पंडरा पथरा बना ‘गड्ढा पुर’: ठेकेदार की मनमानी से मौत को दावत देती सड़क, रिश्ते भी तोड़ रही विकास की ये ‘अधूरी लकीर’!
सड़क नहीं, मौत का गड्ढा: पंडरा पथरा में ठेकेदार की मनमानी से थमी विकास की रफ्तार, दूल्हा-दुल्हन भी करने लगे किनारा!"

बिलासपुर के कोटा में 300 मीटर सड़क के लिए तरसे ग्रामीण, 200 मीटर की ‘खैरात’ पर भड़का गुस्सा | कीचड़-गड्ढों से रोज हो रहे हादसे, रिश्ते टूटने की कगार पर | नेताओं के वादे हुए हवा-हवाई, अब सरपंच और मंडी बोर्ड के भरोसे गांव

बिलासपुर/कोटा | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ये कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं — जहां हीरो यानी ‘विकास’ विलेन ‘ठेकेदार की मनमानी’ के आगे घुटने टेक चुका है। बिलासपुर जिले के कोटा जनपद का ग्राम पंचायत पंडरा पथरा आज ‘अधूरी सड़क’ का पर्याय बन गया है। सदी भर के इंतजार के बाद मिली सौगात को ठेकेदार ने बीच मझधार में ही छोड़ दिया, और अब पूरा गांव कीचड़, गड्ढों और हादसों के दलदल में धंसता जा रहा है।

हर कदम पर मौत का खतरा
हालात ये हैं कि पंडरा पथरा की सड़क अब ‘रोड’ कम ‘रोडा’ ज्यादा लगती है। बाइक सवार सुबह घर से निकलते हैं तो घरवाले भगवान से मनौती मांगते हैं। बरसात में तो ये सड़क किसी ‘मड रेसलिंग एरेना’ में बदल जाती है — फिसलना, गिरना, और अस्पताल पहुंचना यहां आम बात हो गई है। ग्रामीण बताते हैं कि बीते 6 महीनों में दो दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं, लेकिन फाइलों में ‘सब ठीक है’ का ठप्पा लगा हुआ है।

ठेकेदार की ‘तुगलकी’ मनमानी
ग्रामीणों का सीधा आरोप है — “ठेकेदार साहब को न शासन का डर, न प्रशासन की परवाह।” काम शुरू किया, आधा-अधूरा छोड़कर चलते बने। रमेश नेताम उर्फ पिंटू का पारा सातवें आसमान पर है। कहते हैं, “मांगा था 300 मीटर, मिला 200 मीटर का लॉलीपॉप। ये विकास है या मजाक?” सवाल ये भी है कि जब टेंडर पूरा था तो सड़क आधी कैसे हो गई? जवाब देने वाला कोई नहीं।

नेताओं की ‘वादों की बारात’, गांव अब भी कुंवारा
इस सड़क को लेकर नेताओं की लिस्ट किसी VIP गेस्ट लिस्ट से कम नहीं — अजीत जोगी से लेकर अरुण साव, तोखान साहू, अटल श्रीवास्तव और रेणु जोगी तक। सब आए, माइक पकड़ा, ‘जल्द बन जाएगी’ का नारा लगाया और चलते बने। ग्रामीण अब तंज कसते हैं — “नेता जी के वादे और ठेकेदार का काम, दोनों अधूरे हैं।”

अब तो शहनाई भी खामोश होने लगी!
सड़क की दुर्दशा ने अब गांव की इज्जत पर भी दाग लगा दिया है। राजेश विग ‘बबलू’ का दर्द छलक पड़ा: “लड़की वाले आते हैं, सड़क देखते हैं और रिश्ता कैंसिल। कहते हैं — जहां बारात नहीं पहुंच सकती, वहां बेटी कैसे भेजें?” आलम ये है कि गांव के कई युवाओं की शादी अटकी पड़ी है। सड़क नहीं बनी तो रिश्ते भी नहीं बन रहे।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
राजा प्रजापति, संजू यादव, सुनील यादव, अनीस — सबके सबूत एक ही हैं: “सिर्फ कागज दौड़ रहे हैं, सड़क नहीं।” वर्षों से ज्ञापन, आवेदन, निवेदन सब बेकार। अब ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटने वाला है।
उम्मीद की आखिरी किरण
इधर, सरपंच स्वेता मनोज ध्रुव ने मोर्चा संभाला है। उनका दावा है कि मंडी बोर्ड से 200 मीटर सड़क की हरी झंडी मिल गई है, बाकी के लिए ‘प्रक्रिया जारी’ है। मंडी विभाग के इंजीनियर भी सुर में सुर मिला रहे हैं — “ठेकेदार से बात हो गई है, अगले हफ्ते से काम शुरू।”
वहीं कांग्रेस जिला सचिव रामचंद्र गंधर्व ने बताया कि पूर्व पर्यटन मंडल अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव को ज्ञापन देने के बाद ही स्वीकृति मिली है। अब विभाग भी ‘जल्द शुरू’ का राग अलाप रहा है।
सवाल अब भी जिंदा है
सड़क कब बनेगी? क्या 200 मीटर से गांव का दर्द खत्म होगा? क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी? या फिर ये ‘जल्द’ भी सरकारी फाइलों में दम तोड़ देगा?
फिलहाल पंडरा पथरा इंतजार में है…
सड़क अधूरी है… और विकास आज भी कोटा से बिलासपुर के बीच किसी फाइल में अटका पड़ा है।
जब तक सड़क नहीं बनती, ये खबर आग की तरह फैलनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ गड्ढों का नहीं, सिस्टम के रवैये का है।




