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“बिलासपुर जिले की तखतपुर-सकरी तहसील में नियमों की धज्जियां: ग्राम बोड़सरा में ऑफलाइन डायवर्सन से भ्रष्टाचार का खेल, साय सरकार की जीरो टॉलरेंस पर सवाल”

"ऑनलाइन सिस्टम को लगाया ताला, ऑफलाइन 'खेल' में माला-माल!" तखतपुर-सकरी में डायवर्सन का डर्टी गेम: नियम ताक पर, जेबें गर्म, साय सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' पर सवाल

बिलासपुर/तखतपुर: सुशासन का ढोल पीटने वाली साय सरकार के नाक के नीचे बिलासपुर जिले की तखतपुर-सकरी तहसील में भ्रष्टाचार का ‘ऑफलाइन बाजार’ धड़ल्ले से चल रहा है। जहां पूरे प्रदेश में भूमि डायवर्सन और पुनः निर्धारण का काम पारदर्शिता के नाम पर ऑनलाइन कर दिया गया, वहीं यहां बाबुओं ने सिस्टम को ही बायपास कर दिया। ‘ऑनलाइन’ को ताला और ‘ऑफलाइन’ को बना दिया कमाई का जाला!

क्या है पूरा ‘खेल’? बिंदुवार समझिए

1. नियमों को ठेंगा, ऑफलाइन आदेश का धंधा  

ताजा मामला ग्राम बोड़सरा, प.ह.नं. 37 का है। यहां खसरा नंबर 455/4 की 2720 वर्गफीट भूमि का पुनः निर्धारण आवासीय प्रयोजन के लिए कर दिया गया। कमाल देखिए – ये पूरा आदेश अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व कार्यालय से ऑफलाइन जारी हुआ। प्रीमियम से लेकर विकास उपकर, पर्यावरण उपकर, पंचायत उपकर तक सब तय कर दिया गया… पर सब कुछ ‘कागजी सेटिंग’ से!

2. ऑनलाइन का राज, ऑफलाइन में काज  

सवाल सीधा है – जब शासन ने घोटाले रोकने के लिए ऑनलाइन सिस्टम अनिवार्य किया, तो तखतपुर-सकरी में किस ‘ऊपर वाले’ के आशीर्वाद से ऑफलाइन फाइलें दौड़ रही हैं? राजस्व के जानकार बताते हैं – ऑफलाइन मतलब हेराफेरी का खुला मैदान। दस्तावेज बदलो, नियम मोड़ो, और ‘सेटिंग’ से सब ओके कर दो।

3. ‘डबल रेट’ का खुला खेल  

सूत्रों की मानें तो यहां ‘रेट कार्ड’ ही अलग है। आवेदकों से सामान्य शुल्क से डबल वसूली का आरोप है। छोटे रकबे की फाइल दबा दो, बड़े रकबे को ‘विशेष कृपा’ से पास कर दो। मतलब जितना बड़ा प्लॉट, उतनी बड़ी ‘दक्षिणा’!

4. आदेश में लिखी शर्त, जमीन पर ‘शॉर्टकट’  

आदेश में साफ लिखा है – “भूमि को टुकड़ों में विभाजित कर विक्रय नहीं किया जाएगा”। लेकिन इलाके में चर्चा है कि पहले भी ऐसे कई आदेशों की धज्जियां उड़ चुकी हैं। प्लॉट काटे गए, बेचे गए, पर कार्रवाई? जीरो बटा सन्नाटा!

सबसे बड़ा सवाल – तखतपुर में अलग कानून क्यों?

जब बिलासपुर जिले की बाकी तहसीलें ऑनलाइन सिस्टम से काम कर रही हैं, तो तखतपुर-सकरी में ये ‘स्पेशल छूट’ किसके लिए? क्या ये सिस्टम भ्रष्टाचार को ऑक्सीजन देने के लिए बना है? 

स्थानीय लोगों का फूटा गुस्सा  

जागरूक नागरिकों ने कलेक्टर बिलासपुर से सीधी मांग कर दी है:

पूरे ‘ऑफलाइन रैकेट’ की उच्च स्तरीय जांच हो

पता चले कि किसके आदेश पर ऑनलाइन सिस्टम को ठेंगा दिखाया जा रहा है 

दोषी अधिकारी-कर्मचारियों पर ऐसी कार्रवाई हो कि नजीर बने

साय सरकार के लिए अग्निपरीक्षा

साय सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ का दम भरती है। अब तखतपुर-सकरी का ये मामला सरकार की नीयत और नीति दोनों की परीक्षा लेगा। 

आखिर में सवाल वही – क्या शासन-दस्ता इस भ्रष्टाचार की फाइल पर लाल कलम चलाएगा, या फिर ये मामला भी बाकी फाइलों की तरह धूल खाता रहेगा? 

जनता पूछ रही है – ऑनलाइन राज में ऑफलाइन ‘राज’ कब तक?

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