ उजागर: एक समूह, दो अध्यक्ष, दो पंजीयन से उठा रहे सरकारी लाभ! SDM की जांच टीम गठित, मानवाधिकार ट्रस्ट की मंजू लता टंडन ने खोला मोर्चा
डूडगा में राशन दुकान पर बड़ा ‘फर्जीवाड़ा’ उजागर: एक समूह, दो अध्यक्ष, दो पंजीयन से उठा रहे सरकारी लाभ! SDM की जांच टीम गठित, मानवाधिकार ट्रस्ट की मंजू लता टंडन ने खोला मोर्चा

जांजगीर-चांपा/पामगढ़: सरकारी योजनाओं में ‘डबल डोज’ का खेल अब डूडगा में बेनकाब होता दिख रहा है। ग्राम पंचायत डूडगा की शासकीय उचित मूल्य की दुकान पर गड़बड़ी का सनसनीखेज आरोप लगा है। भारतीय मानवाधिकार ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष (महिला मोर्चा) मंजू लता टंडन ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि यहां एक ही समूह के नाम पर दो-दो अध्यक्ष और दो पंजीयन का खेल चल रहा है।
क्या है ‘एक नाम-दो फायदे’ का फॉर्मूला?
सुहावन बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित डूडगा की लिखित सूचना ने मामले में आग में घी डाल दिया। आरोप है कि चंदा महिला स्व सहायता समूह डूडगा एक नाम से दो बार रजिस्टर्ड है। कमाल देखिए कि इसी एक समूह के बैनर तले पैठु तालाब की मछली पालन लीज अध्यक्ष कुंती बाई चला रही हैं, तो वहीं गांव की सरकारी राशन दुकान अध्यक्ष कमला बाई के हवाले है। नाम एक, कुर्सी दो, और सरकारी योजनाओं का लाभ भी डबल!
इस ‘जुगाड़’ के खिलाफ मंजू
लता टंडन ने अनुविभागीय अधिकारी पामगढ़ के दफ्तर का दरवाजा खटखटाया और ज्ञापन सौंपकर तुरंत जांच की मांग कर दी। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासन भी हरकत में आया।
एसडीएम का एक्शन: जांच टीम मैदान में

शिकायत को गंभीर मानते हुए एसडीएम पामगढ़ ने 30 मार्च 2026 को आदेश क्रमांक 630 जारी कर तीन अफसरों की जांच टीम मैदान में उतार दी। टीम को 10 अप्रैल 2026 तक दूध का दूध और पानी का पानी कर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
कौन-कौन है जांच टीम में: शिकायत में क्या है दम?
आवेदक माधोराम पुरे, अध्यक्ष एवं सचिव, सुहावन बहु. सह. समिति मर्या. डुडगा का आरोप है कि चंदा महिला समूह ने दो पंजीयन और दो अध्यक्ष बनाकर नियमों को ठेंगा दिखाया है। मांग साफ है: जांच कर दोषी पाए जाने पर उचित मूल्य दुकान का आवंटन निरस्त हो और कड़ी कार्रवाई की जाए।
एसडीएम आदेश की कॉपी से बड़ा खुलासा:
न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (रा.) पामगढ़ के 30/03/2026 के आदेश में साफ लिखा है कि शिकायत विचाराधीन है और जांच दल को 10/04/2026 से पहले अभिमत सहित स्पष्ट प्रतिवेदन देना है। आदेश की प्रतिलिपि आवेदक माधोराम पुरे और चंदा महिला समूह दोनों को भेजी गई है।
अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर
सवाल बड़ा है: क्या वाकई एक ही समूह दो नामों से सरकारी योजनाओं की मलाई खा रहा था? अगर जांच में आरोप सही निकले तो राशन दुकान किसके हाथ से जाएगी और किस पर गाज गिरेगी? फिलहाल डूडगा की सियासत गर्म है और पूरा गांव 10 अप्रैल की तारीख का इंतजार कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा कि यह ‘प्रशासनिक चूक’ थी या ‘सोची-समझी साजिश’।




